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Pope Francis Death: ब्रोंकोस्पज्म नामक बीमारी से पीड़ित थे पोप फ्रांसिस; जानिए क्या हैं इसके कारण और लक्षण

Mon, 21 Apr 2025 09:48 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Mon, 21 Apr 2025 09:48 PM IST
सार

सोमवार 21 अप्रैल को पोप फ्रांसिस की 88 वर्ष की आयु में मृत्यु हो गई। वह डबल निमोनिया (ब्रोंकोस्पज्म) से जूझ रहे थे। इस बीमारी के कारण उन्हें वेंटिलेटर पर भी रखा गया था। आइए इस बीमारी के बारे में जानते है।

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पोप फ्रांसिस का निधन - फोटो : ANI

विस्तार

कैथोलिक ईसाई धर्मगुरु पोप फ्रांसिस की 88 वर्ष की आयु में मृत्यु हो गई। उन्हें पिछले दिनों डबल निमोनिया अटैक के कारण वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था। 21 अप्रैल, 2025 को उनका निधन हुआ है। उन्होंने वेटिकन के कासा सांता मार्टा स्थित अपने निवास पर अंतिम सांस ली। बीते दिन ईस्टर के अवसर पर लंबे समय के बाद वे लोगों के सामने आए थे।

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पोप फ्रांसिस 'ब्रोंकोस्पज्म' नामक श्वसन समस्या से पीड़ित थे, जिसके कारण उन्हें सांस लेने में गंभीर जटिलताओं का सामना करना पड़ रहा था। वह वेंटिलेर पर भी थे।
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अब सवाल उठता है कि ब्रोंकोस्पज्म क्या है और इसके कारण किस प्रकार की समस्याओं का खतरा हो सकता है? आइए इस बारे में विस्तार से समझते हैं।

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पोप फ्रांसिस की सेहत को लेकर लेटेस्ट न्यूज - फोटो : ANI

ब्रोंकोस्पज्म के बारे में जानिए

ब्रोंकोस्पज्म तब होता है जब आपकी ब्रोंकाई (फेफड़ों का वायुमार्ग) को लाइन करने वाली मांसपेशियों में कसावट आ जाती है। इसके कारण आपको घरघराहट, खांसी, सांस लेने में समस्या और कई अन्य लक्षण हो सकते हैं। ब्रोंकोस्पज्म होने के लिए कई कारणों को जिम्मेदार माना जाता है जिसमें अस्थमा भी शामिल है। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, ब्रोंकाई को लाइन करने वाली मांसपेशियों में कसावट आपके वायुमार्ग को संकीर्ण कर देती हैं। यह आपके शरीर को मिलने वाली ऑक्सीजन की मात्रा को भी कम कर देती है, जो काफी जटिल स्थिति मानी जाती है।

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फेफड़े की समस्या - फोटो : Adobe stock

क्यों होती है ये समस्या?

अध्ययनकर्ताओं को पता नहीं है कि ऐसा क्यों होता है। 

कुछ शोध बताते हैं कि अस्थमा, एलर्जी और फेफड़ों की बीमारियों से पीड़ित लोगों में इन बीमारियों के होने का खतरा अधिक होता सकता है। छोटे बच्चे और 65 वर्ष से अधिक उम्र के लोग इसका शिकार अधिक देखे जाते रहे हैं। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं कुछ चिकित्सीय स्थितियां, एलर्जी और दवाएं ब्रोंकोस्पज्म का कारण बन सकती हैं। इसके अलावा क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिसऑर्डर (सीओपीडी), वायरल-बैक्टीरिया और फंगल संक्रमण, धूम्रपान, वायु प्रदूषण भी इस समस्या को बढ़ाने वाले माने जाते रहे हैं। 
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वायुमार्ग में कसावट के कारण होने वाली दिक्कतें - फोटो : Freepik.com

ब्रोंकोस्पज्म की पहचान क्या है?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, ब्रोंकोस्पज्म के लक्षणों पर ध्यान देना काफी महत्वपूर्ण हो जाता है। मांसपेशियों में कसावट के कारण आपका वायुमार्ग कितना संकुचित हो गया है या वायुप्रवाह कितना प्रभावित हुआ है, इसके आधार पर आपको कई प्रकार के लक्षणों को अनुभव हो सकता है। इसके कारण सांस लेने में समस्या होने सबसे आम है। कुछ अन्य संकेतों पर भी लगातार ध्यान देते रहना चाहिए।

  • छाती में जकड़न और सांस फूलने की समस्या।
  • घरघराहट का आवाज के साथ खांसी आना। 
  • थकान और चक्कर आने की समस्या।

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फेफड़ों को स्वस्थ रखने के लिए करें उपाय - फोटो : Freepik.com

ब्रोंकोस्पज्म का इलाज और बचाव कैसे करें?

ब्रोंकोस्पज्म का उपचार आमतौर पर कुछ प्रकार की दवाओं के माध्यम से किया जाता है। अधिक गंभीर मामलों में आपके डॉक्टर वायुमार्ग में सूजन को कम करने के लिए स्टेरॉयड और अन्य प्रकार के उपचार की भी सलाह दे सकते हैं। अब सवाल है कि क्या ब्रोंकोस्पज्म से बचा जा सकता है? 

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि ब्रोंकोस्पज्म को पूरी तरह से रोक नहीं सकते हैं, लेकिन आप अपने जोखिम को कम करने के लिए कुछ उपाय जरूर कर सकते हैं।

  • अपनी छाती में बलगम को ढीला करने के लिए हाइड्रेटेड रहें।
  • धूम्रपान से पूरी तरह से दूरी बनाकर रखें। 
  • व्यायाम करने से पहले वार्मअप करें और सांस के अभ्यास करें।
  • अगर आपको एलर्जी है तो उन चीजों से भी दूरी बनाकर रखें जो इसे बढ़ाने वाले हो सकते हैं।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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