Intermittent Fasting: वजन घटाने का ट्रेंड बन सकता है हार्ट अटैक की वजह, अध्ययन में चौंकाने वाला खुलासा
- जहां कुछ शोध बताते हैं कि इंटरमिटेंट फास्टिंग जैसे डाइट प्लान आपकी सेहत में बेहतर सुधार करने में मददगार हैं, वहीं कुछ रिपोर्ट्स में ये भी चेतावनी दी गई है कि लंबे समय तक इंटरमिटेंट फास्टिंग करने से हृदय रोग और अचानक मौत का खतरा बढ़ सकता है।
- अध्ययन में पाया गया कि जो लोग 8 घंटे के सीमित समय में भोजन करते थे और बाकी समय कुछ नहीं खाते थे उनमें हृदय रोग से मृत्यु का जोखिम 91% अधिक था।
विस्तार
Intermittent Fasting & Heart Attack: दुनियाभर में कई प्रकार की क्रॉनिक बीमारियों का खतरा बढ़ता हुआ देखा जा रहा है। लाइफस्टाइल और खान-पान में गड़बड़ी, मोटापा और सेंडेंटरी लाइफस्टाइल को इसका प्रमुख कारण माना जाता है। शोध बताते हैं, अगर हम सिर्फ अपने आहार में ही सुधार कर लें तो इससे बीमारियों के जोखिमों को काफी हद तक कम करने में मदद मिल सकती है।
यही कारण है कि आजकल इंटरमिटेंट फास्टिंग, फिटनेस और वजन घटाने का सबसे ट्रेंडिंग तरीका बन गया है। लोग इसे 'जादुई डाइट प्लान' मानकर अपनाने लगे हैं। अध्ययन भी कहते हैं कि इससे न सिर्फ वजन कंट्रोल होता है बल्कि ब्लड शुगर, मेटाबॉलिज्म और दिमाग की सेहत पर भी बेहतर असर देखा गया है।
लेकिन हर सिक्के के दो पहलू होते हैं। जहां कुछ शोध बताते हैं कि इंटरमिटेंट फास्टिंग जैसे डाइट प्लान आपकी सेहत में बेहतर सुधार करने में मददगार हैं, वहीं कुछ रिपोर्ट्स में ये भी चेतावनी दी गई है कि लंबे समय तक इंटरमिटेंट फास्टिंग करने से हृदय रोग और अचानक मौत का खतरा भी बढ़ सकता है।
मतलब साफ है कि इंटरमिटेंट फास्टिंग के लाभ जरूर हैं पर हर किसी के लिए ये एक जैसा फायदेमंद नहीं है। अगर आप भी इस तरह की डाइट का पालन कर रहे हैं तो ये रिपोर्ट आपके बड़े काम की है।
इंटरमिटेंट फास्टिंग को लेकर रही है काफी चर्चा
अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन ने एक अध्ययन की रिपोर्ट में बताया कि बिना अपनी सेहत के बारे में जाने, लोगों को देखकर आप भी इंटरमिटेंट फास्टिंग कर रहे हैं तो इससे फायदे की जगह नुकसान हो सकता है। 8 घंटे के सीमित समय में भोजन करने वाले इस डाइट प्लान से हृदय संबंधी मृत्यु का खतरा 91% बढ़ जाता है। इस बारे में जानने से पहले आइए समझ लेते हैं कि इंटरमिटेंट फास्टिंग आखिर है क्या?
इंटरमिटेंट फास्टिंग एक काफी चर्चित डाइट प्लान है, जिसमें आप दिन के कुछ घंटे खाना खाते हैं और बाकी समय उपवास रखते हैं। ये आपके खाने के शेड्यूल से संबंधित प्लान है। इसका आसान सा नियम है - 16:8 का पालन करना यानी 16 घंटे उपवास और 8 घंटे में भोजन।
हार्वर्ड मेडिकल स्कूल 2020 की रिपोर्ट के अनुसार, इंटरमिटेंट फास्टिंग से वजन और पेट की चर्बी कम हो सकती है, ब्लड शुगर और इंसुलिन लेवल कंट्रोल में रहता है और सूजन कम होती है, जिससे बीमारियों का खतरा कम होता है।
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हार्ट अटैक और मृत्यु का खतरा
इंटरमिटेंट फास्टिंग से होने वाले फायदों की खूब चर्चा रहती है, हालांकि जर्नल ऑफ अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन की एक रिपोर्ट में विशेषज्ञों ने बताया कि लंबे समय तक इंटरमिटेंट फास्टिंग हृदय संबंधी मृत्यु जैसे हार्ट अटैक के खतरे को 91% तक बढ़ा सकता है।
20,000 से ज्यादा वयस्कों पर किए गए अध्ययन में पाया गया कि जो लोग 8 घंटे के सीमित समय में भोजन करते थे और बाकी समय कुछ नहीं खाते थे उनमें हृदय रोग से मृत्यु का जोखिम 91% अधिक था। पहले से ही हृदय रोग या कैंसर से पीड़ित लोगों में भी हृदय संबंधी मृत्यु का जोखिम और भी बढ़ जाता है।
इंटरमिटेंट फास्टिंग का शरीर पर क्या होता है असर?
चीन स्थित शंघाई जियो टोंग यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन में महामारी विज्ञान के प्रोफेसर और शोध के लेखक विक्टर वेन्जे झोंग कहते हैं, इंटरमिटेंट फास्टिंग के दीर्घकालिक स्वास्थ्य प्रभावों को समझने के लिए किए गए अध्ययन में पाया गया है कि यह हृदय रोग के जोखिमों को बढ़ाने वाला हो सकता है।
असल में इंटरमिटेंट फास्टिंग के जरिए कैलोरी को कंट्रोल करने का लक्ष्य होता है। कैलोरी पर बहुत ज्यादा या लंबे समय तक प्रतिबंध लगाने से रक्त शर्करा का स्तर कम हो सकता है, जिससे दिल की धड़कन बढ़ जाती है। अगर आप लंबे समय तक कुछ नहीं खा रहे हैं, लेकिन फिर भी दिनभर सक्रिय रहते हैं, तो संभव है कि इससे आपकी हृदय गति बढ़ जाए। इस तरह की अनियमितता के दीर्घकालिक दुष्प्रभाव देखे गए हैं।
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प्रजनन स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है नकारात्मक प्रभाव
हृदय स्वास्थ्य पर इसके दुष्प्रभावों के अलावा एक अन्य अध्ययन में शोधकर्ताओं की टीम ने पाया कि इंटरमिटेंट फास्टिंग महिलाओं के प्रजनन हार्मोन को भी प्रभावित कर देती है। वैज्ञानिकों ने बताया कि इस तरीके को प्रयोग में लाने वाली महिलाओं में मां बनने से संबंधित समस्याओं के बारे में पता चला है। हार्मोन्स असंतुलन के कारण प्रजनन के साथ-साथ शरीर में और भी कई प्रकार की जटिलताओं का जोखिम हो सकता है, ऐसे में बिना डॉक्टरी सलाह के ऐसे उपायों को प्रयोग में लाने से बचा जाना चाहिए।
अध्ययन से पता चला है कि यह आहार पैटर्न, शरीर में आवश्यक इस हार्मोन के उत्पादन में कमी का कारण बनता है, जिसका अंडे की गुणवत्ता और ओवरी के कार्यों पर भी प्रभाव देखा गया है।
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स्रोत और संदर्भ
8-hour time-restricted eating linked to a 91% higher risk of cardiovascular deat
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