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E-Thrombosis: ऑफिस की ये लापरवाही साबित हो सकती है जानलेवा, युवाओं में बढ़ रहा है 'ई-थ्रोम्बोसिस' का खतरा

Mon, 08 Sep 2025 08:01 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Mon, 08 Sep 2025 08:01 PM IST
सार

  •  विशेषज्ञों की एक टीम ने आगाह किया है कि हमारी दिनचर्या की एक सामान्य आदत जिसपर अक्सर लोगों का ध्यान भी नहीं जाता है इसके कारण भी रक्त के थक्के बनने की दिक्कत बढ़ गई है

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ऑफिस में बैठे रहते हैं तो हो जाएं सावधान - फोटो : freepik.com

विस्तार

E-Thrombosis In Young Adults: शरीर को स्वस्थ रखने के लिए सभी अंगों में रक्त का संचार ठीक तरीके से होते रहना जरूरी है। इस प्रक्रिया में आने वाली कोई भी बाधा संपूर्ण स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाली हो सकती है। खून का थक्का बनना यानी ब्लड क्लॉटिंग, रक्त के सामान्य संचार को बाधित करने वाली सबसे आम स्थिति है। डॉक्टर कहते हैं, आजकल की भागदौड़ भरी लाइफस्टाइल ने इस समस्या को और भी बढ़ावा दिया है। ब्लड क्लॉटिंग से सबसे बड़ा खतरा हृदय स्वास्थ्य पर देखा जाता रहा है, ये हार्ट अटैक का प्रमुख कारण है। 

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क्या आप जानते हैं कि जाने-अनजाने हम रोजाना कुछ ऐसी गलतियां कर रहे हैं जिससे खून का थक्का बनने की दिक्कत बढ़ सकती है। हाल ही में विशेषज्ञों की एक टीम ने आगाह किया है कि हमारी दिनचर्या की एक सामान्य आदत जिसपर अक्सर लोगों का ध्यान भी नहीं जाता है इसके कारण भी रक्त के थक्के बनने की दिक्कत हो सकती है। कोरोना  महामारी के बाद तो कई मामलों में डॉक्टरों ने देखा कि संक्रमण और इलाज के दौरान भी खून के थक्के बनने की समस्या बढ़ गई है। यानी ये अब सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं रही, युवा भी इसका शिकार हो रहे हैं। 
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आखिर हम कौन सी ऐसी गलती कर रहे हैं जो सेहत के लिए इस गंभीर और जानलेवा समस्या को बढ़ाती जा रही है, आइए इस बारे में जानते हैं।

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रक्त के थक्के बनने के कारण होने वाली समस्याएं - फोटो : adobe stock

ब्लड क्लॉटिंग और इसका खतरा

हमारी दिनचर्या की किस गड़बड़ी के कारण ब्लड क्लॉटिंग का जोखिम बढ़ गया है, इस बारे में जानने से पहले ये जानना जरूरी है कि ब्लड क्लॉटिंग आखिर समस्या क्या है और ये कितनी खतरनाक है?

अक्सर जब शरीर में चोट लगती है तो इसमें खून का थक्का बनना एक जरूरी प्रक्रिया होती है ताकि खून के अधिक बहाव को रोका जाए और घाव भर सके। ये हमारे शरीर की प्राकृतिक और सुरक्षात्मक प्रणाली का हिस्सा है।  लेकिन असली परेशानी तब शुरू होती है जब बिना किसी चोट के अंदर ही अंदर खून के थक्के बनने लगते हैं। ये थक्के खून की नलियों को ब्लॉक कर देते हैं और हार्ट अटैक, स्ट्रोक या फेफड़ों में समस्या जैसी जानलेवा बीमारियों का कारण बन सकते हैं।


स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, यह लंबे समय से ज्ञात है कि लंबी दूरी की उड़ानों के दौरान बैठे रहने से जानलेवा रक्त के थक्के बन सकते हैं। लेकिन यह खतरा आपके कार्यालय में हो सकता है। अगर आप दिन का एक बड़ा हिस्सा अपनी डेस्क पर बैठे-बैठ बिताते हैं तो भी आपमें ब्लड क्लॉटिंग का जोखिम हो सकता है।

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पैरों को क्रॉस करके बैठने की आदत खतरनाक - फोटो : Adobe Stock

युवाओं में बढ़ता 'ई-थ्रोम्बोसिस' का खतरा

मेडिकल एक्सपर्ट्स ने बताया कि लंबे समय तक बैठे रहने की आदत ब्लड क्लॉटिंग की दिक्कत को बढ़ा देती है, वहीं पैरों को क्रॉस करके बैठने से आपको और भी ज्यादा खतरा हो सकता है। आमतौर पर इस तरीके से बैठने से शरीर के निचले अंगों में रक्त प्रवाह बाधित हो सकती है, जिससे 'ई-थ्रोम्बोसिस' नामक समस्या हो सकती है। 

'ई-थ्रोम्बोसिस' शब्द, कंप्यूटर से संबंधित घातक रक्त के थक्कों के लिए प्रयोग में लाया जाता है, जैसे काम के दौरान अपनी डेस्क पर बैठे रहने, गेमिंग कुर्सी पर घंटों बिताने के कारण होने वाली समस्या।

जब आप पैरों को क्रॉस करके बैठते हैं, तो इससे एक प्रकार का प्रेशर प्वाइंट बनता है जो रक्त संचार को काफी हद तक बाधित कर सकता है। समय के साथ ये स्थिति आपके पैरों की नसों को संकुचित कर देती है, जिससे रक्त प्रवाह धीमा हो जाता है और थक्के बनने की आशंका बढ़ जाती है।

डॉक्टरों ने कहा कई लोग अपनी स्थिति बदले बिना दिन में आठ या उससे ज्यादा घंटे बैठे रहते हैं, जिससे अनजाने में ही खुद को जोखिम में डाल लेते हैं।

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पैरों में दर्द और थक्के बनने की समस्या - फोटो : freepik.com

थ्रोम्बोसिस से बचे रहने के लिए क्या करें?

डॉक्टर्स कहते हैं, मानव शरीर घंटों तक एक ही स्थिति में रहने के लिए डिजाइन ही नहीं किया गया है। जिन लोगों का काम ही ऑफिस में बैठे रहने का है, वह समय-समय पर थोड़ा सा टहल भी लेते हैं तो पैरों में रक्त का संचार ठीक से हो सकता है और इससे थक्का बनने का खतरा भी कम होता है।'

इससे पहले हुए एक अध्ययन में भी पाया गया था कि पैरों को क्रॉस करके बैठने से निचले अंगों की रक्त वाहिकाओं में रक्त प्रवाह की गति बदल सकती है, जिससे रक्त के थक्के बनने का खतरा बढ़ सकता है।

डेस्क जॉब करने वाले, या जिन लोगों को लंबे समय तक बैठे रहना होता है उनके लिए डॉक्टर्स ने कुछ सलाह दिए हैं।

  • रक्त प्रवाह को बढ़ाने के लिए कम से कम हर 30 मिनट में उठकर टहलना जरूरी है।
  • बैठते समय दोनों पैरों को जमीन पर सीधा रखें।
  • अपने पूरे ऑफिस टाइम में नियमित रूप से खड़े रहें या खड़े होकर भी काम कर सकते हैं।
  • जब आपको लंबे समय तक बैठना पड़े तो समय-समय पर अपने पैरों को फैलाएँ और अपने टखनों को घुमाएं।




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नोट: 
यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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