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Lionel Messi: इस दुर्लभ बीमारी के शिकार थे मेसी, लंबे समय तक रोजाना पैरों में लगते थे इंजेक्शन

Mon, 19 Dec 2022 04:07 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Mon, 19 Dec 2022 04:07 PM IST
सार

ग्रोथ हार्मोन डिफिशिएंसी काफी दुर्लभ स्थिति है, इससे प्रभावित बच्चों के शरीर का विकास नहीं हो पाता है। मेसी जब 12 साल के थे, उन्हें रोजाना पैरों में  हार्मोन का इंजेक्शन लगाया जाता था।

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लियोनल मेसी - फोटो : Twitter

विस्तार

फीफा विश्वकप 2022 में रविवार को अर्जेंटीना ने कमाल कर दिखाया, जीत के नायक रहे गोल्डन बॉल विजेता लियोनल मेसी। हर तरफ सोशल मीडिया पर मेसी की चर्चा हो रही है। पर क्या आप जानते हैं कि विश्व फ़ुटबॉल का यह सितारा बचपन से ही एक गंभीर और दुलर्भ बीमारी का शिकार है? मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मेसी जब सिर्फ 11 साल के थे, तभी से ग्रोथ हार्मोन डिफिशिएंसी के शिकार हैं। शरीर में ग्रोथ हार्मोन की कमी के कारण विकास से संबंधित समस्या हो सकती हैं। मेसी का इसके लिए लंबे समय तक इलाज भी चला है।

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मीडिया रिपोर्टस से पता चलता है कि मेसी जब 12 साल के थे, उन्हें रोजाना पैरों में  हार्मोन का इंजेक्शन लगाया जाता था। डॉक्टर्स कहते हैं, ग्रोथ हार्मोन डिफिशिएंसी काफी दुर्लभ स्थिति है, इससे प्रभावित बच्चों के शरीर का विकास नहीं हो पाता है। अक्सर ऐसे बच्चे कम हाइट वाले होते है हालांकि इसका इलाज संभव है जिससे जटिलताओं को कम करने और शरीर के विकास को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है। आइए इस बारे में जानते हैं।

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ग्रोथ हार्मोन डिफिशिएंसी की समस्या (सांकेतिक) - फोटो : iStock

ग्रोथ हार्मोन डिफिशिएंसी के बारे में जानिए

ग्रोथ हार्मोन की कमी (जीएचडी) की स्थिति के शिकार लोगों में हाइट न बढ़ने की समस्या सबसे अधिक देखी जाती रही है। यह बौनेपन का कारण बन सकती है। इसके शिकार बच्चों का कद सामान्य शरीर के अनुपात में छोटा रह जाता है। यह समस्या जन्मजात हो सकती है या फिर इसके बाद में भी विकसित होने का खतरा रहता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ कारणों से पिट्यूटरी ग्रंथि से ग्रोथ हार्मोन का बनना काफी कम हो जाता है। इसके लिए आनुवंशिक दोष, मस्तिष्क की गंभीर चोट या जन्म से ही पिट्यूटरी ग्रंथि न होने की स्थिति को कारण माना जा सकता है।

ग्रोथ हार्मोन की कमी और जटिलताएं

एक अनुमान के मुताबिक करीब सात हजार नवजात में से एक में इस प्रकार के विकारों का जोखिम होता है। ग्रोथ हार्मोन की कमी के कारण न सिर्फ शरीर की लंबाई कम हो सकती है साथ ही दिमाग का विकास भी प्रभावित हो सकता है। जीएचडी की समस्या जन्मजात या फिर बाद में भी विकसित हो सकती है, जिसका समय पर निदान करके इलाज के माध्यमों से लक्षणों में सुधार किया जा सकता है। जिन लोगों को यह समस्या होती है उनमें शरीर की लंबाई कम रह जाना, लड़कियों में स्तन के विकास या भी यौनावस्था से संबंधित कई तरह की समस्याओं को भी बढ़ाने वाली हो सकती है।

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सिंथेटिक ग्रोथ हार्मोन थेरपी (सांकेतिक) - फोटो : iStock

ग्रोथ हार्मोन की कमी का इलाज संभव

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि अगर समय रहते जीएचडी की स्थिति का निदान कर लिया जाए तो इसमें सुधार किया जा सकता है। 1980 के दशक के मध्य से, बच्चों और वयस्कों के इलाज के लिए सिंथेटिक ग्रोथ हार्मोन थेरपी को प्रयोग में लाकर सफलता पाई गई है। ग्रोथ हार्मोन इंजेक्शन द्वारा दिया जाता है, इससे अंगों और मस्तिष्क के विकास को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है। शोधकर्ताओं ने इस थेरपी के कुछ दुष्प्रभावों के बारे में भी अलर्ट किया है। दीर्घकालिक रूप से  ग्रोथ हार्मोन थेरपी इंजेक्शन के कारण मधुमेह की समस्या देखी गई है, हालांकि इसमें आनुवांशिकता वाले लोगों में जोखिम अधिक होता है। 



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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