फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Lifestyle ›   Health & Fitness ›   Jan Swasthya Abhiyan manifesto regarding Right to Health, these 'guarantees' are being sought from political

लोकसभा चुनाव: जनस्वास्थ्य अभियान का राइट टू हेल्थ को लेकर घोषणा पत्र, राजनीतिक दलों से मांग रहे ये 'गारंटियां'

Thu, 21 Mar 2024 07:04 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Thu, 21 Mar 2024 07:04 PM IST
विज्ञापन
Jan Swasthya Abhiyan  manifesto regarding Right to Health, these 'guarantees' are being sought from political
Jan Swasthya Abhiyan - फोटो : amarujala

लोकसभा चुनाव 2024 से पहले जन स्वास्थ्य अभियान संगठन ने स्वास्थ्य और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर एक जन घोषणा पत्र तैयार किया है। इसे विभिन्न राजनीतिक दलों तक इस उम्मीद के साथ पहुंचाया जा रहा है कि वे इसे अपने चुनावी घोषणा पत्र में इसे शामिल करेंगे।

विज्ञापन


जन स्वास्थ्य अभियान ने इस घोषणा पत्र में राइट टू हेल्थ और हेल्थ केयर से संबंधित कई तरह की नीतियों का जिक्र किया है। इनमें हमारी सेहत हमारा अधिकार, स्वास्थ्य क्षेत्र के बजट में वृद्धि, स्वास्थ्य कर्मियों के लिए रिक्त पदों को भरना और राज्य सरकार व नगरीय निकाय को प्रशासकीय व वित्तीय शक्तियां प्रदान समेत अन्य विषय शामिल है।
विज्ञापन


जन स्वास्थ्य अभियान के राष्ट्रीय सह-संयोजक डॉ.अभय शुक्ला ने गुरुवार को प्रेस क्लब में आयोजित वार्ता में कहा-

हर वर्ष करोड़ों भारतीयों को उचित चिकित्सा सुविधा नहीं मिलने के कारण अस्पतालों के चक्कर काटने पड़ते है। पैसा खर्च करने के बावजूद उनका ठीक से इलाज नहीं हो पाता है। लेकिन आम चुनाव के प्रमुख मुद्दों में लोगों की सेहत और अस्पतालों की खराब व्यवस्था और दवाइयों का बढ़ता गायब है। समाज का सबसे मुखर वर्ग शिक्षित मध्यम वर्ग अक्सर सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ नहीं उठाता और इसके बजाय निजी क्षेत्र को प्राथमिकता देता है। क्योंकि उन्हें सरकारी अस्पतालों में सुविधाओं और प्रशिक्षित चिकित्सकों की किल्लत नजर आती है।

विज्ञापन
विज्ञापन


शुक्ला का कहना है कि केंद्र सरकार को स्वास्थ्य का बजट बढ़ाना चाहिए। आज स्वास्थ्य का बजट जीडीपी का 0.3 प्रतिशत है। सरकार को इसे जीडीपी का साढ़े तीन फीसदी तक ले जाना चाहिए। आज सरकार जगह जगह आरोग्य सेंटर के नाम बदलकर आरोग्य मंदिर कर रही है। हमारी सरकार से मांग है कि नाम बदलने से कुछ नहीं होगा। इनमें योग्य स्टॉफ, सभी प्रकार की सुविधाएं, दवाइयां  और बिस्तरों की व्यवस्था होनी चाहिए।

स्वास्थ्य खर्च को कम करने की जरूरत

शुक्ला का कहना है कि, आउट ऑफ पॉकेट जा रहे स्वास्थ्य खर्च को अगले पांच वर्ष में कम करने की जरूरत है। इसे 25 फीसदी तक कम करने की आवश्यकता है। केंद्र सरकार से अपेक्षा है कि वे जन स्वास्थ्य सुविधाओं को सभी स्तरों पर निशुल्क इस्तेमाल के लिए सुनिश्चित करे। स्वास्थ्य क्षेत्र में पनप रहे भ्रष्टाचार जड़ से खत्म करना और इन सेवाओं में सामुदायिक भागीदारी सुनिश्चित करना। इन बातों की तरफ भी गौर करने की जरूरत है।

जन स्वास्थ्य अभियान संगठन के अन्य पदाधिकारियों ने कहा कि, स्वास्थ्य सेवाओं को यूनिवर्सल हेल्थ केयर के रुप में बदलने के लिए पीपीपी मॉडल को खत्म करने की जरूरत है। निजीकरण को रोकना और सरकारी सहायता से जारी हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम को बदलकर जन आधारित सिस्टम विकसित किया जाए। आज मेडिकल शिक्षा और नेशनल मेडिकल काउंसिल में बड़े सुधारों की आवश्यकता है।



निजी मेडिकल कॉलेज के व्यवसायीकरण पर रोक लगाने की जरूरत है।  देश में अब और अधिक प्राइवेट कॉलेजों को मान्यता नहीं दी जानी चाहिए। साथ ही उनकी फीस का स्ट्रक्चर भी ऐसा बनाया जाना चाहिए ताकि उनकी फीस सरकारी मेडिकल कॉलेजों से ज्यादा न हो।

 

विज्ञापन
विज्ञापन

सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें  लाइफ़ स्टाइल से संबंधित समाचार (Lifestyle News in Hindi), लाइफ़स्टाइल जगत (Lifestyle section) की अन्य खबरें जैसे हेल्थ एंड फिटनेस न्यूज़ (Health  and fitness news), लाइव फैशन न्यूज़, (live fashion news) लेटेस्ट फूड न्यूज़ इन हिंदी, (latest food news) रिलेशनशिप न्यूज़ (relationship news in Hindi) और यात्रा (travel news in Hindi)  आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़ (Hindi News)।  

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed