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आत्महत्या की ओर क्यों धकेलता है अवसाद, क्या हैं इसके उपाय? ऐसे ही सवालों पर जानें साइकोलॉजिस्ट के जवाब

Thu, 18 Jun 2020 02:24 AM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निलेश कुमार Updated Thu, 18 Jun 2020 02:24 AM IST
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How someone commit suicide in Depression symptoms, prevention and treatment by Psychologist Shivani Misri Sadhoo
Depression Discussion - फोटो : Amar Ujala

अक्सर लोगों के जीवन में कुछ ऐसा होता है कि वे खुद को हारा हुआ महसूस करते हैं। उन्हें ऐसा लगता है कि उनके लिए अब कुछ नहीं बचा है। उनकी न किसी को फिक्र है और न ही किसी को उनसे कुछ लेना देना है। तनाव और चिंता एक लंबे समय तक रहे तो यह अवसाद में तब्दील हो जाता है। यही अवसाद एक समय इंसान को ऐसी स्थिति में पहुंच देता है, जिसमें व्यक्ति खुदकुशी जैसा कदम उठा लेता है और अपना जीवन समाप्त कर बैठता है। 

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हाल के दिनों में बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत, उनकी एक्स मैनेजर समेत कई लोगों के खुदकुशी करने की खबरें सामने आई। ऐसे अधिकतर मामलों में कारण के रूप में डिप्रेशन यानी कि अवसाद सामने आया। अवसाद क्या है, यह क्यों होता है, इससे बचा कैसे जाए और पाठकों-दर्शकों के ऐसे ही तमाम सवालों के जवाब के लिए अमर उजाला के खास कार्यक्रम में साइकोलॉजिस्ट और रिलेशनशिप स्पेशलिस्ट शिवानी मिश्री जुड़ीं। उन्होंने इस विषय पर तमाम ऐसी उलझनों को स्पष्ट किया, उसका हल बताया, जिनको लेकर कोई व्यक्ति अवसाद में चला जाता है। आपलोगों के समझने के लिए उनसे हुई पूरी बातचीत का सार यहां हम बता रहे हैं। 
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अवसाद क्या है? कैसे पहचानें कि कोई व्यक्ति अवसाद में है?
जब किसी बात को लेकर तनाव हो, चिंता हो और यह लंबे समय तक लगातार रहे तो यह स्थिति अवसाद में तब्दील हो जाती है। यह किसी घटना को लेकर हो सकता है। पढ़ाई, करियर या रिलेशनशिप में असफल होने के कारण भी हो सकता है। या फिर किसी के बहुत दूर चले जाने या उन्हें खो देने के कारण हो सकता है। 



इसमें व्यक्ति के वजन, भूख, नींद, बातचीत और व्यवहार में बदलाव दिखता है। उसे अकेलापन महसूस होता है। दुखी रहना, मानसिक तौर पर परेशानी, किसी बात को लेकर डर जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। 

How someone commit suicide in Depression symptoms, prevention and treatment by Psychologist Shivani Misri Sadhoo
Depression - फोटो : Pixabay

कोई भी व्यक्ति आत्महत्या जैसा कदम क्यों उठा लेता है? 
कोई भी अचानक आत्महत्या जैसा बड़ा कदम नहीं उठाता है। कुछ लोगों के लिए बहुत सोची समझी योजना होती है। मानसिक बीमार होने के कारण उन्हें लगता है कि आत्महत्या ही आखिरी समाधान है। ब्रेकअप होना, किसी अपने की मृत्यु होने पर भी व्यक्ति ऐसी स्थिति में पहुंच जाता है। करियर में सफल होने के बावजूद अन्य कारण भी हो सकते हैं।

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किसी को लगता है कि उसके होने, न होने से किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता है। कई बार व्यक्ति जब लंबे समय से तनाव से गुजर रहा होता है, तो वह कई बार खुदकुशी जैसे गलत कदम उठाने की सोचता है। जब हर ओर उसे नाउम्मीदी दिखती है तो वह ऐसा कदम उठा लेता है। लेकिन उसका कोई अपना, दोस्त, सहकर्मी वगैरह उसपर ध्यान दे तो उसे ऐसा करने से रोका जा सकता है। 

How someone commit suicide in Depression symptoms, prevention and treatment by Psychologist Shivani Misri Sadhoo
Depression - फोटो : Pixabay/Amar Ujala

कई लोग बड़ी समस्याओं से नहीं घबराते और कुछ लोग छोटी सी दिक्कत में भी अवसादग्रस्त हो जाते हैं? दोनों के मेंटल हेल्थ में क्या अंतर होता है?

  • सबके मानसिक स्वास्थ्य का स्तर अलग होता है। कई लोग होते हैं जो परीक्षा के पहले, रिजल्ट के पहले, शादी से पहले घबराए रहते हैं या तनावग्रस्त हो जाते हैं। कई लोग बड़ी समस्याओं से नहीं घबराते। मायने यह भी रखता है कि आपने जीवन में कितना संघर्ष देखा है।

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  • ओवरथिंकिंग भी बड़ा कारण है। जरूरत से ज्यादा सोचना हमें अवसाद में धकेल सकता है। कई चीजें हमारे हाथ में नहीं होती, उसे समय पर छोड़ देना बेहतर है। हमने अपने हिस्से की मेहनत की, कोशिश की, बस इसे पूरा करें और संतुष्टि बहुत जरूरी है। 

How someone commit suicide in Depression symptoms, prevention and treatment by Psychologist Shivani Misri Sadhoo
Counselling - फोटो : Pixabay

अवसाद से बाहर निकलने के क्या उपाय हैं?
किसी व्यक्ति को अवसाद की स्थिति से बाहर निकालने में उसके आसपास रह रहे लोगों, उसके रिश्तेदार, दोस्त, सहकर्मी आदि की भूमिका अहम होती है। इसके जो शुरुआती लक्षण बताए, उनमें से अगर कुछ भी दिख रहा हो तो आप उस व्यक्ति के पास जाएं। उससे बातें करें और उसका मन हल्का करने की कोशिश करें। उसे यह बताएं कि यह एक मानसिक स्थिति है और उसे काउंसिलिंग के लिए राजी करें। साइकोलॉजिस्ट या मनोचिकित्सक के पास लेकर जाएं। 

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डिप्रेशन की स्थिति हावी होने पर पीड़ित व्यक्ति की काउंसिलिंग बहुत जरूरी है। उन्हें खासकर समय रहते मदद की जरूरत होती है। मन में गलत ख्याल आए तो  मनोचिकित्सक से खुल कर बातें करनी चाहिए। डिप्रेशन से पीड़ित व्यक्ति के अभिवावक या किसी अपने को चाहिए कि वे मनोचिकित्सक से पीड़ित के व्यवहार में आए बदलावों के विषय में खुल कर बात करें। मनोचिकित्सक जरूरत के अनुसार, दवाओं और थेरेपी के जरिए पीड़ित का इलाज करते हैं। अगर सही समय पर मदद मिल जाए, तो इस मुश्किल से छुटकारा संभव है।

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