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Coronavirus: आखिर कैसे फैलता है हवा से संक्रमण, हमारे लिए क्यों जरूरी है यह जानना?

Sun, 12 Jul 2020 07:10 PM IST
सोनू शर्मा बीबीसी हिंदी
बीबीसी हिंदी Published by: सोनू शर्मा Updated Sun, 12 Jul 2020 07:10 PM IST
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How Coronavirus infection spread through air and why is it important to know
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

हाल तक विश्व स्वास्थ्य संगठन का ये कहना रहा था कि कोरोना वायरस का संक्रमण किसी सतह के संपर्क में आने से ही होता है। वैज्ञानिक सबूत भी इसकी तस्दीक कर रहे थे। यही वजह थी कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के अधिकारियों ने कोविड-19 की बीमारी से बचाव के लिए मुख्य तौर पर हाथ धोने की सलाह दी थी। लेकिन अब वे ये कह रहे हैं कि खास परिस्थितियों में 'हवा से संक्रमण' की संभावना को भी खारिज नहीं किया जा सकता है। 



इसका मतलब ये हुआ कि जब लोग एक दूसरे से बात कर रहे होते हैं या फिर सांस छोड़ रहे होते हैं, तो सूक्ष्म कणों के जरिए भी कोरोना वायरस का संक्रमण हो सकता है। अगर वैज्ञानिक साक्ष्यों से इसकी पुष्टि हो जाती है तो इससे चारदीवारी के भीतर वाली जगहों पर संक्रमण से बचाव के लिए दी गई गाइडलाइंस पर असर पड़ेगा। 

How Coronavirus infection spread through air and why is it important to know
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

'हवा से संक्रमण' का क्या मतलब है? 

  • 'हवा से संक्रमण' तब होता है जब हम सांस के जरिए बैक्टीरिया या वायरस लेते हैं। ये बैक्टीरिया या वायरस हवा में तैर रहे सूक्ष्म कणों के जरिए हम तक पहुंचते हैं। ये सूक्ष्म कण घंटों तक हवा में रह सकते हैं। कफ की छोटी-छोटी बूंदें बड़े इलाके तक फैल सकती हैं। टीबी (तपेदिक), फ्लू और निमोनिया हवा के जरिए फैलने वाली बीमारियों के उदाहरण हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने ये माना है कि इस बात के साक्ष्य मिले हैं कि बंद और भीड़-भाड़ वाली जगहों पर कोरोना वायरस का संक्रमण हवा के जरिए हो सकता है। 
How Coronavirus infection spread through air and why is it important to know
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

ये हवा में कितनी देर तक जीवित रहता है? 

रिसर्च में ये बात सामने आई है कि कृत्रिम रूप से जब हवा में कोरोना वायरस का छिड़काव किया गया तो ये पाया गया कि कोरोना वायरस तीन घंटे तक जीवित रह सकता है। लेकिन वैज्ञानिक ये भी कहते हैं कि ये प्रयोग लैबोरेटरी के नियंत्रित माहौल में किया गया था, असल जिंदगी में नतीजे अलग हो सकते हैं। 

कोरोना वायरस संक्रमण के मामले जिस तेजी से बढ़ रहे हैं, उससे ये आशंका मजबूत हुई हैं कि इस महामारी का संक्रमण हवा के जरिए भी हो सकता है। अमेरिका के वॉशिंगटन शहर के माउंट वर्नन में एक आदमी पर कम से कम 45 लोगों को संक्रमित करने का संदेह है। ये लोग एक गायक मंडली के सदस्य थे। संक्रमित होने वाले लोगों में से कुछ ने सोशल डिस्टेंसिंग के कोई नियम नहीं तोड़े थे। 

जनवरी के आखिर में चीन के ग्वांग्झू में भी ऐसा ही एक मामला रिपोर्ट हुआ था। इस आदमी पर कम से कम नौ लोगों को कोरोना संक्रमित करने का संदेह था। सभी लोगों ने एक ही रेस्तरां में खाया था। वैज्ञानिकों का कहना है कि रेस्तरां में एक संक्रमित ग्राहक उस व्यक्ति से छह मीटर की दूरी पर बैठा हुआ था। 

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How Coronavirus infection spread through air and why is it important to know
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pexels.com

हमें अब क्या करना चाहिए? 

कोई बीमारी जिस तरह से फैलती है, उससे ये तय होता है कि इसे रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएं। विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से जारी की गई मौजूदा गाइडलाइंस के तहत गुनगुने पानी से 20 सेकेंड तक साबुन से हाथ धोने की सलाह दी गई है। 

इसके अलावा डब्ल्यूएचओ ने सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन करने की भी सलाह दी है। लेकिन कुछ वैज्ञानिकों का अब ये कहना है कि इन एहतियाती उपायों की अपनी अहमियत है लेकिन हवा से संक्रमण के फैलने की सूरत में ये नाकाफी होंगे। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

अभी तक डब्ल्यूएचओ ने अपनी मौजूदा गाइडलाइंस में कोई नई बात नहीं जोड़ी है, लेकिन वे नए साक्ष्यों का मूल्यांकन कर रहे हैं। अगर इसकी पुष्टि होती है तो आधिकारिक सलाह में मास्क के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल की बात को जोड़ा जा सकता है। 

सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों को और सख्त करने की वकालत की जा सकती है, खासकर बार, रेस्तरां और सार्वजनिक परिवहन के साधनों में। उन जगहों पर जहां एयर कंडीशनर की व्यवस्था होती है, उनके लिए भी कुछ सख्त नियम लाने पर विचार किया जा सकता है। 

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