स्क्लेरोडर्मा एक एेसी बीमारी है, जो महिलाओं को अपना शिकार बनाती है। लोग इस बीमारी से बहुत कम जागरूक हैं। यह एक लाइलाज बीमारी है, जिसमें शरीर के स्वस्थ टिश्यु पर प्रभाव पड़ता है जिसके कारण त्वचा का कठोर बन जाती है। 30 से 50 उम्र के बीच की महिलाओं को यह बीमारी अपना शिकार बनाती है। सोचने वाली बात तो यह है कि अब तक इसका कोई इलाज नहीं ढूंढ़ सका पर हम सजग रहकर इस बीमारी से लड़ सकते हैं।
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30 से ऊपर की महिलाएं हो रही हैं लाइलाज बीमारी 'स्कलोडर्मा' की शिकार, जानिए लक्षण
Wed, 31 Jul 2019 04:45 PM IST
पंखुड़ी सिंह
लाइफस्टाइल डेस्क
लाइफस्टाइल डेस्क
Published by: पंखुड़ी सिंह
Updated Wed, 31 Jul 2019 04:45 PM IST
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क्या है यह स्केलोडर्मा
इस बीमारी का नाम ग्रीक के शब्द स्कलेरो और डर्मा से मिलकर बना हैं जिसका अर्थ है कठोर त्वचा। इस बीमारी में त्वचा सख्त व चमकदार बन जाती है। यह बीमारी पुरूषों की तुलना में महिलाओं को 4 गुना ज्यादा होती है। शरीर के अच्छे टिश्यु पर प्रभाव डालती है फिर उन्हें सख्त बना देती है। यह इस बीमारी की पहली पहचान है।
इस बीमारी का नाम ग्रीक के शब्द स्कलेरो और डर्मा से मिलकर बना हैं जिसका अर्थ है कठोर त्वचा। इस बीमारी में त्वचा सख्त व चमकदार बन जाती है। यह बीमारी पुरूषों की तुलना में महिलाओं को 4 गुना ज्यादा होती है। शरीर के अच्छे टिश्यु पर प्रभाव डालती है फिर उन्हें सख्त बना देती है। यह इस बीमारी की पहली पहचान है।
क्या हैं इस बीमारी का कारण
स्क्लेरोडर्मा का कोई इलाज नहीं है क्योंकि इस बीमारी का कारण किसी को पता नहीं चला। यह एक अॉटोइम्यून बीमारी है, जिसमें किसी की प्रतिरक्षा प्रणाली उसके शरीर के विरूद्ध कार्य करने लगती है।
स्क्लेरोडर्मा का कोई इलाज नहीं है क्योंकि इस बीमारी का कारण किसी को पता नहीं चला। यह एक अॉटोइम्यून बीमारी है, जिसमें किसी की प्रतिरक्षा प्रणाली उसके शरीर के विरूद्ध कार्य करने लगती है।
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इस बीमारी के दो प्रकार हैं
स्क्लेरोडर्मा के दो प्रकार हैं । सीमित यानी की लोकलाइज्ड और फैली हुई यानी सिस्टेमेटिक सक्लेरोडर्मा । सीमित स्क्लेरोडर्मा में बीमारी त्वचा व त्वचा के नीचे कोशिकाओं को प्रभावित करती हैं। इसमें आंख में यूवाइटिस व जोड़ो में गठिया रोग हो सकता हैं । इसमें चमड़ी सख्त हो जाती हैं और इसमें शुरूआत में दाग के चारों तरफ लाल या बैंगनी रंग की रेखा होती हैं जो प्रदाह दर्शाती हैं । सिस्टेमेटिक स्क्लेरोडर्मा में प्रक्रिया दूर तक फैली होती हैं और इसके त्वचा के अतिरिक्त शरीर के अन्दरूनी अंग भी प्रभावित होते हैं । स्क्लेरोडर्मा एक असामान्य बीमारी है। यह एक लाख में से 3 लोगों में पायी जाती है।
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क्या है इसका इलाज
सबसे पहले यह जान लेना जरूरी है कि यह एक लाइलाज बीमारी है। यह अपने आप कुछ वर्षो में सही हो जाती है लेकिन दोबारा भी हो सकती है। इस बीमारी की कोई दवा नहीं है। दवा के लिए शोध जारी हैं। इस बीमारी में जोड़ो और फेफड़ों की कार्यक्षमता को बनाए रखने के लिए व्यायाम जरूरी होता है।
सबसे पहले यह जान लेना जरूरी है कि यह एक लाइलाज बीमारी है। यह अपने आप कुछ वर्षो में सही हो जाती है लेकिन दोबारा भी हो सकती है। इस बीमारी की कोई दवा नहीं है। दवा के लिए शोध जारी हैं। इस बीमारी में जोड़ो और फेफड़ों की कार्यक्षमता को बनाए रखने के लिए व्यायाम जरूरी होता है।