चक्कर खाकर गिरना या बेहोशी का अनुभव कभी न कभी आपने ने भी अपने जीवन में किया होगा और नहीं किया तो अच्छी बात है। बेहोशी को सामान्य समझकर अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। भले ही ये सामान्य लगे लेकिन बेहोशी जानलेवा हो सकती है। आगे की स्लाइड्स में जानें कारण।
जब आप बेहोश होते हैं, तो आप गिर सकते हैं और खुद को घायल कर सकते हैं। कई बार यह घातक चोटों का कारण बन सकता है, जिससे व्यक्ति जिंदगी भर के लिए प्रभावित हो जाता है। अगर आप कभी बेहोश हुए हो, तो ये हृदय रोग की एक चेतावनी हो सकती है।
इसे मेडिकल शब्दावली में 'सिंकोप' कहा जाता है। अस्थायी रूप से बेहोश होना सिंकोप की शुरुआत है, जिसका मुख्य कारण मस्तिष्क में खून का अपर्याप्त प्रवाह है। यह एरिथिमिया का संकेत भी हो सकता है, जो दिल की धड़कनों के असामान्य होने के कारण होता है। इससे दिल का दौरा पड़ने का खतरा होता है।
भारत में बेहोशी हर वर्ग के लोगों को होती है। हालांकि, युवाओं में अधिकतर इसके लक्षण पाए गए हैं। बिना किसी संकेत के होने वाली बेहोशी घातक हो सकती है। बेहोशी या सिंकोप हृदय को जब किसी तरह का नुकसान पहुंचाता है, तो हृदय के खून को बेहतर तरीके से पंप करने की क्षमता को प्रभावित करता है। बेहोश होना किसी व्यक्ति के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं। बेहोशी का मुख्य कारण हृदय से जुड़ा है इसलिए कार्डियक इलेक्ट्रोफिजियोलॉजिस्ट (बेहोशी का इलाज करने वाला विशेषज्ञ) से जरूर संपर्क करें।
ऐसे करें उपचार
-घबराहट, सिर चकराने, बहुत कमजोरी महसूस होने, थकान होने या सांस लेने में परेशानी होने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
-अगर आपको बेहोशी जैसा महसूस हो, तो दिमाग का ब्लड सर्कुलेशन बेहतर करने के लिए लेट जाएं।
-बेहोशी का रिकॉर्ड जरूर रखें। भले ही एक बार बेहोशी हो इसके नुकसान से बचने के लिए विशेषज्ञ को संपर्क करें।
-बेहोशी को नजरअंदाज न करें, ये जानलेवा हो सकती है।