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सावधान! शौक से खाते हैं जंक फूड तो आज ही करें बंद, डिप्रेशन होने की रहती है आशंका 

Sun, 21 Apr 2019 09:11 AM IST
पंखुड़ी सिंह लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला Published by: पंखुड़ी सिंह Updated Sun, 21 Apr 2019 09:11 AM IST
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eating junk food increase risk of depression says study

कई बीमारियों का संबंध सीधा हमारे खानपान से होता है। आज की व्यस्त लाइफस्टाइल में अक्सर लोग खाने का ध्यान नहीं रखते। बाहर का खाना अधिकतर लोगों के जीवन का हिस्सा बनता जा रहा है और आए जंक फूड का हमारी डाइट में शामिल होना अच्छे संकेत नहीं हैं। जंक फूड खाने से डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, हृदय संबंधी बीमारी, मोटापा और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां तो होती ही हैं। साथ ही, जंक फूड के सेवन से अवसाद यानी डिप्रेशन जैसी बीमारी भी आपको घेर सकती है। 

eating junk food increase risk of depression says study
फास्ट फूड, केक और प्रोसेस्ड मीट के ज्यादा सेवन से अवसाद यानी डिप्रेशन का खतरा तेजी से बढ़ सकता है। एक अध्ययन में यह बात सामने आई है। ब्रिटेन की मैनचेस्टर मेट्रोपॉलिटन यूनिवर्सिटी के अनुंधानकर्ताओं ने पाया है कि जलन पैदा करने वाले आहार जिनमें कोलेस्ट्रॉल, वसा और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा ज्यादा होती है, उनके सेवन से अवसाद का खतरा 40 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। 
eating junk food increase risk of depression says study
1.5 गुना ज्यादा रहता है खतरा 
एक टीम ने अवसाद और जलन पैदा करने वाले आहारों के बीच संबंध पर आधारित 11 अध्ययनों के आंकड़ों का विश्लेषण किया है। यह विश्लेषण अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, यूरोप और मध्य पूर्व में फैले 16 से अधिक उम्र के 1 लाख लोगों पर किया गया है। सभी अध्ययनों के दौरान प्रतिभागियों में अवसाद और अवसाद के लक्षण पाए गए हैं। सभी अध्ययनों में जलन पैदा करने वाला आहार लेने वालों में अवसाद और इसके लक्षण का खतरा करीब डेढ़ गुना ज्यादा पाया गया। 
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आहार में बदलाव करना जरूरी 
पत्रिका क्लिनिकल न्यूट्रिशन में छपे अध्ययन के नतीजों में साफ है कि सभी आयु वर्ग और लिंग के लोगों के बीच अवसाद का खतरा है। मैनचेस्टर मेट्रोपोलिटन यूनिवर्सिटी के स्टीव ब्रेडबर्न ने कहा कि इस अध्ययन से अवसाद और अन्य रोगों जैसे अल्जाइमर के उपचार में मदद मिल सकती है। उन्होंने कहा, "उपचार की जगह अपने आहार में बदलाव करके इस खतरे से बचा जा सकता है। 
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