Covishield Vaccine: अब सीरम इंस्टीट्यूट पर मुकदमे तैयारी, परिजनों का दावा- टीका लेने के बाद बेटी की हो गई मौत
कंपनी द्वारा वैक्सीन के कारण होने वाले दुष्प्रभावों को स्वीकार करने के कुछ ही दिनों बाद भारत में भी एक परिवार सीरम इंस्टीट्यूट के खिलाफ कोर्ट जाने की तैयारी कर रहा है। कथित तौर पर जुलाई 2021 में वैक्सीन लेने के बाद करुण्या नाम की एक महिला की मौत हो गई थी।
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ब्रिटेन की अदालत में वैक्सीन निर्माता कंपनी एस्ट्राजेनेका ने हाल ही में स्वीकार किया है कि उसकी वैक्सीन दुर्लभ स्थितियों में थ्रोम्बोसिस विद थ्रोम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम (टीटीएस) नामक समस्या का कारण बन सकती है। टीटीएस रक्त का थक्का बनाने वाली समस्या है जिसके कारण हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक होने का खतरा बढ़ जाता है। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि वैक्सीन के कारण होने वाले इस तरह के दुष्प्रभाव काफी दुर्लभ हैं, 10 लाख में से एक-दो व्यक्तियों में इसका खतरा हो सकता है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी द्वारा वैक्सीन के कारण होने वाले दुष्प्रभावों को स्वीकार करने के कुछ ही दिनों बाद भारत में भी एक परिवार सीरम इंस्टीट्यूट के खिलाफ कोर्ट जाने की तैयारी कर रहा है। कथित तौर पर जुलाई 2021 में वैक्सीन लेने के बाद करुण्या नाम की एक महिला की मौत हो गई थी। परिजनों का कहना है कि मौत वैक्सीन लेने के कारण हुई है, जिसको लेकर उन्होंने सीरम इंस्टीट्यूट के खिलाफ अदालत जाने का फैसला किया है।
कोविशील्ड वैक्सीन के दुष्प्रभावों की सामने आई रिपोर्ट
गौरतलब है कि सीरम इंस्टीट्यूट देश में कोविशील्ड वैक्सीन की निर्माता है। पीड़िता के पिता वेणुगोपालन गोविंदन अब मुआवजे और अपनी बेटी की मौत की जांच के लिए एक स्वतंत्र मेडिकल बोर्ड की नियुक्ति की मांग करते हुए कोर्ट जा रहे हैं। गोविंदन ने कहा, ब्रिटिश-स्वीडिश फर्म एस्ट्राजेनेका की स्वीकारोक्ति बहुत देर से और तब आई है जब इतने सारे लोगों की जान चली गई। मेरी बेटी की मौत के लिए भी वैक्सीन ही जिम्मेदार है।
विशेषज्ञ बोले- टीके से डरें नहीं
एस्ट्राजेनेका द्वारा दुष्प्रभावों की बात स्वीकार करने के बाद से लोगों में वैक्सीन को लेकर डर देखा जा रहा है। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि वैक्सीन के साइड-इफेक्ट्स काफी दुर्लभ हैं। टीके के दुष्प्रभाव इसे प्राप्त करने के कुछ ही दिनों में देखे जाते हैं। देश के अधिकतर लोगों को वैक्सीन ले चुके दो साल से अधिक का समय बीत चुका है, दवाओं-टीकों के दुष्प्रभाव तुरंत ही होता है, इतना समय बीत जाने के बाद लोगों को डरने की जरूरत नहीं है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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