Cough Syrup: क्या है डायथिलीन ग्लाइकॉल जो साबित हुई जानलेवा, अब बच्चों को सर्दी-जुकाम हो तो क्या करें?
- पहले भी कई देशों में भारत से निर्यात की गई कफ सिरप में डाइएथिलीन ग्लाइकॉल की मात्रा अधिक पाई गई थी, जिसके कारण उजबेकिस्तान सहित कई अन्य देशों में भी बच्चों की मौत हुई थी।
विस्तार
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा और राजस्थान में कफ सिरप पीने से हुई बच्चों की मौतें इन दिनों सुर्खियों में हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दवा के सेवन के कारण बच्चों की किडनी फेल हो गई, जिससे उनकी मौत हुई । इन मामलों के बाद सरकार सख्त हो गई है। शुक्रवार को इस संबंध में स्वास्थ्य सेवा महानिदेशाल (डीजीएचएस) ने बच्चों के इलाज के लिए कफ सिरप के तर्कसंगत उपयोग पर सलाह जारी की। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने दो साल से कम उम्र के बच्चों को खांसी और सर्दी की दवाएं न देने की सलाह भी दी है।
बच्चों की मौत के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने दूषित कफ सिरप की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह सिरप कांचीपुरम की एक फैक्ट्री में बनाया गया था। घटना के बाद, राज्य सरकार ने तमिलनाडु सरकार से मामले की जांच करने का अनुरोध किया।
मध्य प्रदेश के औषधि नियंत्रक डीके मौर्य ने बताया कि इस सिरप में डायथिलीन ग्लाइकॉल (डीईजी) की मात्रा 48% से ज्यादा पाई गई, जबकि स्वीकार्य सीमा केवल 0.1% है। यह मात्रा बेहद खतरनाक है।
दो साल से कम उम्र के बच्चों को न दें कोई कफ सिरप
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सलाह दी है कि दो साल से कम उम्र के बच्चों को खांसी और जुकाम की दवाएं न दी जाएं। मंत्रालय ने एक सलाह में ये भी कहा है कि आमतौर पर पांच साल से कम उम्र के बच्चों के लिए भी इन दवाओं की सलाह नहीं दी जाती है। पांच साल से अधिक उम्र के बच्चों के लिए इनका इस्तेमाल सावधानीपूर्वक, नैदानिक मूल्यांकन और कड़ी निगरानी के बाद ही किया जाना चाहिए। मंत्रालय ने इस संबंध में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य सेवा निदेशकों को पत्र लिखा है।
अब लोगों के मन में दो सवाल हैं।
पहला- डायथिलीन ग्लाइकॉल क्या है जिसको इतना खतरनाक पाया गया है।
दूसरा कि अब छोटे बच्चों को सर्दी-खांसी होने पर क्या दिया जाना चाहिए, माता-पिता को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
डाइएथिलीन ग्लाइकॉल के बारे में जानिए
मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि डायथिलीन ग्लाइकॉल (डीईजी) और एथिलीन ग्लाइकॉल (ईजी) औद्योगिक रसायन हैं जिनका उपयोग आमतौर पर ब्रेक द्रव, एंटीफ्रीज, पेंट, प्लास्टिक और कुछ घरेलू सामान बनाने में किया जाता है। ये सस्ते और रंगहीन तरल पदार्थ होते हैं, अवैध रूप से दवाओं में प्रोपिलीन ग्लाइकॉल के विकल्प के रूप में उपयोग किया जाता है।
प्रोपिलीन ग्लाइकॉल एक प्रकार का विलायक है जो दवाओं को तरल रूप में घोलने में मदद करता है। हालांकि समस्या यह है कि जहां प्रोपिलीन ग्लाइकॉल नियंत्रित मात्रा में सुरक्षित है, वहीं डीईजी और ईजी को इंसानों के लिए खतरनाक माना जाता रहा है।
कई रिपोर्ट्स में कम मात्रा में भी इसके सेवन करने पर ये रसायन गंभीर विषाक्तता पैदा कर सकते हैं। कुछ स्थितियों में डीईजी की स्वीकार्य सीमा केवल 0.1% है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
अमर उजाला से बातचीत में दिल्ली स्थित एक अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सरिता शर्मा कहती हैं, बच्चों के कफ सिरप में डीईजी और ईजी जैसे कंपाउंड्स होने ही नहीं चाहिए। पहले भी कई देशों में भारत से निर्यात की गई कफ सिरप में डायथिलीन ग्लाइकॉल की मात्रा अधिक पाई गई थी, जिसके कारण उजबेकिस्तान सहित कई अन्य देशों में भी बच्चों की मौत हुई थी।
वहीं इंटरनल मेडिसिन के डॉक्टर श्रेय श्रीवास्तव कहते हैं, नई गाइडलाइंस के हिसाब से अब ज्यादातर डॉक्टर्स बच्चों को कफ सिरप प्रिस्क्राइब ही नहीं करते हैं। डीईजी का सबसे खतरनाक साइड इफेक्ट है कि इसके कारण एक्यूट ट्यूबलर इंजरी का खतरा हो सकता है, जिसमें गुर्दे की नलिकाओं को नुकसान पहुंचता है।
आमतौर पर कुछ कफ सिरप को 6 माह से कम उम्र के बच्चों को दिया ही नहीं जाना चाहिए। बड़े लोगों को भी कफ सिरप प्रिस्क्राइब करते समय भी डॉक्टर्स कोमारबिडिटी सहित कई स्थितियां का ध्यान रखते हैं।
बच्चों को सर्दी-खांसी होने पर क्या करें?
डॉ सरिता कहती हैं, बच्चों को सर्दी-खांसी होने पर कई बार माता-पिता खुद से ही बच्चों को दवाएं दे देते हैं, जोकि सबसे गंभीर स्थिति है। बच्चों में खांसी-जुकाम होना बहुत कॉमन है, डॉक्टर बच्चे की उम्र, सेहत, वजन और शरीर की अन्य स्थितियों को ध्यान में रखते हुए लक्षणों को कम करने वाली कुछ दवाएं दे सकते हैं। उसमें भी डोज और कितनी बार इन दवाओं की जरूरत है इसका खास ध्यान रखा जाता है।
डॉक्टर कहते हैं, अगर आपके बच्चे को सर्दी-खांसी की समस्या हो रही है और कुछ सामान्य उपायों से इसमें लाभ नहीं मिल रहा है तो खुद से या घर में पहले के बच्चों पर इस्तेमाल की गई कोई दवा न लें। हमेशा डॉक्टर्स की सलाह लें। सेल्फ मेडिकेशन सेहत के लिए बहुत गंभीर परिणामों वाला हो सकता है। घरेलू उपाय जैसे भाप, शहद आदि कुछ स्थितियों में लाभ दे सकते हैं पर सभी बच्चों को इससे राहत मिले ये भी आवश्यक नहीं है। इसलिए बिना डॉक्टरी सलाह के कोई भी दवा बच्चों को दी ही नहीं जानी चाहिए।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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