पिछले साल चीन के वुहान से शुरू हुआ कोरोना वायरस कोविड-19 अब तक दुनिया के 188 देशों में फैल चुका है। इस बीमारी के चपेट में अब तक करीब एक करोड़ लोग आ चुके हैं, जबकि करीब पांच लाख लोगों की मौत हो चुकी है, लेकिन अब तक इस महामारी की रोकथाम के लिए कोई वैक्सीन नहीं बन पाई है।
कोरोना की वैक्सीन सबसे पहले किनको मिलेगी?
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कोरोना वायरस की वैक्सीन इतनी अहम क्यों है?
- आशंका यह है कि दुनिया की आबादी का एक बड़ा हिस्सा कोरोना वायरस की चपेट में आ सकता है। ऐसे में वैक्सीन इन लोगों को कोरोना वायरस की चपेट में आने से बचा सकती है। कोरोना वायरस की वैक्सीन बन जाने से महामारी एक झटके में खत्म तो नहीं होगी, लेकिन तब लॉकडाउन का हटाया जाना खतरनाक नहीं होगा और सोशल डिस्टेंसिंग के प्रावधानों में ढिलाई मिलेगी।
- वैक्सीन बनाने को लेकर अब तक कितनी प्रगति हुई है?
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार कोरोना वायरस के पहले मामले की पुष्टि 31 दिसंबर 2019 को हुई थी। जिस तेजी से वायरस फैला उसे देखते हुए 30 जनवरी 2020 को इसे पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दिया गया, लेकिन शुरुआती वक्त में इस वायरस के बारे में अधिक जानकारी नहीं थी और इस कारण इसका इलाज भी जल्द नहीं मिल पाया।
विश्व स्वास्थ्य संगठन समेत कई देशों में डॉक्टर इससे निपटने के लिए वैक्सीन बनाने में जुटे हैं लेकिन सवाल यही है कि आखिर इसके तैयार होने में कितना वक्त लगेगा?
फिलहाल दुनिया भर में 120 जगहों पर कोरोना की वैक्सीन बनाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। इनमें 13 जगहों पर मामला क्लीनिकल ट्रॉयल तक पहुंचा है। इन तेरह जगहों में पांच चीन, तीन अमरीका और दो ब्रिटेन में हैं। जबकि ऑस्ट्रेलिया, रूस और जर्मनी में एक-एक जगहों पर ट्रॉयल चल रहा है।
ब्रिटेन में कोरोना वैक्सीन का इंसानों पर परीक्षण करने की तैयारी शुरू हो गई है। लंदन के इंपीरियल कॉलेज में 300 लोगों पर यह ट्रॉयल किया जाएगा। इंपीरियल कॉलेज लंदन में होने वाले इस ट्रायल का नेतृत्व प्रोफेसर रॉबिन शटोक कर रहे हैं। कहा गया है कि इस वैक्सीन का जानवरों पर किया ट्रॉयल सफल रहा है और यह इससे इम्यूनिटी को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
कोविड-19 को लेकर पहले ह्यूमन ट्रायल में आठ मरीजों के शरीर में एंटीबॉडीज का इस्तेमाल किया गया। ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी में भी 800 लोगों पर ट्रायल शुरु किया जा रहा है। इसके अलावा अस्ट्राजेनेका कंपनी से भी 10 करोड़ वैक्सीन डोज की डील भी की गई है।
इसके अलावा शीर्ष दवा कंपनियां सनफई और जीएसके ने भी वैक्सीन विकसित करने के लिए आपस में तालमेल किया है। ऑस्ट्रेलिया में भी दो संभावित वैक्सीन का नेवलों पर प्रयोग शुरू हुआ है। माना जा रहा है कि इसका इंसानों पर ट्रायल अगले साल तक शुरू हो पाएगा।
लेकिन कोई यह नहीं जानता है कि इनमें से कौन सी कोशिश कारगर होगी।