ब्रिटेन में कोरोना टेस्ट के नतीजे अब सिर्फ 90 मिनट में आ सकेंगे। अगले सप्ताह से ब्रिटेन में कोरोना वायरस और फ्लू के लिए एक नए तरह का टेस्ट किया जाएगा। सबसे पहले केयर होम और लैब में इसका इस्तेमाल होगा। सरकार के अनुसार, स्पॉट पर ही स्वैब और डीएनए टेस्ट किया जाएगा, जिससे कोविड-19 और दूसरे मौसमी बीमारियों में फर्क करने में मदद होगी। ब्रिटेन के स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि इससे आने वाले जाडे़ के मौसम में काफी फायदा होगा।
Coronavirus test: अब सिर्फ 90 मिनट में पता चल जाएगा आपको कोरोना है या नहीं, यहां होगा नए तरह का टेस्ट
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इस नए रैपिड स्वैब टेस्ट को लैमपोर कहा जाता है और अगले हफ्ते से केयर होम और लैब में करीब पांच लाख टेस्ट किए जा सकेंगे और साल के आखिर तक ऐसे लाखों और टेस्ट किए जाएंगे। इसके अलावा सितंबर से ब्रिटेन के सभी एनएचएस अस्पतालों में हजारों डीएनए टेस्ट मशीन लगाई जाएंगी, जिनसे नाक का स्वैब सैंपल लिया जा सकेगा। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, पांच हजार मशीनों से 58 लाख टेस्ट किए जा सकेंगे।
टेस्ट कितना सटीक?
ये नया टेस्ट कितना सटीक और प्रमाणिक है इस बारे में अभी तक कोई सार्वजनिक डेटा मौजूद नहीं है, लेकिन ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में मेडिसिन के प्रोफेसर सर जॉन बेल, जो कि कोरोना टेस्ट के मामले में सरकार के सलाहकार हैं, का कहना है कि अभी जो लैब आधारित टेस्ट किए जा रहे हैं, लैमपोर टेस्ट भी उतना ही संवेदनशील है।
स्वास्थ्य मंत्री मैट हैनकॉक ने इस नए कोरोना टेस्ट को जान बचाने वाला करार दिया है। उनका कहना था, 'लाखों ऑन द स्पॉट टेस्ट के नतीजे हमें 90 मिनट के अंदर मिल जाएंगे, जिससे हमें कोरोना संक्रमण की चेन को तोड़ने में मदद मिलेगी।'
व्यापार मंत्री नदीम जहावी ने कहा कि स्कूल समेत दूसरी जगहों पर भी ये टेस्ट किए जाएंगे, क्योंकि इसमें मेडिकल विशेषज्ञ की जरूरत नहीं पड़ती है। यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ लंदन में संक्रमण रोग के विशेषज्ञ प्रोफेसर डेम एन जॉनसनक कहती हैं कि रैपिड टेस्ट बहुत उपयोगी है, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण है कि लोग अगर बीमार पड़ें तो सेल्फ आइसोलेशन में रहें।
फिलहाल कोरोना वायरस का टेस्ट आमलोगों के लिए सड़कों पर वॉक-इन किया जाता है और अस्पतालों में मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों का टेस्ट होता है। होम टेस्टिंग किट भी आते हैं जिन्हें घर भेजा जाता है कि ताकि लोग खुद अपना टेस्ट कर सकें। स्वैब सैंपल की जांच लैब में होती है और लोगों को उसका रिजल्ट बताया जाता है। अगर टेस्ट में कोरोना पॉजिटिव आता है तो फिर मरीज को 10 दिनों के लिए सेल्फ आइसोलेशन में रहना होता है।