फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

Coronavirus: लोगों के दोबारा कोरोना संक्रमित होने की बात सच है या झूठ? जानें इसके बारे में सबकुछ

Sun, 13 Sep 2020 10:17 AM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सोनू शर्मा Updated Sun, 13 Sep 2020 10:17 AM IST
विज्ञापन
coronavirus study Pune National Institute Of Virology Reinfection research coronavirus mutation coronavirus vaccine
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

कोरोना वायरस के संबंध में कुछ दिन पहले तक यही माना जा रहा था कि अगर किसी को एक बार संक्रमण हो गया तो उसके शरीर में एंटीबॉडी बन जाती है, जो उसे दोबारा संक्रमित होने से बचा सकती है। लेकिन हाल के दिनों में जिस तरह से लोगों के दोबारा संक्रमित होने के दावे किए जा रहे हैं, उससे तो वैक्सीन बना रहे वैज्ञानिकों की भी नींदें उड़ गई हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक महाराष्ट्र, दिल्ली, गुजरात, पंजाब और तेलंगाना में दोबारा संक्रमण के मामले आने की बात की जा रही है, लेकिन इसमें कितनी सच्चाई है और अगर दोबारा संक्रमण हो रहा है तो वह कैसे हो रहा है, इसकी जांच के लिए सरकार ने एक मरीज के दोनों सैंपल (पहले संक्रमण और दूसरे संक्रमण का) को पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी को भेजा है। 

coronavirus study Pune National Institute Of Virology Reinfection research coronavirus mutation coronavirus vaccine
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

क्या करेगा नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी? 

रिपोर्ट्स के मुताबिक, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी मरीज के दोनों सैंपलों की जेनेटिक सीक्वेंसिंग (आनुवंशिक अनुक्रमण) करेगा। इसी के नतीजों के आधार पर दोबारा संक्रमण के बारे में सबकुछ पता चल सकेगा। दरअसल, जेनेटिक सीक्वेंसिंग के जरिए किसी भी जिंदा व्यक्ति की जीन संरचना को देखा जाता है। 

coronavirus study Pune National Institute Of Virology Reinfection research coronavirus mutation coronavirus vaccine
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : पीटीआई

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी की जांच में इस बात का पता चल जाएगा कि मरीज के दोनों सैंपल में कोरोना वायरस की मौजूदगी है या नहीं। अगर किसी एक सैंपल में भी वायरस की मौजूदगी नहीं दिखी तो यह साफ हो जाएगा कि कोरोना का टेस्ट करने में ही कोई गलती हुई होगी, जिससे उस व्यक्ति की रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई। 

विज्ञापन
विज्ञापन
coronavirus study Pune National Institute Of Virology Reinfection research coronavirus mutation coronavirus vaccine
- फोटो : PTI

अगर दोनों सैंपल में वायरस मिला तो क्या? 

संक्रमित मरीज के दोनों सैंपल में अगर वायरस की मौजूदगी दिखी तो उसकी भी जांच की जाएगी कि क्या वायरस की संरचना में कोई बदलाव हुआ है और अगर बदलाव दिखा तो यह साबित हो जाएगा कि देश में कोरोना वायरस के एक से ज्यादा रूप हैं यानी वो म्यूटेट हो रहा है। हालांकि अब तक स्वास्थ्य मंत्रालय का यही मानना है कि देश में कोरोना वायरस का एक ही रूप है, भारत में उसका म्यूटेशन नहीं हो रहा है। 

विज्ञापन
coronavirus study Pune National Institute Of Virology Reinfection research coronavirus mutation coronavirus vaccine
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

क्या मौजूदा वैक्सीन कोरोना के म्यूटेशन पर करेगी काम? 

मध्य प्रदेश में भोपाल स्थित एम्स में कोरोना वायरस के म्यूटेशन को लेकर एक शोध चल रहा है। शोध के मुताबिक, यह वायरस लगातार म्यूटेट हो रहा है यानी अपना रूप बदल रहा है, जिसकी वजह से वैक्सीन बनाने में दिक्कतें आ रही हैं।  शोधकर्ताओं का कहना है कि दुनियाभर में बनाई जा रही वैक्सीन शायद ही कोरोना वायरस पर काम कर पाए, क्योंकि यह तेजी से अपना रूप बदल रहा है। 

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें  लाइफ़ स्टाइल से संबंधित समाचार (Lifestyle News in Hindi), लाइफ़स्टाइल जगत (Lifestyle section) की अन्य खबरें जैसे हेल्थ एंड फिटनेस न्यूज़ (Health  and fitness news), लाइव फैशन न्यूज़, (live fashion news) लेटेस्ट फूड न्यूज़ इन हिंदी, (latest food news) रिलेशनशिप न्यूज़ (relationship news in Hindi) और यात्रा (travel news in Hindi)  आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़ (Hindi News)।  

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed