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Coronavirus: क्या ठीक हुए कोरोना मरीजों के फेफड़े हो जाते हैं खराब? रिपोर्ट में हुआ चौंकाने वाला खुलासा
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सोनू शर्मा
Updated Thu, 06 Aug 2020 04:54 PM IST
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पूरी दुनिया में फैल चुके कोरोना वायरस ने अब तक सात लाख से ज्यादा लोगों की जान ले ली है जबकि एक करोड़ 87 लाख के करीब लोग इससे संक्रमित हो चुके हैं। हालांकि खुशी की बात ये है कि लाखों लोग इस बीमारी से ठीक भी हो चुके हैं। इस वायरस का सबसे पहले पता पिछले साल के अंत में चीन के वुहान शहर में लगा था और तब से ही यह माना जा रहा है कि यह वहां के मांस बाजार से फैला, जहां खाने के लिए जंगली जानवरों की बिक्री होती है। अब उसी वुहान से कोरोना वायरस को लेकर एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आ रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, वुहान में कोरोना से संक्रमित होकर ठीक होने वाले जितने भी मरीज हैं, उनमें से ज्यादातर लोगों के फेफड़ों की हालत बहुत बुरी है। सिर्फ यही नहीं, ठीक हो चुके मरीजों में से पांच फीसदी को तो दोबारा संक्रमण हो गया और वो अस्पताल में भर्ती हैं। वुहान यूनिवर्सिटी के डॉक्टरों द्वारा किए गए एक सर्वे से इस बात का खुलासा हुआ।
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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वुहान यूनिवर्सिटी की झॉन्गनैन अस्पताल में हॉस्पिटल्स इंटेंटिव केयर यूनिट्स के निदेशक पेंग झियोंग के नेतृत्व में एक टीम ठीक हो चुके 100 मरीजों पर अप्रैल से ही नजर रख रही थी। हमेशा उनके सेहत की जांच होती थी और टीम के सदस्य उन मरीजों के घर जाकर भी उनका हालचाल लेते थे।
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मास्क लगाए एक बुजुर्ग (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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सर्वे के मुताबिक, मरीजों की औसत उम्र 59 साल है। यह सर्वे एक साल तक चलने वाला है, जिसका पहला चरण पिछले महीने की खत्म हुआ है। इस चरण के परिणामों के मुताबिक, ठीक हो चुके मरीजों में 90 फीसदी के फेफड़े लगभग खराब हो चुके हैं। उनके फेफड़ों का वेंटिलेशन और गैस एक्सचेंज फंक्शन काम नहीं कर रहा है यानी ये लोग कोरोना से अब तक पूरी तरह ठीक नहीं हो पाए हैं।
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रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ मरीजों को ठीक हुए तीन महीने हो चुके हैं, लेकिन अब भी उन्हें ऑक्सीजन सिलेंडर के सहारे ही रहना पड़ रहा है। सिर्फ यही नहीं, 100 में से 10 मरीजों के तो शरीर से एंटीबॉडी ही खत्म हो चुकी हैं, जो कोरोना के खिलाफ लड़ने में सक्षम हैं।
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सर्वे कर रही टीम ने ठीक हुए मरीजों के साथ एक छह मिनट का वॉक टेस्ट भी किया। इस दौरान उन्होंने पाया कि मरीज सिर्फ 400 मीटर ही चल पा रहे हैं, वो भी बड़ी मुश्किल से जबकि एक स्वस्थ इतने समय में 500 मीटर तक चल लेता है। सर्वे के नतीजों के मुताबिक, पांच फीसदी मरीज कोरोना न्यूक्लिक एसिड टेस्ट में निगेटिव हैं जबकि इम्यूनोग्लोब्यूलिन एम टेस्ट में पॉजिटिव हैं। इसका मतलब ये है कि उन्हें फिर से क्वारंटीन होना पड़ेगा।
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