कोरोना वायरस ने दुनियाभर के लोगों को तबाह कर रखा है। इस वायरस की चपेट में अब तक तीन करोड़ 75 लाख से अधिक लोग आ चुके हैं जबकि 10 लाख 78 हजार से अधिक लोग मारे भी जा चुके हैं। हालांकि दो करोड़ 81 लाख से अधिक लोग इस वायरस के संक्रमण से ठीक भी हो चुके हैं, लेकिन ऐसा नहीं है कि जो लोग ठीक हो गए, वह पूरी तरह से ठीक हैं, बल्कि कई लोग ऐसे भी हैं, जिनमें कोरोना से ठीक होने के बाद भी कई तरह की परेशानियां आ रही हैं। आइए जानते हैं इस वायरस से जुड़े ऐसे ही जरूरी सवालों के जवाब, जिनके बारे में जानना आपके लिए बेहद ही जरूरी है।
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Coronavirus: क्या कोरोना मरीजों में डिप्रेशन का असर भी हो रहा है? जानिए वायरस से जुड़े ऐसे ही जरूरी सवालों के जवाब
Sun, 11 Oct 2020 10:10 PM IST
सोनू शर्मा
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सोनू शर्मा
Updated Sun, 11 Oct 2020 10:10 PM IST
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अगर यूनीफॉर्म पहन कर काम पर जाते हैं, तो क्या रोज धोना जरूरी है?
- दिल्ली स्थित एम्स अस्पताल के डॉ. नंद कुमार के मुताबिक, 'अगर आप काम पर बाहर जा रहे हैं तो जाहिर है कहीं न कहीं किसी से संपर्क में आए होंगे। घर आने पर दूसरे लोग संक्रमित नहीं हो, इसलिए यूनीफॉर्म को धोना बेहतर होगा। सर्दियों में लोगों को इस तरह की परेशानी आ सकती है। इसके लिए सरकार जरूर कोई नियम बनाएगी और कपड़ों को डिसइंफेक्टेंट से साफ करने का तरीका बता सकती है।'
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कोरोना काल में मानसिक स्वास्थ्य को कैसे देखते हैं?
- डॉ. नंद कुमार कहते हैं, 'पूरे शरीर का स्वास्थ्य हमारे मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है, क्योंकि शरीर से अगर दुबले-पतले भी हों तो भी अगर मानसिक रूप से स्वस्थ हैं तो आप खुश रह सकते हैं और जिंदगी आराम से गुजार सकते हैं। मानसिक स्वास्थ्य की बात केवल अब नहीं हो रही है बल्कि काफी पहले से इस ओर ध्यान दिया जाता रहा है। कोरोना काल में लोगों के अंदर एक अलग तरह की मानसिक परेशानी आ रही है। वायरस के भय में लोग जी रहे हैं। वायरस से डरना नहीं है बल्कि इसके प्रति सतर्क रहना है।'
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आइवरमेक्टिन क्या है, क्या इसे कोई भी ले सकता है?
- डॉ. नंद कुमार बताते हैं, 'आइवरमेक्टिन एक एंटीवायरल ड्रग है, अक्सर यह सर्दी-खांसी में दी जाती है, लेकिन बिना डॉक्टर की सलाह के इसका उपयोग कतई न करें। खुद से लेने पर यह शरीर के लिए हानिकारक भी हो सकती है। सिर्फ यही नहीं बल्कि कोई भी दवा अपने-आप से मत लें।'
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क्या कोविड मरीजों में डिप्रेशन का असर भी हो रहा है?
- डॉ. नंद कुमार के मुताबिक, 'कोरोना मरीजों पर हुए शोध में पाया गया है कि 21 प्रतिशत लोगों में डिप्रेशन होता है। इनमें सामान्य लोगों की तुलना में अधिक डिप्रेशन पाया गया है। संक्रामक बीमारियों में लोगों का मन चिड़चिड़ा हो जाता है। किसी से बात करने का मन नहीं करता है, लोग चुपचाप रहते हैं और थकावट लगती है। ये लक्षण डिप्रेशन से मिलते-जुलते हैं। दरअसल, कोरोना वायरस शरीर के साथ-साथ मस्तिष्क पर भी असर करता है, इसलिए कई बार लोगों में डिप्रेशन पाया गया है।'