क्या प्रकृति की ओर से एक चेतावनी है कोरोना वायरस? चर्चा में संयुक्त राष्ट्र के पर्यावरण प्रमुख का बयान
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कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को लेकर संयुक्त राष्ट्र के पर्यावरण प्रमुख इंगर एंडरसन का बयान इन दिनों चर्चा में है। उन्होंने कहा है कि प्रकृति दुनिया में चल रहे जलवायु संकट और कोरोना वायरस महामारी के साथ स्पष्ट संदेश भेज रही है। उन्होंने कहा कि मानव ने अपने कृत्यों से प्रकृति पर बहुत अधिक दबाव डाला है, जिसके हानिकारक परिणाम सामने हैं। पृथ्वी की रक्षा करने में विफल होने का मतलब है कि मानव खुद की देखभाल नहीं कर पा रहा है।
द गार्जियन से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि अब सभी के लिए तत्काल प्राथमिकता लोगों को कोरोना वायरस से बचाना और इसके बढ़ते संक्रमण को रोकना है। उन्होंने कहा कि धरती पर रहने और जैव विविधता के नुकसान से बचने के लिए हमें दीर्घकालिक उपाय सोचने होंगे।
उन्होंने कहा कि इससे पहले कभी भी जंगली और घरेलू जानवर बैक्टीरिया या वायरस जैसे रोगजनकों का माध्यम नहीं बनते थे। ऐसी संक्रामक बीमारियों का लगभग 75 फीसदी इन जीवों से ही आता है। कहा कि जंगली स्थानों के निरंतर कटाव ने हमें पेड़-पौधों और जानवरों के करीब आने से असहज रूप से परेशान कर दिया है, जो बीमारियों का शिकार हो सकते हैं।
संयुक्त राष्ट्र के वैज्ञानिकों ने यह भी टिप्पणी जोड़ी कि अन्य पर्यावरणीय प्रभाव, जैसे कि ऑस्ट्रेलियाई जंगलों में आग, गर्मी के टूटते रिकॉर्ड आदि हमें एक तरह से संदेश भेज रहे हैं कि हमें पर्यावरण संरक्षण पर गंभीर होने की जरूरत है।
उनका कहना है कि इन सभी घटनाओं के साथ प्रकृति हमें एक संदेश भेज रही है। हमारे प्राकृतिक प्रणालियों पर एक ही समय में बहुत सारे दबाव हैं। चाहे हम इसे पसंद करते हों या नहीं, लेकिन हम प्रकृति के साथ आंतरिक रूप से जुड़े हुए हैं। यदि हम प्रकृति का ध्यान नहीं रखते हैं, तो इसका मतलब है कि हम अपना ध्यान नहीं रख सकते हैं। हमें अपने सबसे मजबूत सहयोगी के रूप में प्रकृति का संरक्षण करने की जरूरत है।
(पीटीआई इनपुट के साथ)