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कोरोना वायरस से आप संक्रमित हो जाएं तो क्या होगा?

Mon, 04 May 2020 10:02 AM IST
योगेश साहू वर्ल्ड डेस्क, वाशिंगटन।
वर्ल्ड डेस्क, वाशिंगटन। Published by: योगेश साहू Updated Mon, 04 May 2020 10:02 AM IST
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Coronavirus Case News In Hindi : What happens if you catch the new coronavirus
मुंबई के धारावी में बनाए जा रहे पृथकवास केंद्र में काम करता मजदूर। - फोटो : PTI

दुनिया भर में कोविड-19 से संक्रमित लोगों और इससे मौत के मामले बढ़ते जा रहे हैं। हालांकि अब भी बड़ा सवाल यह है कि ये वायरस मानव शरीर को किस तरह प्रभावित करता है। बता दें कि बीते साल के अंत में चीन में उभरा कोरोना वायरस छह महाद्वीपों के 187 देशों तक फैल चुका है। यहां तक विश्व स्वास्थ्य संगठन इसे वैश्विक महामारी घोषित कर चुका है। 


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दुनिया भर में कोविड-19 से संक्रमित लोगों और इससे मौत के मामले बढ़ते जा रहे हैं। हालांकि अब भी बड़ा सवाल यह है कि ये वायरस मानव शरीर को किस तरह प्रभावित करता है। बता दें कि बीते साल के अंत में चीन में उभरा कोरोना वायरस छह महाद्वीपों के 187 देशों तक फैल चुका है। यहां तक विश्व स्वास्थ्य संगठन इसे वैश्विक महामारी घोषित कर चुका है। 

जॉन्स हॉपकिन्स विश्वविद्यालय की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में अब तक कम से कम दो लाख 44 हजार से ज्यादा लोगों की इस वायरस की वजह से मौत हो चुकी है। जबकि 34 लाख से ज्यादा लोग संक्रमित हैं। 

यह वायरस जैसे-जैसे दुनियाभर में फैलता गया है, वैसे-वैसे तमाम चिकित्सा वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं ने इस नए वायरस को समझने के प्रयासों को भी तेज किया है। पता लगाया जा रहा है यह कैसे मानव शरीर को प्रभावित करता है। बता दें कि अभी इस वायरस के इलाज के लिए कोई टीका नहीं बना है।

यहां हम कोरोनो वायरस के बारे में बता रहे हैं जो अत्यधिक संक्रामक श्वसन संबंधी रोग का कारण बनता है। यहां जानिए कोविड-19 से यदि आप संक्रमित हैं तो क्या होता है।

गंभीरता का स्तर भिन्न होना

वायरस परिवार का नया सदस्य है यह कोरोना वायरस। जो मनुष्यों में आम सर्दी-जुकाम से लेकर गंभीर श्वसन रोग (सार्स) और मिडिल ईस्ट श्वसन सिंड्रोम (मर्स) जैसी गंभीर बीमारियों को जन्म दे सकता है। अभी तक यही माना जाता है कि यह वायरस जानवर से मनुष्यों में संचारित हुआ है। नया वायरस मुख्य रूप से श्वसन बूंदों के माध्यम से फैलता है, जैसे कि जब कोई संक्रमित व्यक्ति खांसता है या छींकता है।

किसी व्यक्ति के संक्रमित होने के बाद इसके लक्षण औसतन पांच से छह दिन में दिखने लगते हैं। हालांकि कुछ मामलों में संक्रमित व्यक्ति में लक्षण देर से दिखाई देते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन की स्वास्थ्य आपात कार्यक्रम की प्रमुख डॉक्टर मारिया वान केरखोव के अनुसार यह वायरस श्वसन पथ यानि सांस की नली में फलता-फूलता है और कई तरह के लक्षणों को पैदा कर सकता है।

उन्होंने अपनी सात फरवरी को जिनेवा में अपनी एक रिपोर्ट के हवाले से संवाददाताओं से कहा था कि इस वायरस से जुड़े कुछ हल्के मामले भी हैं, जो आम सर्दी-जुकाम की तरह दिखाई देते हैं। इनमें से कुछ श्वसन संबंधी लक्षण जैसे गले में खराब, नाक बहना, बुखार आना, निमोनिया की तरह होते हैं। निमोनिया गंभीर रूप धारण कर लेने पर कई अंगों के काम करना बंद करने का कारक बनता है, जिससे मौत हो सकती है।

हालांकि अभी तक ज्यादातर मामलों में लक्षण हल्के बने हुए हैं। केरखोव ने कहा कि हमने लगभग 17 हजार मामलों को लेकर एकत्र किए गए आंकड़े देखे हैं। इनमें से 82 फीसदी में लक्षण हल्के हैं, 15 प्रतिशत गंभीर हैं और 3 प्रतिशत मामले अतिगंभीर की श्रेणी में रखे जा सकते हैं।

बुखार, खांसी, निमोनिया के हैं क्या मायने

फरवरी में अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन (जेएएमए) के जर्नल में प्रकाशित वुहान में नए वायरस से संक्रमित 138 रोगियों पर किए गए एक अध्ययन के मुताबिक सबसे आम लक्षण बुखार, थकान और सूखी खांसी दिखाई दिए थे। एक तिहाई रोगियों ने मांसपेशियों में दर्द और सांस लेने में कठिनाई की बात कही थी, जबकि लगभग 10 प्रतिशत में अतिसार के लक्षण थे, जिनमें दस्त और मतली (जी मिचलाना) शामिल थे।

जेएएमए ने कहा कि अध्ययन में शामिल मरीजों की उम्र 22 से 92 के बीच थी, उन्हें वुहान विश्वविद्यालय के झोंगान अस्पताल में एक जनवरी से 28 जनवरी 2020 के दौरान भर्ती कराया गया था। इन मरीजों की आयु का औसत 49 से 56 वर्ष के बीच था। बच्चों में मामले दुर्लभ रहे। अधिकांश मामलों में लक्षण हल्के होने के कारण सभी रोगियों को निमोनिया से ग्रस्त पाया गया।

लगभग एक तिहाई मरीजों में बाद में सांस लेने में गंभीर कठिनाई के लक्षण दिखे, गहन देखभाल इकाई (आईसीयू) में उपचार की आवश्यकता पड़ी। गंभीर रूप से बीमारों में वृद्ध थे और उनमें मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसे समस्याओं से पहले से थीं। 

इस दौरान 138 मरीजों में से छह की मृत्यु हो गई। इस तरह मृत्यु दर 4.3 प्रतिशत की रही, जो चीन के अन्य हिस्सों में हुई मौतों की तुलना में अधिक है। संक्रमित लोगों की कुल संख्या के 2 प्रतिशत से भी कम लोग अब तक वायरस से मर चुके हैं, लेकिन यह आंकड़ा बदल सकता है।

इस बीच, द लांसेट मेडिकल जर्नल में 24 जनवरी को प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया था कि संक्रमित मरीजों में गंभीर रूप से बीमार को "साइटोकिन स्टॉर्म" कहा जाता है। साइटोकिन स्टॉर्म एक गंभीर प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया है जिसमें शरीर प्रतिरक्षा कोशिकाओं और प्रोटीन का उत्पादन करता है जो अन्य अंगों को नष्ट कर सकता है।

कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि इससे युवावस्था वाले मरीजों की कारण हो सकती है, क्योंकि चीन में 30, 40 और 50 आयु वर्ग के मरीजों की मौत के ऐसे कई मामले सामने आए हैं। जबकि इन सभी में पहले से किसी तरह की अन्य कोई बीमारी के लक्षण नहीं थे।

यह बीमारी कैसे बढ़ती है?

जेएएमए के अनुसार, एक सामान्य व्यक्ति में आमतौर पर पांच दिन में सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। वहीं कुछ मरीजों में ऐसा आठ दिन बाद हो सकता है। अध्ययन में यह नहीं बताया गया है कि किस समय या कितने दिन बाद किसी मरीज की मौत हो सकती है। हालांकि जनवरी में प्रकाशित जर्नल मेडिकल वायरोलॉजी में कहा गया था कि कोरोना के मरीज की करीब 14 दिन बाद मृत्यु हो सकती है।

न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन ने 31 जनवरी को प्रकाशित एक अध्ययन में यह भी बताया कि कोरोनोवायरस संक्रमण शरीर को समय के साथ कैसे प्रभावित करता है। अध्ययन में एक 35 वर्षीय व्यक्ति के चिकित्सा संबंधी डेटा की जांच की गई, जो संयुक्त राज्य अमेरिका में संक्रमण का पहला मामला था। उसके अंदर पहला लक्षण सूखी खांसी थी, जिसके बाद बुखार था।

बीमारी के तीसरा दिन मरीज को मतली (जी मिचलाना) और उल्टी की समस्या हुई। इसके बाद छठवें दिन दस्त और पेट की परेशानी हुई। नौवें दिन तक, निमोनिया विकसित हुआ था और सांस लेने में कठिनाई की बात मरीज ने कही। बारहवें दिन मरीज की स्थिति में थोड़ा सुधार हुआ और बुखार कम हो गया था।

हालांकि नाक बहना शुरू हो गई। 14वें दिन मरीज को सिर्फ हल्की खांसी रह गई और कोरोना खत्म हो चुका था। स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, इस मरीज को 19 जनवरी को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जबकि फरवरी के पहले सप्ताह में उसे छुट्टी देकर घर भेज दिया गया।

डब्यूएचओ ने क्या किया

डब्ल्यूएचओ के प्रमुख टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयियस ने 24 फरवरी को संवाददाताओं को बताया था कि चीन के आंकड़े बताते हैं कि हल्के लक्षण वाले लोगों को ठीक होने में करीब दो सप्ताह का समय लगता है। गंभीर या अतिगंभीर लक्षण वाले लोगों को ठीक होने में तीन से छह सप्ताह तक लग सकते हैं।

28 फरवरी को टेड्रोस ने कहा कि सभी देशों को एक संभावित महामारी से लड़ने के लिए खुद को तैयार कर लेना चाहिए, क्योंकि अब तक चीन के बाहर अन्य देशों में संक्रमण के तीन-चौथाई नए मामले सामने आ चुके हैं। उन्होंने 4 मार्च को चेतावनी दी कि दुनियाभर की सरकारों और विभिन्न कंपनियों को सुरक्षात्मक उपकरणों का उत्पादन 40 फीसदी तक बढ़ाना चाहिए, ताकि इनकी कमी या अधिक कीमत की वजह से परेशानी नहीं उठानी पड़े। 

विश्व स्वास्थ्य संगठन प्रमुख ने 11 मार्च को कोविड-19 के एक वैश्विक महामारी होने की घोषणा की। साथ ही इसके प्रसार और गंभीरता के खतरनाक स्तर और निष्क्रियता के खतरनाक स्तर पर चिंता व्यक्त की। 

टेड्रोस ने 13 मार्च को कहा कि चीन के अलावा, दुनिया के बाकी हिस्सों की तुलना में संक्रमण के मामलों की बढ़ती संख्या और मौतों के मद्देनजर यूरोप इस महामारी का केंद्र बन गया था। लेकिन बाद में अमेरिका सबसे अधिक प्रभावित होने वाला देश बन गया।

बता दें कि 29 अप्रैल तक अमेरिका में संक्रमण के 1,030,000 से अधिक मामले सामने आ चुके थे, जबकि 60,000 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी।
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