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सतर्क रहें: मूड को खुश करने वाला फूड...दावों के विपरीत कई सप्लीमेंट बेअसर
Sun, 26 Oct 2025 07:46 AM IST
लव गौर
अमर उजाला नेटवर्क
अमर उजाला नेटवर्क
Published by: लव गौर
Updated Sun, 26 Oct 2025 07:46 AM IST
सार
बाजार में मानसिक तनाव, चिंता और अवसाद से राहत देने वाले सैकड़ों नेचुरल मूड बूस्टर सप्लीमेंट्स बेचे जा रहे हैं लेकिन नेशनल ज्योग्राफिक की ताजा हेल्थ रिपोर्ट के अनुसार इनमें से अधिकांश का कोई वैज्ञानिक रूप से सिद्ध प्रभाव नहीं है।
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दावों के विपरीत कई सप्लीमेंट बेअसर (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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विस्तार
बाजार में मानसिक तनाव, चिंता और अवसाद से राहत देने वाले सैकड़ों नेचुरल मूड बूस्टर सप्लीमेंट्स बेचे जा रहे हैं, लेकिन नेशनल ज्योग्राफिक की ताजा हेल्थ रिपोर्ट के अनुसार इनमें से अधिकांश का कोई वैज्ञानिक रूप से सिद्ध प्रभाव नहीं है। केवल कुछ सीमित सप्लीमेंट्स जैसे ओमेगा-3 फैटी एसिड और प्रोबायोटिक्स ही मस्तिष्क रसायनों पर हल्का असर दिखाते हैं, वह भी शर्तों और सीमाओं के साथ।
रिपोर्ट में बताया गया है कि शोधकर्ताओं ने हाल के वर्षों में लगभग 50 से अधिक प्राकृतिक सप्लीमेंट्स और उपचारों का परीक्षण किया है, जिन्हें मूड सुधारने, चिंता घटाने और अवसाद दूर करने का दावा किया जाता है। इनमें शामिल थे ओमेगा-3 फैटी एसिड (मुख्यतः मछली तेल से प्राप्त),प्रोबायोटिक्स,सेंट जॉन्स वॉर्ट, विटामिन डी और बी-12 तथा कुछ हर्बल अर्क जैसे अश्वगंधा और पासनफ्लॉवर।
अमेरिकी नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ (एनआईएच) और ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में प्रकाशित सहायक अध्ययनों के हवाले से रिपोर्ट कहती है कि इनमें से केवल ओमेगा-3 और प्रोबायोटिक्स को हल्का लाभकारी पाया गया है। इनका प्रभाव सीमित परिस्थितियों में ही देखा गया। जैसे हल्के अवसाद वाले व्यक्तियों में या उन लोगों में जो पहले से आहार असंतुलन का शिकार थे।
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दो समूहों पर किया गया अध्ययन
वैज्ञानिकों ने इन सप्लीमेंट्स की वास्तविकता जानने के लिए क्लिनिकल ट्रायल, डबल-ब्लाइंड टेस्ट और प्लेसिबो-कंट्रोल्ड स्टडीज जैसी कठोर प्रयोगात्मक विधियों का प्रयोग किया। इनमें प्रतिभागियों को दो समूहों में बांटा गया। एक समूह को असली सप्लीमेंट दिए गए, जबकि दूसरे समूह को प्लेसिबो यानी प्रभावहीन दवा दी गई। न तो मरीजों को और न ही डॉक्टरों को पता था कि कौन असली सप्लीमेंट ले रहा है। कुछ हफ्तों तक उनका मूड, नींद, और तनाव का मापन हैमिल्टन डिप्रेशन रेटिंग स्केल और बेक एंग्जाइटी इन्वेंटरी के जरिये किया गया। परिणामों से स्पष्ट हुआ कि अधिकांश सप्लीमेंट्स का असर प्लेसिबो के समान ही रहा।
भारत में तेजी से बढ़ रहा बाजार
भारत में मानसिक स्वास्थ्य सप्लीमेंट्स का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। एसोचैम की 2024 रिपोर्ट के अनुसार इस सेगमेंट का मूल्य लगभग 13,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। ऑनलाइन प्लेटफार्म पर स्ट्रेस रिलीफ, ब्रेन बूस्ट और एंटी-एंग्जायटी लेबल वाले उत्पाद सबसे अधिक बिकते हैं। लेकिन फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (फसाई) ने कई बार चेतावनी दी है कि इन उत्पादों को दवाओं का विकल्प मानना खतरनाक हो सकता है। अधिकांश कंपनियां केवल डाइटरी सप्लीमेंट के रूप में लाइसेंस लेती हैं, जबकि उपभोक्ता उन्हें इलाज समझ बैठते हैं। अश्वगंधा, ब्राह्मी और अन्य हर्बल उत्पाद पारंपरिक और सांस्कृतिक रूप से लोकप्रिय हैं।
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रिपोर्ट में बताया गया है कि शोधकर्ताओं ने हाल के वर्षों में लगभग 50 से अधिक प्राकृतिक सप्लीमेंट्स और उपचारों का परीक्षण किया है, जिन्हें मूड सुधारने, चिंता घटाने और अवसाद दूर करने का दावा किया जाता है। इनमें शामिल थे ओमेगा-3 फैटी एसिड (मुख्यतः मछली तेल से प्राप्त),प्रोबायोटिक्स,सेंट जॉन्स वॉर्ट, विटामिन डी और बी-12 तथा कुछ हर्बल अर्क जैसे अश्वगंधा और पासनफ्लॉवर।
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अमेरिकी नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ (एनआईएच) और ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में प्रकाशित सहायक अध्ययनों के हवाले से रिपोर्ट कहती है कि इनमें से केवल ओमेगा-3 और प्रोबायोटिक्स को हल्का लाभकारी पाया गया है। इनका प्रभाव सीमित परिस्थितियों में ही देखा गया। जैसे हल्के अवसाद वाले व्यक्तियों में या उन लोगों में जो पहले से आहार असंतुलन का शिकार थे।
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दो समूहों पर किया गया अध्ययन
वैज्ञानिकों ने इन सप्लीमेंट्स की वास्तविकता जानने के लिए क्लिनिकल ट्रायल, डबल-ब्लाइंड टेस्ट और प्लेसिबो-कंट्रोल्ड स्टडीज जैसी कठोर प्रयोगात्मक विधियों का प्रयोग किया। इनमें प्रतिभागियों को दो समूहों में बांटा गया। एक समूह को असली सप्लीमेंट दिए गए, जबकि दूसरे समूह को प्लेसिबो यानी प्रभावहीन दवा दी गई। न तो मरीजों को और न ही डॉक्टरों को पता था कि कौन असली सप्लीमेंट ले रहा है। कुछ हफ्तों तक उनका मूड, नींद, और तनाव का मापन हैमिल्टन डिप्रेशन रेटिंग स्केल और बेक एंग्जाइटी इन्वेंटरी के जरिये किया गया। परिणामों से स्पष्ट हुआ कि अधिकांश सप्लीमेंट्स का असर प्लेसिबो के समान ही रहा।
भारत में तेजी से बढ़ रहा बाजार
भारत में मानसिक स्वास्थ्य सप्लीमेंट्स का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। एसोचैम की 2024 रिपोर्ट के अनुसार इस सेगमेंट का मूल्य लगभग 13,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। ऑनलाइन प्लेटफार्म पर स्ट्रेस रिलीफ, ब्रेन बूस्ट और एंटी-एंग्जायटी लेबल वाले उत्पाद सबसे अधिक बिकते हैं। लेकिन फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (फसाई) ने कई बार चेतावनी दी है कि इन उत्पादों को दवाओं का विकल्प मानना खतरनाक हो सकता है। अधिकांश कंपनियां केवल डाइटरी सप्लीमेंट के रूप में लाइसेंस लेती हैं, जबकि उपभोक्ता उन्हें इलाज समझ बैठते हैं। अश्वगंधा, ब्राह्मी और अन्य हर्बल उत्पाद पारंपरिक और सांस्कृतिक रूप से लोकप्रिय हैं।