कामयाबी: वैज्ञानिकों ने बना लिया इन दो वायरस से बचाने वाला च्युइंग गम, 95% तक कम होगा संक्रमण का खतरा
अमेरिका स्थित पेन्सिलवेनिया विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं की टीम ने एक विशेष प्रकार का एंटीवायरल च्युइंग गम विकसित किया है जिसे हर्पीज और फ्लू वायरस के खिलाफ असरदार पाया गया है। इससे वायरल संक्रमण के लोड को 95 फीसदी तक कम किया जा सकता है।
विस्तार
इन्फ्लूएंजा (फ्लू) और हर्पीज वायरस के कारण हर साल लाखों लोग संक्रमण का शिकार होते हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि वैश्विक स्तर पर मौसमी इन्फ्लूएंजा हर साल लगभग एक अरब लोगों को संक्रमित करता है, जिसके कारण करीब 6.50 लाख लोगों की श्वसन संबंधी जटिताओं से मृत्यु हो जाती है।
65 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों में फ्लू के गंभीर रूप लेने और इसके कारण जान-जाने का खतरा अधिक देखा जाता रहा है। इसी तरह हर्पीज संक्रमण के कारण भी हर साल लाखों लोगों को संक्रमित पाया जाता है।
अब इस प्रकार के संक्रमण को लेकर ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं है। अमेरिका स्थित पेन्सिलवेनिया विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं की टीम ने एक विशेष प्रकार का च्युइंग गम विकसित किया है जो हर्पीज और फ्लू वायरस के प्रसार को कम करने में मदद कर सकता है। इस गम के परीक्षण में पाया गया है कि ये च्युइंग गम इन वायरल संक्रमण के लोड को 95 फीसदी तक कम कर सकता है।
इन्फ्लूएंजा और हर्पीज वायरस से मिलेगी सुरक्षा
वैज्ञानिकों की टीम इस खोज को बड़ी सफलता के रूप में देख रही है, जो वायरल संक्रमणों को रोकने के तरीके को नया आकार दे सकती है। आप बस आम च्युइंग गम की तरह इस गम को चबाकर संक्रमण के खतरे को काफी कम कर सकते हैं।
अध्ययन में पाया गया है कि हर्पीज सिम्प्लेक्स वायरस (HSV-1 और HSV-2) और इन्फ्लूएंजा-ए स्ट्रेन (H1N1 और H3N2) दोनों के वायरल लोड को कम करने में इस च्युइंग गम से लाभ पाया जा सकत है। हर साल मौसम बदलने के साथ इन्फ्लूएंजा के मामले काफी तेजी से बढ़ने लगते हैं।
वायरल संक्रमण के खतरे को कम करने के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों का सालाना इन्फ्लूएंजा वैक्सीन लगाने की सलाह देते हैं, हालांकि सीमित टीकाकरण कवरेज के कारण बड़ी संख्या में लोग वैक्सीनेशन से चूक जाते हैं। वहीं हर्पीज संक्रमण से बचने के लिए अभी तक कोई वैक्सीन नहीं है।
(ये भी पढ़िए- च्युइंग गम चबाने से शरीर में बढ़ रहा है माइक्रोप्लास्टिक, कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का हो सकता है खतरा)
कैसे बनाया गया ये गम?
इन्फ्लूएंजा मुख्यरूप से श्वसन संक्रमण है जबकि हर्पीज सिम्प्लेक्स वायरस संक्रमित व्यक्ति के मुंह-त्वचा के संपर्क में आने से फैलता है।
वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए वैज्ञानिकों की टीम ने ऐसा तरीका ढूंढने पर ध्यान दिया जहां से दोनों वायरस सबसे ज्यादा फैलते हैं। इसके लिए वैज्ञानिकों ने लैबलैब बीन्स जिसे लैबलैब पर्पुरियस के नाम से भी जाना जाता है इसका उपयोग करके च्युइंग गम बनाया, जिसमें स्वाभाविक रूप से फ्रिल (FRIL) नामक एक विशेष प्रोटीन होता है। यह प्रोटीन वायरस को बढ़ने से रोकने और उसे बेअसर करने में मदद कर सकता है।
कैसे होगा इसका असर
जब आप इस गम को चबाएंगे तो इससे लगातार एंटीवायरल प्रोटीन रिलीज होता रहेगा, जो वायरस को शरीर में बढ़ने से पहले ही बेअसर कर देगा। प्रयोगशाला में दो ग्राम की एक च्युइंग गम को वायरल संक्रमण के जोखिमों को कम करने में 95% तक कारगर पाया गया है। शोधकर्ताओं का दावा है कि यह मानव उपयोग के लिए बिल्कुल सुरक्षित है।
पेन स्कूल ऑफ डेंटल मेडिसिन के प्रोफेसर हेनरी डैनियल ने कहा, इसके परिणाम आशाजनक हैं। अभी इंसानों पर इसके व्यापक परीक्षण किए जाने हैं जिससे प्रभाविकता का और अच्छी तरह से आकलन किया जा सके।
एवियन इन्फ्लूएंजा या बर्ड फ्लू को रोकने के लिए भी प्रयास
आगे के चरणों में वैज्ञानिकों की टीम समझने की कोशिश कर रही है कि यह गम एवियन इन्फ्लूएंजा या बर्ड फ्लू से लड़ने में कैसे मदद कर सकता है?
प्रोफेसर डैनियल कहते हैं, तमाम प्रकार के वायरस के प्रसार को नियंत्रित करना अभी भी दुनियाभर के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। बीन पाउडर जैसे प्राकृतिक खाद्य उत्पादों का उपयोग करना जो एक स्मार्ट तरीका है।
ये च्युइंग गम कब तक लोगों के लिए उपलब्ध हो सकेगा इसकी जानकारी नहीं दी गई है।
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स्रोत और संदर्भ
Debulking influenza and herpes simplex virus strains by a wide-spectrum anti-viral protein formulated in clinical grade chewing gum
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