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अमर उजाला फाउंडेशन की पहल: विशेषज्ञ से जानिए कोरोनाकाल में तनाव से किस तरह बचें? 

Wed, 19 May 2021 07:58 PM IST
तेजस्वी मेहता लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: तेजस्वी मेहता Updated Wed, 19 May 2021 07:58 PM IST
सार

कोरोना की दूसरी लहर के बाद से ही लोग तनावग्रस्त अधिक हो रहे हैं। नाउम्मीदी और ठीक न हो पाने के विचार कोरोना मरीजों को और भी कमजोर बनाने लगते हैं। जिन लोगों को अबतक कोरोना नहीं हुआ है, उन्हें यह डर सताता है कि कहीं उन्हें ये हो न जाए। ऐसी स्थिति में जानिए अपने मानसिक स्वास्थ्य को किस तरह से संतुलित रखा जाए। 

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Amar Ujala Foundation Initiative: how to reduce stress in corona pandemic in hindi
कोरोनाकाल में मानसिक तनाव से किस तरह बचा जाए - फोटो : file photo

विस्तार

कोरोनाकाल में लोगों के बीच तनाव भी बहुत बढ़ गया है। मरीज, डॉक्टर, बाहर जाकर काम करने वाले, घर से काम करने वाले, बच्चे-बड़े चिंतित आज हर कोई है लेकिन इस चिंता को दूर कैसे किया जाए, आज के समय में यह बहुत ही महत्वपूर्णं है। चिंता को पालना अच्छी बात नहीं है, यह समस्याओं को ओर बढ़ाती ही है इसलिए अमर उजाला की पहल से बुधवार को हुई चर्चा में डॉ स्मिता एन देशपांडे, प्रोफेसर, डिपार्टमेंट ऑफ साइकाइट्री एबीवीआईएमएस, दिल्ली और डॉ सुनील बालियान, कोरोना इंचार्ज, यथार्थ हॉस्पिटल, नोएडा ने बताया कि 'कोरोनाकाल में मानसिक तनाव से किस तरह बचा जाए'। 

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डॉ स्मिता ने कार्यक्रम की शुरुआत में कहा है कि ये जो समय है, ऐसा समय है जो बहुत ही असामान्य है, जिसकी कल्पना हमने कभी नहीं की थी। हमेशा हमने सुना है कि मिल-जुलकर रहना है, लोगों के साथ घुलना-मिलना है, अकेले नहीं रहना है लेकिन अब सब बदल चुका है। यही वजह है कि हम खुद को बहुत ज्यादा तनावग्रस्त पा रहे हैं।
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                                                                                                                               डॉ सुनील ने बहुत ही अच्छी बात कही कि यदि कोरोना आपको हो जाता है तो इस बात का ध्यान रखें कि बुखार, सिरदर्द, जुकाम यदि आपको हैं तो ये माइल्ड लक्षण ही हैं, यदि आपका ऑक्सिजन लेवल एकदम गिरने लगा है तो इसे मेजर कोरोना कहा जा सकता है इसलिए पहले से ही घबराने न लगें। अधिकांश लोग 14 दिनों में ही घर से स्वस्थ हो रहे हैं। यदि पहले ही दिन से आप हिम्मत हार जाते हैं तो आपके लिए स्वस्थ होना और मुश्किल ही होगा लेकिन आप सकारात्मक रहेंगे तो पता ही नहीं चलेगा कि समय कैसे बीत गया। 

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इस मुश्किल समय में मानसिक स्वास्थ्य को कैसे संतुलित रखें? 
-डॉ सुनील कहते हैं कि तनाव सभी को होता है, फिर चाहे वे मरीज हों या उनके परिजन हों और सभी का तनाव अलग-अलग स्तर का होता है। तनाव से बाहर निकलने के लिए कोरोना से जुड़ी सही जानकारी प्राप्त करना चाहिए, यदि सही जानकारी नहीं होगी तो हम डरेंगे। कोरोना इतना भी खतरनाक नहीं है क्योंकि 80 प्रतिशत लोग इससे घर पर ही ठीक होते हैं, सिर्फ 1 से 2 प्रतिशत लोग मरते हैं। कोरोना के साथ हमें जीने की आदत डालना होगी। 

तनाव को इस समय दूर कैसे किया जाए?
-डॉ स्मिता बताती हैं कि इस बात पर ध्यान दें कि ज्यादा लोग इस बीमारी से ठीक हो रहे हैं। इस समय खुद को मजबूत बनाएं। मैं हर चीज को कर सकती हूं। सामान्य सावधानियों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। यदि आप सावधानी रखेंगे तो आप खुद से ये महसूस कर सकेंगे कि मैं स्वस्थ रह सकती हूं तो जीवन में असहायता नहीं आएगी तो आपका स्ट्रेस कम रह सकता है। यदि आप अपने भाग्य को अपने हाथ में रखेंगे तो तनाव कम होगा लेकिन आप ऐसा सोच ही नहीं पाएंगे तो तनाव बढ़ेगा। 

-क्या कोविडकाल में हाइपरटेंशन बढ़ा है?
डॉ सुनील ने इस सवाल का जवाब देते हुए बताया है कि ऐसा कुछ नहीं है लेकिन यदि लंबे समय तक आप तनाव लेते हैं तो आपको सेकंडरी हाइपरटेंशन हो सकता है लेकिन अभी तक ऐसे कोई मामले नहीं देखे गए हैं कि कोरोना से हाइपरटेंशन बढ़ रहा है पर इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि हाइपरटेंंशन और स्ट्रेस के बीच कोई संबंध नहीं है। 



अस्वीकरण- अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।


 
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