कोरोना का प्रभावः मनोरोग भी बढ़ा रही महामारी
संक्रमण के चलते अमेरिका जैसे देशों में आवासीय अस्पतालों में रह रहे मनोरोगियों को घर भेज दिया गया है। इसके कारण न सिर्फ उनका इलाज अधर में लटक गया है बल्कि परिवारजनों को भी उनकी सार-संभाल में दिक्कतें आ रही हैं। आलम यह है कि पिछले कुछ दिनों में मेंटल हेेल्थ कॉल सेंटरों पर मदद के लिए फोन कॉल्स की बाढ़ आ गई है।
जानकारों का कहना है कि लॉकडाउन में मनोरोगियों की मौजूदगी ने परिवारजनों के लिए चुनौतियां बढ़ा दी हैं। यही वजह है कि अमेरिका के कई शहरों में पिछले दो हफ्तों में मेंटल हेल्थ के लिए संचालित कॉल सेंटरों पर मदद मांगने वालों की तादाद में 60 फीसदी तक इजाफा हुआ है।
- कोविड रोगियों के लिए कराया गया खाली
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने 27 मार्च को वायरस के बढ़ते खतरे के कारण आवासीय सुविधास्थल अस्थायी रूप से बंद कर दिए। ट्रंप प्रशासन ने यह कदम कोविड-19 रोगियों के लिए पर्याप्त बेड की व्यवस्था करने के लिए उठाया था। हालांकि, रोगियों को चिकित्सकों द्वारा ऑनलाइन चिकित्सा मुहैया कराने का विकल्प रखा गया।
- बढ़ गई है परिजनों की चुनौतियां
मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है, किसी मनोरोगी के कारण परिवार का माहौल बदलना लाजिमी है। परिवारजनों को खास देखभाल करते हुए उनकी मानसिक विकृतियों से निपटने के लिए खुद को तैयार रखना होता है। उनकी हरकतों पर निगाह रखनी होती है। जानकारों के अनुसार, काफी परिवारों को रोगियों में घबराहट, पैनिक अटैक जैसी स्थिति से निपटने की जानकारी न होने से मुसीबतें बढ़ जाती हैं।
- घर में सहज महसूस कराना चुनौती
मानसिक रोगों से ग्रस्त बच्चों को सहज महसूस कराना अभिभावकों के लिए बड़ी चुनौती होती है। काफी दिनों से घर के बाहर रहने के कारण वे अपने भाइयो-बहनों या अन्य सदस्यों से जल्दी घुल-मिल नहीं पाते। सभी सदस्यों को भी उनके साथ बर्ताव को लेकर काफी सजग रहना होता है। ऐसे रोगियों को यह पसंद नहीं होता कि उन्हें ज्यादा लोग सलाह–मशविरा दें। इसलिए एक निश्चित दूरी भी रखना जरूरी है।
- मिल रहा है ऑनलाइन उपचार
जूम या वीसी जैसी वीडियो सेवाओं के माध्यम से चिकित्सक मनोरोगियों को टेलीथेरैपी दे रहे हैं। साथ ही घर वालों को भी उनकी देखभाल की जानकारी भी दी जा रही है। चिकित्सक रोगियों को वायरस से बचने के लिए दैनिक जीवन में स्वच्छता अपनाने के टिप्स भी दे रहे हैं।
- परेशान रोगी उठा रहे आत्महत्या जैसा कदम...
विशेषज्ञों का कहना है कि पहले से ही मानसिक विकारों से ग्रस्त रोगियों पर कोरोना का भय दोहरी प्रताड़ना जैसा है। ऐसे में उनके परिवारजनों द्वारा रोक-टोक पर वे कई दफा अतिउग्र हो जाते हैं। लॉकडाउन में मानसिक रोगियों द्वारा आत्महत्या जैसा कदम उठाने की घटनाएं भी सामने आई हैं।