World Future Skill Index 2025: दुनिया में अमेरिका के बाद भारतीय पेशेवर सबसे कुशल, ताजा रिपोर्ट में खुलासा
World Future Skill Index Report 2025: क्यूएस की वर्ल्ड फ्यूचर स्किल इंडेक्स-2025 की रिपोर्ट जारी हो चुकी है। इसमें भारत की वर्कफोर्स को सबसे अधिक पेशेवर माना गया है। भारत की वर्कफोर्स आधुनिक तकनीक के साथ कदम से कदम मिलाकर काम कर रही है।
विस्तार
World Future Skill Index 2025: भारत के युवा अपने कौशल और प्रतिभा के बल पर दुनिया में अपनी अलग पहचान बना रहे हैं। अमेरिका के बाद भारत ऐसा दूसरा देश है, जहां के युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल तकनीक और ग्रीन एनर्जी जैसे उच्च मांग वाले क्षेत्रों में सबसे योग्य माना गया है। क्यूएस वर्ल्ड फ्यूचर स्किल्स इंडेक्स 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत की वर्कफोर्स को भविष्य की जरूरतों को पूरा करने में बेहद पेशेवर और सक्षम पाया गया है।
AI और ग्रीन एनर्जी में भारत सबसे आगे
रिपोर्ट के मुताबिक, एआई, डिजिटल और ग्रीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में भारत का प्रदर्शन दुनिया के अन्य देशों से बेहतर है। क्यूएस रैंकिंग में अमेरिका ने 100 अंकों के साथ पहला स्थान हासिल किया है, जबकि भारत 99.1 अंकों के साथ दूसरे और मैक्सिको 98.2 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहा। भारत के एआई के उपयोग और तकनीकी कौशल ने उसे अन्य देशों से एक कदम आगे रखा है।
समग्र रैंकिंग और श्रेणियां
भारत की कुल रैंकिंग 25वें स्थान पर रही। चार मुख्य पैमानों – स्किल फिट, एकैडमिक रेडीनेस, फ्यूचर ऑफ वर्क और आर्थिक बदलाव – पर आधारित इस रैंकिंग में भारत ने अलग-अलग श्रेणियों में ये स्थान हासिल किए:
- स्किल फिट: 37वां स्थान
- एकैडमिक रेडीनेस: 26वां स्थान
- आर्थिक बदलाव: 40वां स्थान
रिपोर्ट के अनुसार, भविष्य की जरूरतों को देखते हुए भारतीय युवा अपने कौशल में तेजी से सुधार कर रहे हैं और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं।
आर्थिक विकास में भारत की बढ़त
भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और युवाओं की बड़ी आबादी उसे अन्य देशों से अलग बनाती है। रिपोर्ट में बताया गया है कि 2025 से 2030 के बीच भारत की आर्थिक विकास दर सालाना 6.5% रहने का अनुमान है। वहीं, स्टार्टअप संस्कृति और उद्यमों से धन जुटाने में भारत की मजबूत स्थिति ने उसे वैश्विक स्तर पर और सशक्त बनाया है।
कौशल विकास की जरूरत
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत को अपनी शिक्षा व्यवस्था में सुधार करने की जरूरत है। विशेषकर एआई, डिजिटल और ग्रीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में बढ़ती मांग को देखते हुए छात्रों और स्नातकों को इन क्षेत्रों के कौशल में प्रशिक्षित करना अनिवार्य है।
उच्च शिक्षा और इंडस्ट्री का तालमेल
रिपोर्ट ने सुझाव दिया है कि भारतीय विश्वविद्यालयों को उद्योगों के साथ बेहतर तालमेल बिठाना होगा। इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और भारतीय युवा वैश्विक स्तर पर अपनी अहमियत और बढ़ा पाएंगे।
- पाठ्यक्रम में रचनात्मकता, समस्या-समाधान कौशल, और उद्यमशीलता को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
- ग्रीन स्किल्स और अक्षय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों को शिक्षा का हिस्सा बनाना आवश्यक है।
शोध और विकास पर ध्यान
भारत को शोध और विकास (R&D) में अधिक निवेश करने की जरूरत है। खासकर ई-व्हीकल और ग्रीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में तेजी से उभर रही मांग को देखते हुए, शिक्षा और शोध में सुधार से भारत को वैश्विक स्तर पर और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाया जा सकता है।
दुनिया में भारत की छवि मजबूत
क्यूएस के उपाध्यक्ष के अनुसार, भारतीय युवा तेजी से बदलते वैश्विक बाजार में अपनी पहचान बना रहे हैं। स्टार्टअप संस्कृति और नवाचार के क्षेत्र में भारत की सक्रियता देश को नई ऊंचाइयों पर ले जा रही है। मंदी की आशंकाओं के बीच भी भारतीय युवाओं की कड़ी मेहनत और कौशल ने देश की अर्थव्यवस्था को स्थिरता दी है।