फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   SC sets aside MP HC order mandating 3-year legal practice for judicial recruitment

SC: सुप्रीम कोर्ट ने एमपी सिविल जज भर्ती में अनुभव की शर्त को किया खारिज, अब नहीं चाहिए 3 साल का एक्सपिरिएंस

Tue, 23 Sep 2025 03:06 PM IST
शाहीन परवीन जॉब्स डेस्क, अमर उजाला
जॉब्स डेस्क, अमर उजाला Published by: शाहीन परवीन Updated Tue, 23 Sep 2025 03:06 PM IST
सार

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सिविल जज भर्ती में 3 साल वकालत या अनुभव की शर्त को रद्द कर दिया है। अब इस शर्त के बिना भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।

विज्ञापन
SC sets aside MP HC order mandating 3-year legal practice for judicial recruitment
- फोटो : ANI

विस्तार

SC: सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश में 2022 की सिविल जज भर्ती को लेकर बड़ा फैसला दिया है। कोर्ट ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के उस फैसले को रद्द कर दिया जिसमें सिविल जज बनने के लिए तीन साल की वकालत का अनुभव या एलएलबी में 70% अंक होना जरूरी बताया गया था।

विज्ञापन


न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति अतुल एस चंदुरकर की पीठ ने इस फैसले को चुनौती देने वाली अपील को स्वीकार कर भर्ती को इन शर्तों के बिना आगे बढ़ाने की अनुमति दे दी है।

विज्ञापन

अधिवक्ता ने पुनर्परीक्षा को असंवैधानिक बताया

मध्य प्रदेश न्यायिक सेवा नियम, 1994 में 23 जून, 2023 को संशोधन किया गया था, ताकि राज्य में सिविल जज प्रवेश-स्तर की परीक्षा में बैठने के लिए तीन साल की वकालत अनिवार्य हो सके।

उच्च न्यायालय ने संशोधित नियमों को बरकरार रखा, लेकिन दो अचयनित उम्मीदवारों द्वारा संशोधित नियमों के लागू होने के बाद पात्र होने का दावा करने और कट-ऑफ की समीक्षा की मांग करने के बाद मुकदमेबाजी का एक और दौर शुरू हो गया।

उच्च न्यायालय की ओर से पेश हुए अधिवक्ता अश्विनी कुमार दुबे ने तर्क दिया कि पुनर्परीक्षा "असंवैधानिक और अव्यावहारिक" है और इससे मुकदमेबाजी की बाढ़ आ जाएगी।

शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के आदेश पर पहले ही लगाई थी रोक

शीर्ष अदालत ने पिछले साल उच्च न्यायालय के उस आदेश पर रोक लगा दी थी, जिसमें तीन साल की वकालत की अनिवार्य आवश्यकता के बिना सिविल जजों के पदों पर भर्ती पर रोक लगाई गई थी।

मध्य प्रदेश न्यायिक सेवा नियम, 1994 में 23 जून, 2023 को संशोधन किया गया था, ताकि राज्य में सिविल जज प्रवेश-स्तर की परीक्षा में बैठने के लिए तीन साल की वकालत अनिवार्य हो सके।

उच्च न्यायालय ने संशोधित नियमों को बरकरार रखा, लेकिन दो अचयनित उम्मीदवारों द्वारा संशोधित नियमों के लागू होने के बाद पात्र होने का दावा करने और कट-ऑफ की समीक्षा की मांग करने के बाद मुकदमेबाजी का एक और दौर शुरू हो गया।

विज्ञापन

भर्ती पर रोक और पात्रता उल्लंघन पर कार्रवाई

पद पर भर्ती पर रोक लगाते हुए, उच्च न्यायालय ने संशोधित भर्ती नियमों के तहत पात्रता मानदंडों को पूरा नहीं करने वाले प्रारंभिक परीक्षा में सफल उम्मीदवारों को बाहर करने का निर्देश दिया।

शीर्ष अदालत मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा दायर एक अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उसकी खंडपीठ द्वारा 13 जून, 2024 को पारित आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें उसे 14 जनवरी, 2024 को आयोजित प्रारंभिक परीक्षा में उन सभी सफल उम्मीदवारों को बाहर करने या हटाने का निर्देश दिया गया था, जो संशोधित नियमों के तहत पात्रता मानदंडों को पूरा नहीं करते थे।

विज्ञापन
विज्ञापन

 रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed