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एल्युमीनियम आपूर्ति संकट बढ़ा: गोदामों में स्टॉक तीन साल के निचले स्तर पर; बढ़ेगी निर्माण-पैकेजिंग की लागत?
Fri, 11 Sep 2026 06:36 AM IST
निर्मल कांत
बोनस डेस्क, नई दिल्ली।
बोनस डेस्क, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Fri, 11 Sep 2026 06:36 AM IST
सार
एल्युमीनियम की सप्लाई का संकट गहराता जा रहा है। एलएमई के गोदामों में इसका स्टॉक तीन साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। कीमतों में तेजी का असर बर्तन, पैकेजिंग और घर के निर्माण पर पड़ सकता है। क्या इसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा? पढ़िए रिपोर्ट
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एल्युमीनियम आपूर्ति का संकट गहराया
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एएनआई (फाइल)
विस्तार
अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजार में औद्योगिक धातुओं की रीढ़ कहे जाने वाले एल्युमीनियम की उपलब्धता पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है। लंदन मेटल एक्सचेंज (एलएमई) के अधिकृत गोदामों में एल्युमीनियम का कुल भंडार अगस्त 2026 में घटकर महज 3.45 लाख टन के करीब पहुंच गया है, जो पिछले तीन वर्षों का सबसे निचला स्तर है।
यह स्टॉक अप्रैल 2024 के अपने उच्चतम स्तर (लगभग 13.1 लाख टन) से करीब 74 फीसदी और पिछले साल की समान अवधि (7.10 लाख टन) के मुकाबले 51 फीसदी गिर चुका है। वैश्विक बाजारों में स्टॉक के इस अभूतपूर्व सूखे ने अंतरराष्ट्रीय कीमतों और फिजिकल प्रीमियम को मजबूत तकनीकी सहारा दिया है, जिसका सीधा असर अब घरेलू उद्योगों की उत्पादन लागत और अंततः आम उपभोक्ता के बजट पर पड़ना तय माना जा रहा है।
तेजी से बढ़ सकती हैं लॉजिस्टिक्स कीमतें
एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक, तुरंत भौतिक आपूर्ति के लिए उपलब्ध रजिस्टर्ड स्टॉक घटकर लगभग 2.5 लाख टन रह गया है। वहीं, ऑफ-वारंट स्टॉक (वेयरहाउस में रखा वह माल जिसे दोबारा डिलीवरी में बदला जा सकता है) भी घटकर 1 लाख टन के नीचे आ चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन्वेंट्री बफर न के बराबर रहने से बाजार में बैकवर्डेशन (हाजिर भाव का वायदा भाव से अधिक हो जाना) की स्थिति बन सकती है। ऐसे में लॉजिस्टिक्स में मामूली व्यवधान भी कीमतों में अप्रत्याशित तेजी पैदा कर सकता है।
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आम आदमी पर चौतरफा मार
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यह स्टॉक अप्रैल 2024 के अपने उच्चतम स्तर (लगभग 13.1 लाख टन) से करीब 74 फीसदी और पिछले साल की समान अवधि (7.10 लाख टन) के मुकाबले 51 फीसदी गिर चुका है। वैश्विक बाजारों में स्टॉक के इस अभूतपूर्व सूखे ने अंतरराष्ट्रीय कीमतों और फिजिकल प्रीमियम को मजबूत तकनीकी सहारा दिया है, जिसका सीधा असर अब घरेलू उद्योगों की उत्पादन लागत और अंततः आम उपभोक्ता के बजट पर पड़ना तय माना जा रहा है।
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तेजी से बढ़ सकती हैं लॉजिस्टिक्स कीमतें
एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक, तुरंत भौतिक आपूर्ति के लिए उपलब्ध रजिस्टर्ड स्टॉक घटकर लगभग 2.5 लाख टन रह गया है। वहीं, ऑफ-वारंट स्टॉक (वेयरहाउस में रखा वह माल जिसे दोबारा डिलीवरी में बदला जा सकता है) भी घटकर 1 लाख टन के नीचे आ चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन्वेंट्री बफर न के बराबर रहने से बाजार में बैकवर्डेशन (हाजिर भाव का वायदा भाव से अधिक हो जाना) की स्थिति बन सकती है। ऐसे में लॉजिस्टिक्स में मामूली व्यवधान भी कीमतों में अप्रत्याशित तेजी पैदा कर सकता है।
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आम आदमी पर चौतरफा मार
- एल्युमीनियम आधुनिक विनिर्माण का अनिवार्य हिस्सा है। इसकी कीमतों में तेजी का प्रभाव सीधे तौर पर रोजमर्रा के जीवन और उपभोक्ता सामानों पर दिखेगा। कुकर, कड़ाही और नॉन-स्टिक बर्तनों के दाम बढ़ेंगे। इसके अलावा, दवाओं की स्ट्रिप्स, जूस-दूध के टेट्रा पैक और फूड फॉयल महंगे होने से पैकेज्ड फूड्स की लागत बढ़ेगी, जिसका भार कंपनियां कीमतों में वृद्धि या वजन घटाकर उपभोक्ताओं पर डालेंगी।
- आधुनिक घरों में खिड़कियों और दरवाजों के लिए स्लाइडिंग फ्रेम्स, फॉल्स सीलिंग पैनल्स और मॉड्यूलर किचन फिटिंग्स में एल्युमीनियम का भारी इस्तेमाल होता है। कच्चा माल महंगा होने से नए घर के फिनिशिंग व इंटीरियर बजट में 10 से 15 फीसदी तक का इजाफा हो सकता है।
- घरेलू बाजार एमसीएक्स पर 11 सितंबर 2025 को एल्यूमीनियम का भाव 261.15 रुपये प्रति किलो था, जो 10 सितंंबर 2026 को 356.30 रुपये प्रति किलो हो गया। एक साल में 36.40 फीसदी का उछाल आया है।