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यूपी में 4000 दरोगाओं की भर्ती पर रोक

Wed, 25 Mar 2015 03:12 PM IST
Updated Wed, 25 Mar 2015 03:12 PM IST
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court decision on up police recruitment.

नागरिक पुलिस और पीएसी में चार हजार से अधिक उपनिरीक्षकों और प्लाटून कमांडेंट की चयन प्रक्रिया पर रोक लग गई है।

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चयन के लिए आयोजित मुख्य परीक्षा में व्हाइटनर इस्तेमाल किए जाने को लेकर दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान मंगलवार को महाधिवक्ता विजय बहादुर सिंह ने स्वयं आश्वासन दिया कि अगली सुनवाई तक चयन प्रक्रिया पूरी तरह से रुकी रहेगी और इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया जाएगा।

याचिकाओं की सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति वीके बिड़ला ने याचिका पर इस आश्वासन को स्वीकार करते हुए 30 मार्च को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है।
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ओएमआर सीट में व्हाइटनर के प्रयोग

court decision on up police recruitment.

इससे पूर्व कोर्ट के आदेश पर मंगलवार को अदालत के समक्ष आठ ऐसी ओएमआर सीट प्रस्तुत की गईं जिनमें व्हाइटनर का प्रयोग किया गया था। जांच कमेटी की रिपोर्ट में बताया कि इन आठ में से छह अभ्यर्थियों ने व्हाइटनर लगाया है। अन्य ओएमआर सीट दो बक्सों में रखी गई थीं, जिनको अगली सुनवाई पर अदालत में खोला जाएगा। रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया था कि व्हाइटनर लगाने वाले कितने अभ्यर्थी चयनित कर लिए गए हैं।

महाधिवक्ता ने बताया कि अभ्यर्थियों ने कुछ सवालों के जवाब में ही व्हाइटनर का प्रयोग किया है जबकि याचीगण के वकील सीमांत सिंह का कहना था कि जब व्हाइटनर प्रतिबंधित है तो पूरा परिणाम रद होना चाहिए। जांच के दौरान ही 16 मार्च को परिणाम भी जारी कर दिया गया। अभ्यर्थियों ने परिणाम को भी चुनौती दी है।

दरोगा भर्ती में शामिल अभ्यर्थी साकेत कुमार, संजीव द्विवेदी, अजय पाल सहित दर्जनों अभ्यर्थियों ने याचिकाएं दाखिल कर मुख्य परीक्षा में गंभीर धांधली का आरोप लगाया था। मुख्य परीक्षा में ओएमआर सीट पर कुछ लोगों ने व्हाइटनर और ब्लेड का प्रयोग गलत सवालों को सही किया जबकि निर्देश पुस्तिका में ही व्हाइटनर का प्रयोग मना था। व्हाइटनर लगाने वाले अभ्यर्थियों ने याचिका में अपना पक्ष रखने की अर्जी दी है।

पुलिस भर्ती निरस्त हो, सीबीआई करे जांच

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यूपी पुलिस में चल रही सिपाही की भर्ती में धांधली का आरोप लगाकर हंगामा कर रहे मेरिट से बाहर हुए सैकड़ों अभ्यर्थी मंगलवार को कलक्ट्रेट जा पहुंचे। उन्होंने हंगामा-प्रदर्शन करते हुए दो मांगे रखीं। एक तो भर्ती निरस्त हो और दूसरी इसकी सीबीआई जांच हो। उनकी हिमायत में आए रालोद नेताओं ने उन्हें भरोसा दिया कि उन्हें इंसाफ दिलाने के लिए उच्च न्यायालय में कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी और सड़क से लेकर विधानसभा तक संघर्ष भी होगा।

मेरिट में कैसे आए इटावा-मैनपुरी के 34 हजार अभ्यर्थी ?
यूपी पुलिस में चल रही दरोगा और सिपाहियों की भर्ती में मेरिट से बाहर हुए अभ्यर्थियों ने कई सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इस मामले में हाईकोर्ट में रिट दायर हो चुकी है। हैरानी यह देखकर हो रही है कि मेरिट में सिर्फ इटावा और मैनपुरी के 34 हजार अभ्यर्थियों का चयन किया गया है। शक इसलिए भी हो रहा है, क्योंकि पुलिस भर्ती बोर्ड आरटीआई के तहत पूछे जा रहे सवालों के जवाब देने से बचने की कोशिश कर रहा है।

उत्तर प्रदेश पुलिस में चार हजार दरोगा और 41,615 सिपाहियों की भर्ती प्रक्रिया चल रही है। मेरिट से बाहर हुए अभ्यर्थी आंदोलन की राह पर है। साक्ष्य जुटाकर फाइल तैयार करने वाले दाहा के विनेश राणा का कहना है कि  मेडिकल परीक्षण केलिए लगभग 61 हजार अभ्यर्थियों को एडमिट कार्ड भेजे गए हैं। इनका नाम मेरिट में बताया गया है। इनमें सिपाही भर्ती के लिए 55 हजार अभ्यर्थी हैं। अगर दोनों का रिजल्ट देखा जाए तो कई गड़बड़ी सामने आ रही हैं।

विनेश राणा का कहना है कि दारोगा भर्ती में महिला अभ्यर्थियों की मेरिट में कट आफ मार्क्स 239 हैं, लेकिन चंचल कुमारी के 292 और तारा कुमारी के 271 अंक होने के बावजूद दोनों मेरिट से बाहर हैं। सामान्य में पुरुष अभ्यर्थियों की मेरिट के कट ऑफ मार्क्स 332 हैं, लेकिन अजय कुमार यादव 313 अंकों पर ही मेरिट में हैं।

इसी तरह सिपाही भर्ती में पुरुष वर्ग में कट ऑफ मार्क्स 305 हैं, लेकिन अभिषेक सिंह 289, भगत सिंह 281 और संदीप कुमार 276 मेरिट में हैं। दरोगा भर्ती में ओएमआर शीट पर सफेदा (फ्लू) इस्तेमाल किए जाने के मामले में इलाहबाद के साकेत सिंह की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर हुई है। दौड़ के लिए अभ्यर्थियों को गले में डालने के लिए दी गई चिप की खराबी पर मुजफ्फरनगर के नितिन बालियान ने रिट की है।

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