Jobs: ओबीसी विवाद सुलझते ही शुरू होंगी दो से तीन लाख भर्तियां, इस सूबे में आएगी सरकारी नौकरी की बहार
Sarkari Naukri: देश के एक राज्य की विधानसभा में राज्य की मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में 2 से 3 लाख रिक्त पदों पर भर्ती की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि भर्ती में देरी से कई विभागों में रिक्त पदों पर असर पड़ा है।
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Kolkata: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को विधानसभा में घोषणा की कि राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में 2 से 3 लाख रिक्त पदों पर भर्ती की जाएगी। हालांकि, यह प्रक्रिया तभी आगे बढ़ेगी जब ओबीसी आरक्षण से जुड़े मुद्दे का समाधान हो जाएगा और राज्य में समुदायों की सामाजिक व आर्थिक स्थिति का नया सर्वेक्षण पूरा हो जाएगा।
ममता बनर्जी ने विधानसभा में विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि भर्तियों में देरी का कारण कोर्ट में दायर याचिकाएं हैं। उन्होंने विपक्ष से अपील की कि वे "खेल न खेलें" और भर्ती प्रक्रिया को बाधित न करें।
उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को ओबीसी आरक्षण के लिए नया सर्वेक्षण करने की अनुमति दी है। सरकार इस सर्वेक्षण को तीन महीने के अंदर पूरा करने की योजना बना रही है।
ममता बनर्जी ने कहा, "जो लोग ओबीसी भर्ती के खिलाफ हैं, वे अदालत चले गए और इस प्रक्रिया को रोक दिया। कल सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई और परिणाम सकारात्मक रहा। मुझे लगता है कि यह मामला जल्द ही सुलझ जाएगा।"
उन्होंने आगे कहा, "हमारा सर्वेक्षण रोका नहीं गया है, इसलिए हम इसे जारी रखेंगे। जैसे ही हमें आवश्यक मंजूरी मिलेगी, भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।"
किन विभागों में रुकी हुई हैं भर्तियाँ?
मुख्यमंत्री ने कहा कि भर्ती में देरी से कई विभागों में रिक्त पदों पर असर पड़ा है, जिनमें शामिल हैं:
- प्राथमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षा विभाग
- स्वास्थ्य विभाग
- पुलिस विभाग
सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है मामला
पश्चिम बंगाल सरकार ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि राज्य में ओबीसी समुदायों की पहचान के लिए एक नया सर्वेक्षण किया जाएगा।
न्यायमूर्ति बी.आर. गवई और ए.जी. मसीह की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है। पश्चिम बंगाल सरकार ने कलकत्ता हाईकोर्ट के उस आदेश के खिलाफ याचिका दायर की थी, जिसमें 77 समुदायों (जिनमें से अधिकांश मुस्लिम थे) को ओबीसी सूची से बाहर कर दिया गया था।
मई 2024 में, हाईकोर्ट ने 2010 के बाद जारी किए गए सभी ओबीसी प्रमाण पत्र रद्द कर दिए थे। इसके अलावा, पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग अधिनियम, 2012 के कई प्रावधानों को भी रद्द कर दिया गया था।