फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jharkhand ›   Recitation of the Ramayana echoes just 50 feet away from a mosque; harmony has prevailed for 52 years.

झारखंड: रामायण की चौपाइयां और नमाज की इबादत, 52 साल से कायम है भाईचारे की अनूठी मिसाल

Sat, 17 Oct 2026 03:54 PM IST
राँची ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची Published by: राँची ब्यूरो Updated Sat, 17 Oct 2026 03:54 PM IST
सार

लातेहार के अंबाकोठी में 52 वर्षों से रामायण पाठ और नमाज के बीच धार्मिक सौहार्द की परंपरा कायम है। नमाज के समय साउंड बंद कर दिया जाता है। दोनों समुदायों का आपसी सम्मान और भाईचारा गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल है।

विज्ञापन
Recitation of the Ramayana echoes just 50 feet away from a mosque; harmony has prevailed for 52 years.
दुर्गा मंदिर, लातेहार - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

एक ओर पंडाल में रामायण की चौपाइयां गूंज रही थीं, तो दूसरी ओर कुछ ही कदम की दूरी पर स्थित मस्जिद में नमाज अदा करने के लिए लोग पहुंच रहे थे। एक तरफ भगवान राम की आराधना और दूसरी तरफ अल्लाह की इबादत। दोनों के बीच आपसी सम्मान, भाईचारे और सौहार्द की अनूठी मिसाल दिखाई दे रही थी। शुक्रवार को लातेहार के अंबाकोठी मुहल्ले में दिखा यह नजारा कोई एक दिन की तस्वीर नहीं, बल्कि पांच दशक से अधिक समय से चली आ रही परंपरा का हिस्सा है।

विज्ञापन

अंबाकोठी में हर वर्ष शारदीय नवरात्र के अवसर पर श्रीराम चरित मानस नवाह्न पारायण पाठ महायज्ञ समिति की ओर से दस दिवसीय मानस यज्ञ का आयोजन किया जाता है। इस वर्ष इसका 53वां अधिवेशन चल रहा है। सुबह फेरी के बाद आठ बजे से गिरिडीह से आए अनिल भारद्वाज की टीम संगीत की धुन पर रामायण पाठ कराती है। इसमें 331 महिलाएं एक ही परिधान में शामिल होकर सामूहिक रूप से रामायण का पाठ करती हैं। शाम को आरती होती है, जबकि रात आठ बजे से अयोध्या की रामलीला मंडली रामलीला का मंचन करती है।

विज्ञापन


50 फीट की दूरी, फिर भी कायम है सौहार्द
जिस स्थान पर मानस पाठ का आयोजन होता है, वहां से मस्जिद की दूरी करीब 50 फीट है। खास बात यह है कि मुहल्ले और आसपास कोई मुस्लिम परिवार नहीं रहता, इसके बावजूद वर्षों से दोनों समुदायों के बीच धार्मिक सौहार्द की मिसाल कायम है।

विज्ञापन
विज्ञापन

शारदीय नवरात्र के दौरान शुक्रवार को जब नमाज का समय होता है, तो मस्जिद की ओर लगे साउंड को बंद कर दिया जाता है। नमाज पूरी होने के बाद रामायण पाठ और संगीत का कार्यक्रम फिर शुरू हो जाता है। यह व्यवस्था किसी दबाव या विवाद के कारण नहीं, बल्कि एक-दूसरे की धार्मिक भावनाओं और इबादत के प्रति सम्मान के चलते वर्षों से चली आ रही है।

शुक्रवार को भी यही नजारा देखने को मिला। एक ओर रामायण पाठ में शामिल युवतियां पंडाल से बाहर निकल रही थीं, तो दूसरी ओर मुस्लिम समाज के लोग नमाज अदा कर मस्जिद से बाहर आ रहे थे। दोनों समुदाय अपने-अपने धार्मिक अनुष्ठानों में लगे थे, लेकिन माहौल में कहीं कोई तनाव नहीं था। यह दृश्य अंबाकोठी की उस परंपरा को बयां कर रहा था, जिसमें धर्म अलग-अलग हैं, लेकिन एक-दूसरे के प्रति सम्मान साझा है।

मुहर्रम का मुख्य कार्यक्रम भी इसी मुहल्ले में
महायज्ञ समिति के मुख्य संरक्षक और राज्यसभा सांसद बैद्यनाथ राम ने कहा कि अंबाकोठी में शारदीय नवरात्र का पर्व वर्षों से धूमधाम से मनाया जाता है। मुहल्ले में मस्जिद होने के बावजूद दोनों समुदायों के बीच आपसी सौहार्द और भाईचारा बना हुआ है। उन्होंने बताया कि इसी मुहल्ले में मुहर्रम का मुख्य कार्यक्रम भी आयोजित होता है। इस दौरान भी कभी किसी तरह का विवाद नहीं हुआ।

जिले के एसपी कुमार गौरव ने अंबाकोठी में दोनों समुदायों के अपने-अपने धर्म के अनुसार आराधना करने को सौहार्द और भाईचारे की मिसाल बताया। उन्होंने कहा कि ऐसी परंपराएं समाज में सकारात्मक संदेश देती हैं। डीडीसी ने भी कहा कि लातेहार में दोनों समुदायों के लोग मिल-जुलकर पर्व मनाते हैं। यह आपसी भाईचारे के साथ-साथ देश की गंगा-जमुनी तहजीब को भी दर्शाता है।

वहीं, आफताब आलम ने कहा कि अंबाकोठी की यह परंपरा अपने आप में खास है। शुक्रवार को नमाज के समय रामायण पाठ का साउंड बंद किया जाना इस बात का प्रमाण है कि यहां लोग एक-दूसरे के धर्म और धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हैं। महायज्ञ समिति के अध्यक्ष प्रमोद प्रसाद सिंह ने कहा कि दोनों समुदायों के लोग हमेशा से मिल-जुलकर रहते आए हैं। दशहरा हो या कोई अन्य पर्व, आज तक किसी तरह का वैमनस्य सामने नहीं आया।

52 साल की परंपरा दे रही बड़ा संदेश
अंबाकोठी की कहानी सिर्फ रामायण पाठ और नमाज के एक साथ होने की नहीं, बल्कि उस भरोसे की भी है, जो पांच दशक से अधिक समय में दोनों समुदायों के बीच मजबूत हुआ है। यहां न किसी को अपना धर्म छोड़ना है और न दूसरे के धर्म में दखल देना है। जरूरत सिर्फ इतनी है कि हर कोई अपने धर्म का पालन करे और दूसरे के धर्म का सम्मान करे।

लातेहार के अंबाकोठी की यह तस्वीर बताती है कि विविधताओं से भरे भारत में धार्मिक आस्थाएं अलग हो सकती हैं, लेकिन इंसानियत, सम्मान और भाईचारा साझा हो सकता है। पांच दशक से अधिक समय से चली आ रही यह परंपरा आज भी यही संदेश दे रही है कि धार्मिक आस्था के अलग-अलग रास्ते होने के बावजूद सौहार्द और आपसी सम्मान लोगों को जोड़ सकते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed