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झारखंड: पलामू के बृजमोहन राम बने ओडिशा के राज्यपाल, बीजेपी ने 2029 के लिए चला सियासी दांव?
Tue, 13 Oct 2026 09:20 AM IST
राँची ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
Published by: राँची ब्यूरो
Updated Tue, 13 Oct 2026 09:20 AM IST
सार
झारखंड के पलामू निवासी बृजमोहन राम को ओडिशा का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। उनकी नियुक्ति से पलामू समेत पूरे झारखंड में खुशी का माहौल है। राजनीतिक जानकार इसे बीजेपी की मिशन 2029 की रणनीति से जोड़कर देख रहे हैं। वहीं, इसे पलामू प्रमंडल में सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश भी माना जा रहा है।
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ब्रज मोहन राम
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने छह राज्यों में राज्यपालों की नियुक्ति की है। इसी क्रम में झारखंड के पलामू निवासी बृजमोहन राम को ओडिशा का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। उनकी नियुक्ति की खबर सामने आने के बाद पलामू सहित पूरे झारखंड में खुशी का माहौल है। इसे झारखंड के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया पलामू
बृजमोहन राम के ओडिशा का राज्यपाल नियुक्त होने से पलामू जिले का नाम एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया है। उनकी नियुक्ति को लेकर क्षेत्र के लोगों में उत्साह है। लोगों को उम्मीद है कि उनके नए दायित्व से झारखंड और ओडिशा के बीच संबंधों को और मजबूती मिलेगी। बृजमोहन राम भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से तीन बार सांसद रह चुके हैं।
राष्ट्रपति की ओर से छह राज्यों में राज्यपालों की नियुक्ति के फैसले के तहत बृजमोहन राम को ओडिशा की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनके राज्यपाल बनने की खबर से पलामू के साथ-साथ झारखंड के विभिन्न क्षेत्रों में भी प्रसन्नता व्यक्त की जा रही है। वहीं, बीजेपी में भी खुशी का माहौल है।
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मिशन 2029 से जोड़कर देखी जा रही नियुक्ति
राजनीतिक जानकारों की मानें तो बीजेपी ने मिशन 2029 को ध्यान में रखते हुए सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश की है। उनके मुताबिक, पलामू प्रमंडल में अनुसूचित जाति (एससी) समुदाय के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने के लिहाज से इस नियुक्ति को अहम माना जा रहा है। पार्टी को उम्मीद हो सकती है कि इसका राजनीतिक लाभ आगामी चुनावों में मिल सकता है।
हालांकि, झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) इससे पहले पलामू प्रमंडल के लातेहार जिले के निवासी बैद्यनाथ राम को राज्यसभा सांसद बना चुका है। ऐसे में बृजमोहन राम की राज्यपाल के पद पर नियुक्ति को पलामू क्षेत्र में एससी समाज के प्रतिनिधित्व और राजनीतिक प्रभाव के लिहाज से भी देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस घटनाक्रम को बीजेपी और झामुमो के बीच सामाजिक समीकरणों को लेकर जारी प्रतिस्पर्धा के संदर्भ में समझा जा सकता है।
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राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया पलामू
बृजमोहन राम के ओडिशा का राज्यपाल नियुक्त होने से पलामू जिले का नाम एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया है। उनकी नियुक्ति को लेकर क्षेत्र के लोगों में उत्साह है। लोगों को उम्मीद है कि उनके नए दायित्व से झारखंड और ओडिशा के बीच संबंधों को और मजबूती मिलेगी। बृजमोहन राम भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से तीन बार सांसद रह चुके हैं।
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राष्ट्रपति की ओर से छह राज्यों में राज्यपालों की नियुक्ति के फैसले के तहत बृजमोहन राम को ओडिशा की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनके राज्यपाल बनने की खबर से पलामू के साथ-साथ झारखंड के विभिन्न क्षेत्रों में भी प्रसन्नता व्यक्त की जा रही है। वहीं, बीजेपी में भी खुशी का माहौल है।
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मिशन 2029 से जोड़कर देखी जा रही नियुक्ति
राजनीतिक जानकारों की मानें तो बीजेपी ने मिशन 2029 को ध्यान में रखते हुए सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश की है। उनके मुताबिक, पलामू प्रमंडल में अनुसूचित जाति (एससी) समुदाय के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने के लिहाज से इस नियुक्ति को अहम माना जा रहा है। पार्टी को उम्मीद हो सकती है कि इसका राजनीतिक लाभ आगामी चुनावों में मिल सकता है।
हालांकि, झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) इससे पहले पलामू प्रमंडल के लातेहार जिले के निवासी बैद्यनाथ राम को राज्यसभा सांसद बना चुका है। ऐसे में बृजमोहन राम की राज्यपाल के पद पर नियुक्ति को पलामू क्षेत्र में एससी समाज के प्रतिनिधित्व और राजनीतिक प्रभाव के लिहाज से भी देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस घटनाक्रम को बीजेपी और झामुमो के बीच सामाजिक समीकरणों को लेकर जारी प्रतिस्पर्धा के संदर्भ में समझा जा सकता है।