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जमुई पीड़िता की तस्वीर पर बवाल: मीसा भारती पहुंचीं थाने; सीएम के खिलाफ एफआईआर की मांग, पुलिस पर उठाए सवाल
Fri, 25 Sep 2026 09:20 PM IST
प्रतीक पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जमुई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जमुई
Published by: प्रतीक पांडेय
Updated Fri, 25 Sep 2026 09:20 PM IST
सार
जमुई की नाबालिग पीड़िता और उसके परिवार के साथ मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा किए जाने को लेकर विवाद बढ़ गया है। तस्वीर हटाए जाने के बाद राजद सांसद मीसा भारती सचिवालय थाना पहुंचीं और मुख्यमंत्री के खिलाफ पॉक्सो व किशोर न्याय अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की।
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मीसा भारती
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
जमुई में नाबालिग से बदसलूकी के मामले को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के सोशल मीडिया हैंडल से पीड़िता और उसके परिवार के साथ तस्वीर साझा किए जाने पर विवाद बढ़ गया है। तस्वीर कुछ देर बाद हटा दी गई। विपक्ष ने आरोप लगाया है कि तस्वीर से पीड़िता की पहचान उजागर होने का खतरा पैदा हुआ।
एफआईआर की मांग लेकर सचिवालय थाना पहुंचीं मीसा भारती
इसी मामले में पाटलिपुत्र की राजद सांसद डॉ. मीसा भारती शुक्रवार को सचिवालय थाना पहुंचीं और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की। मीसा भारती ने सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि वह पॉक्सो अधिनियम, 2012 की धारा 23 और किशोर न्याय अधिनियम, 2015 की धारा 74 के तहत प्राथमिकी दर्ज कराने पहुंची थीं, लेकिन थाना प्रभारी ने प्राथमिकी दर्ज करने से मना कर दिया।
'पीड़िता की पहचान उजागर करना गंभीर विषय'
मीसा भारती ने कहा कि नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर करना कानून के तहत गंभीर विषय है। उन्होंने बिहार पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि जमुई मामले से जुड़े वीडियो साझा करने वालों पर कार्रवाई की जा रही है, जबकि मुख्यमंत्री के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने से पुलिस पीछे हट रही है।
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तेजस्वी यादव ने भी उठाए सवाल
राजद नेता तेजस्वी यादव ने भी मुख्यमंत्री के सोशल मीडिया हैंडल से तस्वीर साझा किए जाने पर सवाल उठाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर हुई और पॉक्सो अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन हुआ।
मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद पोस्ट हुई थी तस्वीर
दरअसल, जमुई मामले की पीड़िता अपने परिवार के साथ मुख्यमंत्री से मिली थी। मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री के एक्स हैंडल से परिवार के साथ तस्वीर और न्याय का भरोसा देने से जुड़ा संदेश पोस्ट किया गया था। विवाद बढ़ने के बाद पोस्ट हटा दी गई।
यह भी पढ़ें: डीएमसीएच में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल: ओपीडी-इमरजेंसी ठप, मरीज परेशान; प्राचार्य-अधीक्षक ने संभाला मोर्चा
मीसा भारती की ओर से प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग किए जाने के बाद पुलिस की कार्रवाई पर सबकी नजर है। फिलहाल इस मामले में तस्वीर साझा किए जाने को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं।
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एफआईआर की मांग लेकर सचिवालय थाना पहुंचीं मीसा भारती
इसी मामले में पाटलिपुत्र की राजद सांसद डॉ. मीसा भारती शुक्रवार को सचिवालय थाना पहुंचीं और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की। मीसा भारती ने सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि वह पॉक्सो अधिनियम, 2012 की धारा 23 और किशोर न्याय अधिनियम, 2015 की धारा 74 के तहत प्राथमिकी दर्ज कराने पहुंची थीं, लेकिन थाना प्रभारी ने प्राथमिकी दर्ज करने से मना कर दिया।
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'पीड़िता की पहचान उजागर करना गंभीर विषय'
मीसा भारती ने कहा कि नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर करना कानून के तहत गंभीर विषय है। उन्होंने बिहार पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि जमुई मामले से जुड़े वीडियो साझा करने वालों पर कार्रवाई की जा रही है, जबकि मुख्यमंत्री के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने से पुलिस पीछे हट रही है।
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तेजस्वी यादव ने भी उठाए सवाल
राजद नेता तेजस्वी यादव ने भी मुख्यमंत्री के सोशल मीडिया हैंडल से तस्वीर साझा किए जाने पर सवाल उठाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर हुई और पॉक्सो अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन हुआ।
मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद पोस्ट हुई थी तस्वीर
दरअसल, जमुई मामले की पीड़िता अपने परिवार के साथ मुख्यमंत्री से मिली थी। मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री के एक्स हैंडल से परिवार के साथ तस्वीर और न्याय का भरोसा देने से जुड़ा संदेश पोस्ट किया गया था। विवाद बढ़ने के बाद पोस्ट हटा दी गई।
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मीसा भारती की ओर से प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग किए जाने के बाद पुलिस की कार्रवाई पर सबकी नजर है। फिलहाल इस मामले में तस्वीर साझा किए जाने को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं।