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हमलावर का शव लेने से इनकार क्यों?

Mon, 04 Nov 2013 10:13 AM IST
Updated Mon, 04 Nov 2013 10:13 AM IST
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patna serial blast ainul tariq

मन व्यथित है। चेहरे पर गम साफ झलक रहे हैं। पूरा परिवार आहत है।

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गमों से समझौता करने की मुश्किल और इन सब के बीच एक कठोर फैसला लेने की कशमकश।

पटना में नरेंद्र मोदी की रैली के दौरान हुए बम धमाके में घायल हो गए मामले के सदिंग्ध तारिक उर्फ ऐनुल की मौत के बाद उनके परिवार वालों ने फिलहाल शव लेने से मना किया है।

ये फैसला तारिक के बड़े भाई तौहीद अंसारी ने लिया है और उनके अब्बा अताउल्लाह अंसारी भी इस पर कायम हैं।

तौहीद अंसारी के मुताबिक उनके परिवार ने पुलिस को भी ये जानकारी दे दी है।

तारिक की इलाज के दौरान मौत हो गई थी। वे रांची के सीठियो गांव के रहने वाले थे।

इनकार क्यों?

इस सवाल पर तौहीद अंसारी कहते हैं, "अगर वाकई तारिक इस घटना में शामिल थे तो यह परिवार और देश के साथ धोखा है। पूरा परिवार इस घटना से आहत हैं। बच्चे अनसुलझे सवाल करते हैं। हमारे पास इसके जवाब नहीं होते।"
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"इसलिए यह फैसला लिया गया है कि तारिक की लाश नहीं लेंगे। आगे पुलिस प्रशासन जैसा अच्छा समझे कदम उठाए।"

इस बीच झारखंड पुलिस के प्रवक्ता एडीजी एसएन प्रधान ने कहा है कि तारिक के शव को उनके परिवार को सौंपने के लिए पुलिस बात करेगी। वैसे इस मामले में आगे की कार्रवाई पटना पुलिस को करनी है। पटना पुलिस की सूचना पर ही उनके घर वालों को पत्र सौंपा गया है।
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चारों संदिग्ध सीठियो गांव के हैं। इसी मामले में बम धमाके के ऐन मौके पर सीठियो गांव के ही इम्तियाज पहले ही हिरासत में लिए गए हैं। इसके बाद रांची के मणिटोला से एक अन्य सदिंग्ध उरैज को एनआईए गिरफ्तार कर दिल्ली ले गई है।

उत्तरी छोटानागपुर के उरैज पर आरोप है कि वे इम्तियाज को आर्थिक मदद पहुंचाते थे। पुलिस का कहना है कि दो अन्य संदिग्ध नुमान और तौफीक पटना से फरार होने में सफल रहे हैं। ये दोनों भी सीठियों गांव के रहने वाले हैं।

18 साल की उम्र
तौहीद कहते हैं कि उनकी (तारिक की) उम्र ही क्या थी। दो साल पहले ही मैट्रिक की परीक्षा पास की थी।

पिता अताउल्लाह अंसारी हेवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन के रिटायर कर्मचारी है। उनके पांच बेटे हैं। तारिक सबसे छोटे थे। तौहीद दूसरे नंबर पर हैं।

तौहीद बताते हैं कि तारिक वॉल पेंटिंग का काम करते थे। कभी घर वालों को इसका अहसास नहीं था कि वे किसी संदिग्ध गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं।

जाने से पहले कुछ नहीं बताया था? इस सवाल पर तौहीद बताते हैं कि घर से जाने से पहले उन्होंने कुछ भी नहीं बताया था। घटना के बाद मीडिया में आई खबरों से पता चला कि तारिक बम विस्फोट में घायल हुए हैं।

अब वे शव लेने से मना कर रहे हैं, आगे पुलिस क्या करेगी, इस पर उन्होंने कहा कि यह फैसला पटना पुलिस को लेना है। लेकिन उससे पहले भी उनके परिवार से अंतिम बार पूछताछ कर सहमति ली जाएगी।

'जख्मों को न कुरेदें'
धुर्वा थाना के प्रभारी बीएन सिंह के मुताबिक तारिक की मौत की खबर उनके परिवार को दे गई है। तारिक के पिता, दो भाई, गांव के मुखिया का हस्ताक्षर भी लिए गए हैं।

तौहीद के घर वालों का ये भी कहना है कि रांची पुलिस मौत की बाबत सूचना पर हस्ताक्षर कराने आई थी। पटना की पुलिस ने भी फोन पर बात की थी।

लेकिन पुलिस को घायल या उनके शव की तस्वीर भी देनी चाहिए थी। पहले हम देखते-जानते, कि वाकई वे कौन हैं?

आपलोग पटना जाकर शव की शिनाख्त तो कर सकते हैं? यह पूछने पर तौहीद कहते हैं, "जख्मों को ज्यादा मत कुरेदें। फैसला पूरे परिवार का है।"

इस घटना ने पूरे परिवार को झकझोर दिया है। उन्होंने अपनी तस्वीर देने से भी मना किया। कहा जो दाग लगे हैं, उसमें उनकी तस्वीर सामने आने से नहीं मिट सकते।

'दहशतगर्दी मंजूर नहीं'

सीठियो गांव की जिंदगी धीरे-धीरे समान्य हो रही है। गांव के बच्चे गलियों में खेलते- कूदते नजर आए। बच्चे स्कूल-कॉलेज भी आने-जाने लगे हैं। बड़े-बुर्जुगों का मन अब भी मथता है।

गली, चौपाल, नुक्कड़ों पर सीठियो गांव पर लगे कथित आरोपों की चर्चा होती हैं। शुक्रवार को गांव के लोगों की इकट्ठे बैठक भी हुई थी।

इसमें फैसले लिए गए कि गांव पर आगे इस तरह की कोई आंच नहीं आए।

अंसारी महापंचायत के रांची जिला अध्यक्ष मोहम्मद ओवेश आजाद कहते हैं, "दहशतगर्दी हमें मंजूर नहीं। इस्लाम भी इसकी इजाजत नहीं देता। पूरा गांव इस घटना से दुखी है।"


महबूब आलम के मुताबिक पहले पुलिस की गाड़ियां इस गांव में कभी-कभार ही आती थीं। छह दिनों से यह आलम है कि सीठियो गांव हतप्रभ है।

गांव के बुजुर्ग सवासत अंसारी के मुताबिक अस्सी की दहलीज पर हैं। वे कहते हैं, "यकीन नहीं होता कि 17-18 साल के लड़के ऐसे कथित तौर पर गंभीर मामले में शामिल हो गए हैं। परिस्थितियां ऐसी है कि हकीकत की पड़ताल करने की जरूरत है।"

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