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झारखंड: एक करोड़ का इनामी नक्सली असीम मंडल अब भी फरार, 35 किमी के जंगल में महीनेभर से पुलिस-कोबरा का ऑपरेशन
Wed, 26 Aug 2026 08:32 PM IST
तरुणेंद्र कुमार चतुर्वेदी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची/घाटशिला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची/घाटशिला
Published by: तरुणेंद्र कुमार चतुर्वेदी
Updated Wed, 26 Aug 2026 08:32 PM IST
सार
झारखंड-पश्चिम बंगाल सीमा पर एक करोड़ रुपये के इनामी नक्सली असीम मंडल की तलाश में एक महीने से अधिक समय से सघन अभियान चल रहा है। दलमा से घाटशिला तक करीब 30-35 किलोमीटर के दुर्गम इलाके में पुलिस और कोबरा जवानों की तलाशी के बावजूद उसका अब तक कोई सुराग नहीं मिला है।
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तलाश टीमें। फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
झारखंड-पश्चिम बंगाल सीमा पर एक महीने से अधिक समय से जारी व्यापक सघन अभियान के बावजूद एक करोड़ रुपये का इनामी शीर्ष नक्सली असीम मंडल पुलिस की पकड़ से बाहर है। दलमा से लेकर घाटशिला तक फैले 30-35 किलोमीटर के दुर्गम बीहड़ क्षेत्र में पुलिस तथा कोबरा बटालियन की कई टुकड़ियां लगातार खोजबीन कर रही हैं। इसके बाद भी संशय है कि नक्सली कमांडर जंगलों में छिपा बैठा है। सुरक्षा बलों को चकमा देकर किसी अन्य स्थान पर भाग निकला है।
सारंडा के जंगलों से भागकर असीम मंडल अपने दल-बल के साथ दलमा और फिर घाटशिला के क्षेत्रों की तरफ बढ़ा था। सुरक्षा बलों को झाटीझरना के लखाईसीनी और तत्पश्चात सुखना पहाड़ी पर उसके डेरा जमाने की सूचनाएं मिलीं थीं। इस आधार पर कोबरा बटालियन के जवानों ने पहाड़ियों की सख्त घेराबंदी करके सघन तलाशी अभियान शुरू किया।
घर-घर जाकर ली तलाशी
सुरक्षा बलों ने नक्सली असीम मंडल की उपस्थिति की आशंका में गुड़ाझोर तथा मिर्गीटांड़ सहित कई बीहड़ गांवों में घर-घर जाकर तलाशी ली। पुलिस अधिकारियों को संदेह था कि नक्सली नेता किसी ग्रामीण के घर में शरण लेकर छिपा हो सकता है। हालांकि, इन बीहड़ बस्तियों और पहाड़ियों में न तो सुरक्षा बलों का नक्सलियों से कोई आमना-सामना हुआ और न ही असीम का कोई सुराग मिला। अब भी केशरपुर, भोमराडीह एवं कालिचती समेत विभिन्न संवेदनशील स्थलों पर बनाए गए सुरक्षा पिकेटों में कोबरा के जवान मुस्तैद हैं तथा समय-समय पर अभियान चला रहे हैं।
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गिरोह के तीन नक्सल पुलिस की गिरफ्त में
इस बड़े अभियान के दौरान सुरक्षा बलों को महत्वपूर्ण सफलता जरूर मिली।पुलिस ने दलमा के तराई इलाके से असीम मंडल के गिरोह से जुड़े तीन नक्सलियों मदन महतो, सागर सिंह और मीना को गिरफ्तार कर उनसे हथियार बरामद किए। इसके बावजूद नक्सली असीम मंडल, उसका साथी सचिन उर्फ राम प्रसाद मार्डी, उसकी नक्सली पत्नी मीता, बुलू, समीर उर्फ मंगल महतो तथा मालती मुर्मू अब भी पुलिस की पहुंच से दूर हैं।
ये भी पढ़ें- नेपाल में बाढ़ से तबाही: अबतक 95 शव बरामद, 500 लापता; कैलाश यात्रियों पर भी संकट, भारत सरकार ने भेजी मदद
सरेंडर नक्सली से भी नहीं मिली सफलता
सुरक्षा बलों ने पश्चिम बंगाल में 25 जनवरी, 2017 को आत्मसमर्पण करने वाले रंजीत पाल उर्फ राहुल की भी सहायता ली। पूर्व सांसद सुनील महतो हत्याकांड का मुख्य शूटर रहा राहुल वर्षों तक इस बीहड़ क्षेत्र में सक्रिय रहा था और भौगोलिक स्थिति से भली-भांति परिचित था। पुलिस बल राहुल को लेकर जंगलों के भीतर तक दाखिल हुए, किंतु कोई ठोस सफलता हाथ नहीं लगी।
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सारंडा के जंगलों से भागकर असीम मंडल अपने दल-बल के साथ दलमा और फिर घाटशिला के क्षेत्रों की तरफ बढ़ा था। सुरक्षा बलों को झाटीझरना के लखाईसीनी और तत्पश्चात सुखना पहाड़ी पर उसके डेरा जमाने की सूचनाएं मिलीं थीं। इस आधार पर कोबरा बटालियन के जवानों ने पहाड़ियों की सख्त घेराबंदी करके सघन तलाशी अभियान शुरू किया।
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घर-घर जाकर ली तलाशी
सुरक्षा बलों ने नक्सली असीम मंडल की उपस्थिति की आशंका में गुड़ाझोर तथा मिर्गीटांड़ सहित कई बीहड़ गांवों में घर-घर जाकर तलाशी ली। पुलिस अधिकारियों को संदेह था कि नक्सली नेता किसी ग्रामीण के घर में शरण लेकर छिपा हो सकता है। हालांकि, इन बीहड़ बस्तियों और पहाड़ियों में न तो सुरक्षा बलों का नक्सलियों से कोई आमना-सामना हुआ और न ही असीम का कोई सुराग मिला। अब भी केशरपुर, भोमराडीह एवं कालिचती समेत विभिन्न संवेदनशील स्थलों पर बनाए गए सुरक्षा पिकेटों में कोबरा के जवान मुस्तैद हैं तथा समय-समय पर अभियान चला रहे हैं।
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गिरोह के तीन नक्सल पुलिस की गिरफ्त में
इस बड़े अभियान के दौरान सुरक्षा बलों को महत्वपूर्ण सफलता जरूर मिली।पुलिस ने दलमा के तराई इलाके से असीम मंडल के गिरोह से जुड़े तीन नक्सलियों मदन महतो, सागर सिंह और मीना को गिरफ्तार कर उनसे हथियार बरामद किए। इसके बावजूद नक्सली असीम मंडल, उसका साथी सचिन उर्फ राम प्रसाद मार्डी, उसकी नक्सली पत्नी मीता, बुलू, समीर उर्फ मंगल महतो तथा मालती मुर्मू अब भी पुलिस की पहुंच से दूर हैं।
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सरेंडर नक्सली से भी नहीं मिली सफलता
सुरक्षा बलों ने पश्चिम बंगाल में 25 जनवरी, 2017 को आत्मसमर्पण करने वाले रंजीत पाल उर्फ राहुल की भी सहायता ली। पूर्व सांसद सुनील महतो हत्याकांड का मुख्य शूटर रहा राहुल वर्षों तक इस बीहड़ क्षेत्र में सक्रिय रहा था और भौगोलिक स्थिति से भली-भांति परिचित था। पुलिस बल राहुल को लेकर जंगलों के भीतर तक दाखिल हुए, किंतु कोई ठोस सफलता हाथ नहीं लगी।