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निभाया कर्तव्य: सड़क दुर्घटना में घायल शख्स की दो जजों ने की मदद, अस्पताल लेकर पहुंचे

Sun, 08 Aug 2021 12:33 AM IST
Kuldeep Singh पीटीआई, साहिबगंज
पीटीआई, साहिबगंज Published by: Kuldeep Singh Updated Sun, 08 Aug 2021 12:33 AM IST
सार

  • दोनों जज घायल के पास पहुंचे और ई-रिक्शा से नजदीकी अस्पताल में पहुंचाया
  • सिविल जज मनोरंजन कुमार ने कहा, एक जरूरतमंद व्यक्ति की मदद करना मानव जाति के प्रति कर्तव्य है

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Jharkhand: Two judges of the district court helped in taking the road accident victim to the hospital
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

झारखंड के साहिबगंज जिले में सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल एक व्यक्ति को समय पर अस्पताल पहुंचाने में जिला अदालत के दो जजों ने मदद की। दीवानी जजों मनोरंजन कुमार और रेलवे न्यायिक दंडाधिकारी तारकेश्वर दास शुक्रवार की देर शाम सैर करने निकले थे, जब उन्होंने सड़क किनारे खाई में एक दुर्घटना में घायल एक युवक को बुरी हालत में पड़ा देखा।

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हालांकि दुर्घटनास्थल पर बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए थे, लेकिन किसी ने भी दुर्घटना में घायल हुए सूरज कुमार की मदद नहीं की। दोनों जज घायल के पास पहुंचे और उन्हें ई-रिक्शा से नजदीकी अस्पताल ले गए। उनका इलाज तुरंत शुरू हो यह सुनिश्चित करने के लिए वे काफी समय तक अस्पताल में रहे।
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सिविल जज मनोरंजन कुमार ने घटना के बारे में बात करते हुए मीडिया को बताया कि एक जरूरतमंद व्यक्ति की मदद करना मानव जाति के प्रति कर्तव्य है। हम खून से लथपथ आदमी की मदद करके संतुष्ट महसूस कर रहे थे। हालांकि कई लोग मौके पर जमा हो गए थे लेकिन कोई भी उसकी मदद के लिए आगे नहीं आया। हम दोनों ने उस आदमी की जान बचाने के लिए समय पर मदद करने में समय बर्बाद नहीं किया।
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साथी कानूनी अधिकारियों के कृत्य की सराहना करते हुए, प्रधान जिला और सत्र अदालत के न्यायाधीश बंसीधर तिवारी ने कहा कि वह हमेशा लोगों से कहते हैं कि संकट के ऐसे समय में लोगों तक पहुंचें।

उन्होंने कहा कि आम तौर पर लोग ऐसे मौकों पर दूर रहते हैं ताकि उन्हें पुलिस द्वारा गवाह के रूप में काम करने के लिए परेशान न किया जाए। लेकिन मालूम हो कि कानून ऐसे व्यक्ति की पहचान की रक्षा के लिए और जांच के नाम पर पुलिस द्वारा किसी भी उत्पीड़न के खिलाफ पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करता है।


तिवारी ने कहा कि बहुत से लोग कहते हैं कि धनबाद के जज उत्तम आनंद को 28 जुलाई की सुबह एक भारी ऑटोरिक्शा की चपेट में आने के बाद किसी ने समय पर अस्पताल ले जाया होता तो वह बच सकता था।

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