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झारखंडः नक्सली कमांडर ने किया सरेंडर, मिलेगा 25 लाख का ईनाम
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 15 Jul 2016 12:20 PM IST
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झारखंड में नक्सलियों को मुख्यधारा में लाने का प्रयास कर रहे सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता मिली है। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार राज्य के मोस्ट वांटेड और बिहार झारखंड नार्थ छोटानागपुर एरिया कमेटी के प्रमुख सदस्य बड़ा विकास उर्फ बालेश्वर ओरोन ने पुलिस के सामने आत्मसर्पण कर दिया।
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इस आत्मसमर्पण के साथ ही नक्सली कमांडर की लॉटरी भी लग गई है, राज्य सरकार की नीति के तहत उसे 25 लाख का ईनाम दिया जाएगा। इसके अलावा उसे सामान्य जीवन जीने के लिए राज्य सरकार की ओर से तमाम सुविधाएं भी मुहैया कराई जाएंगी।
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पुलिस के अनुसार ऐसे समय में जब एक महीने में दो कोबरा जवानों की हत्या कर दी गई हो तब नक्सली कमांडर का आत्मसमर्पण करना थोड़ा राहत भरा कदम हो सकता है। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार इतने बड़े नक्सली कमांडर के आत्मसमर्पण करने से अन्य नक्सलियों को भी प्रेरणा देगा।
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वहीं लातेहर का रहने वाला विकास पहली बार सावर्जनिक रूप से सामने आया है। दशकभर तक नक्सली गतिविधि में रहने वाले विकास ने इस दौरान कई पुलिसवालों की हत्या की। उसका गतिविधियों और सक्रियता का केंद्र ज्यादातर उत्तरी छत्तीसगढ़ के लातेहर और गढ़वा जिले रहते थे।
संदेह भी पैदा कर रहा नक्सली का यह आत्मसमर्पण
उसके आत्मसमर्पण में अहम भूमिका निभाने वाले लातेहर के एसपी अनूप बिरथरी ने बताया कि उसके खिलाफ झारखंड में 54 और छत्तीसगढ़ में 22 मामले दर्ज हैं। वह झारखंड के शीर्ष नक्सली नेता देव कुमार धान उर्फ अरविंदजी का दायां हाथ था।
झारखंड के डीजीपी ने दावा किया कि नक्सली आत्मसमर्पण अभियान से प्रेरित होकर उसने हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है और यह पुलिस के लिए एक बड़ी कामयाबी है। इसके तहत राज्य सरकार नकद धनराशि, कानूनी मदद, जमीन, शिक्षा और नक्सलियों के बच्चों के बेहतर भविष्य की व्यवस्था कर रही है।
हालांकि नक्सली का यह आत्मसमर्पण कुछ संदेह भी पैदा करता है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जिस समय विकास ने आत्मसमर्पण किया उस दौरान उसने काले रंग की नई ड्रेस पहनी हुई थी। आमतौर पर नक्सली सरेंडर के दौरान पुरानी ड्रेस ही पहने हुए होते हैं।
वहीं विकास ने .303 रायफल के साथ आत्मसमर्पण किया जबकि आमतौर पर शीर्ष नक्सली कमांडर इस तरह हल्की रायफल का प्रयोग नहीं करते हैं। हालांकि एक पुलिस अधिकारी का दावा था कि यह पूरी तरह वास्तविक और प्रमाणिक आत्मसमर्पण है। हालांकि यह सवाल इसलिए भी उठता है कि पूर्व में कई नक्सली कमांडरों का समर्पण फर्जी साबित हो चुका है।
झारखंड के डीजीपी ने दावा किया कि नक्सली आत्मसमर्पण अभियान से प्रेरित होकर उसने हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है और यह पुलिस के लिए एक बड़ी कामयाबी है। इसके तहत राज्य सरकार नकद धनराशि, कानूनी मदद, जमीन, शिक्षा और नक्सलियों के बच्चों के बेहतर भविष्य की व्यवस्था कर रही है।
हालांकि नक्सली का यह आत्मसमर्पण कुछ संदेह भी पैदा करता है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जिस समय विकास ने आत्मसमर्पण किया उस दौरान उसने काले रंग की नई ड्रेस पहनी हुई थी। आमतौर पर नक्सली सरेंडर के दौरान पुरानी ड्रेस ही पहने हुए होते हैं।
वहीं विकास ने .303 रायफल के साथ आत्मसमर्पण किया जबकि आमतौर पर शीर्ष नक्सली कमांडर इस तरह हल्की रायफल का प्रयोग नहीं करते हैं। हालांकि एक पुलिस अधिकारी का दावा था कि यह पूरी तरह वास्तविक और प्रमाणिक आत्मसमर्पण है। हालांकि यह सवाल इसलिए भी उठता है कि पूर्व में कई नक्सली कमांडरों का समर्पण फर्जी साबित हो चुका है।