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झारखंड : रांची में मतदाता पंजीकरण पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ, 58 शोध-पत्रों पर होगा मंथन
Wed, 02 Sep 2026 09:47 PM IST
हिमांशु सिंह बघेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
Published by: हिमांशु सिंह बघेल
Updated Wed, 02 Sep 2026 09:47 PM IST
सार
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड मंत्रालय में नगर विकास एवं आवास विभाग और पथ निर्माण विभाग के कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने योजनाओं की प्रगति का जायजा लेते हुए अधिकारियों को विकास कार्यों का प्रभावी क्रियान्वयन, गुणवत्तापूर्ण काम और तय समय सीमा में परियोजनाएं पूरी करने के निर्देश दिए।
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केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड के सहयोग से दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
झारखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय ने केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड के सहयोग से दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया। यह सम्मेलन बुधवार, 2 सितंबर 2026 को नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडी एंड रिसर्च इन लॉ (NUSRL), रांची में शुरू हुआ। इसका उद्देश्य मतदाता पंजीकरण और सूची प्रबंधन पर व्यापक राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में विचार-विमर्श करना है। भारत निर्वाचन आयोग के प्रधान सचिव अरविंद आनंद मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने कहा कि निर्वाचन प्रबंधन के व्यावहारिक अनुभव और अकादमिक शोध मतदाता सूची को अधिक समावेशी बनाएंगे।
सम्मेलन के लिए 800 से अधिक विश्वविद्यालयों से संपर्क किया गया, जिसके फलस्वरूप 230 सार प्राप्त हुए। इनमें से 58 शोध-पत्रों का प्रकाशन और विचार-विमर्श के लिए चयन हुआ। उन्होंने विभिन्न देशों में प्रचलित सक्रिय, स्वचालित और हाइब्रिड मतदाता पंजीकरण प्रणालियों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत में मजबूत सांविधानिक ढांचा, क्षेत्रीय सत्यापन और राजनीतिक दलों की सक्रिय भागीदारी है। इसका लक्ष्य शुद्ध, समावेशी और पारदर्शी मतदाता सूची सुनिश्चित करना है। भारत तकनीक और आंकड़ा-आधारित सत्यापन का उपयोग कर रहा है। यह सम्मेलन विद्वानों और विशेषज्ञों को अंतरराष्ट्रीय अनुभवों से सीखने का मंच प्रदान करता है।
विशेषज्ञों ने मतदाता सूची को लेकर रखे विचार
एनयूएसआरएल के कुलपति अशोक आर. पाटिल ने मतदाता सूची को लोकतांत्रिक सहभागिता का प्रवेश द्वार बताया। उन्होंने विश्वसनीय चुनाव के लिए शुद्ध, समावेशी और नियमित रूप से अद्यतन मतदाता सूची की आवश्यकता पर बल दिया। पाटिल ने फर्जी या अपात्र पंजीकरण को रोकने पर भी जोर दिया। सेंट जेवियर्स कॉलेज के प्राचार्य रॉबर्ट प्रदीप कुजूर ने शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका रेखांकित की। उन्होंने युवा मतदाताओं, प्रवासियों और वंचित समुदायों की निर्वाचन प्रक्रिया में भागीदारी सुनिश्चित करने को महत्वपूर्ण बताया।
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ये भी पढ़ें- झारखंड में स्वाइन फ्लू का दायरा बढ़ा: 38 से ज्यादा संक्रमित; रिम्स में 36 सैंपल की जांच में 12 पॉजिटिव
तकनीकी सत्रों में चुनाव प्रबंधन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा
सम्मेलन के पहले दिन एक पैनल चर्चा और छह तकनीकी सत्र आयोजित हुए। इन सत्रों में नागरिकता, वैश्विक अनुभव, तकनीक, जागरूकता, लैंगिक और प्रवासी मुद्दों पर शोध-पत्र प्रस्तुत किए गए। केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड के कुलपति सारंग मेधेकर ने अकादमिक शोध और निर्वाचन प्रबंधन के अनुभवों के प्रभावी समन्वय की सराहना की। अपर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी सुबोध कुमार ने शुद्ध, समावेशी और पारदर्शी मतदाता सूची को मजबूत लोकतंत्र की बुनियाद बताया। उन्होंने झारखंड में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण का भी उल्लेख किया।
हेमन्त सोरेन ने नगर विकास और पथ निर्माण की समीक्षा की
मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने बुधवार को झारखंड मंत्रालय में एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस दौरान उन्होंने नगर विकास एवं आवास विभाग तथा पथ निर्माण विभाग के कार्यों की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने दोनों विभागों की संचालित योजनाओं और परियोजनाओं की जानकारी ली। उन्होंने विकास योजनाओं की प्रगति और कार्यान्वयन की स्थिति का जायजा लिया। हेमन्त सोरेन ने अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। इन निर्देशों में योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना शामिल था। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध तरीके से काम पूरा करने पर जोर दिया। यह समीक्षा बैठक राज्य में विकास कार्यों की गति बढ़ाने के उद्देश्य से की गई। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे तय समय सीमा में लक्ष्य हासिल करें।
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सम्मेलन के लिए 800 से अधिक विश्वविद्यालयों से संपर्क किया गया, जिसके फलस्वरूप 230 सार प्राप्त हुए। इनमें से 58 शोध-पत्रों का प्रकाशन और विचार-विमर्श के लिए चयन हुआ। उन्होंने विभिन्न देशों में प्रचलित सक्रिय, स्वचालित और हाइब्रिड मतदाता पंजीकरण प्रणालियों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत में मजबूत सांविधानिक ढांचा, क्षेत्रीय सत्यापन और राजनीतिक दलों की सक्रिय भागीदारी है। इसका लक्ष्य शुद्ध, समावेशी और पारदर्शी मतदाता सूची सुनिश्चित करना है। भारत तकनीक और आंकड़ा-आधारित सत्यापन का उपयोग कर रहा है। यह सम्मेलन विद्वानों और विशेषज्ञों को अंतरराष्ट्रीय अनुभवों से सीखने का मंच प्रदान करता है।
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विशेषज्ञों ने मतदाता सूची को लेकर रखे विचार
एनयूएसआरएल के कुलपति अशोक आर. पाटिल ने मतदाता सूची को लोकतांत्रिक सहभागिता का प्रवेश द्वार बताया। उन्होंने विश्वसनीय चुनाव के लिए शुद्ध, समावेशी और नियमित रूप से अद्यतन मतदाता सूची की आवश्यकता पर बल दिया। पाटिल ने फर्जी या अपात्र पंजीकरण को रोकने पर भी जोर दिया। सेंट जेवियर्स कॉलेज के प्राचार्य रॉबर्ट प्रदीप कुजूर ने शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका रेखांकित की। उन्होंने युवा मतदाताओं, प्रवासियों और वंचित समुदायों की निर्वाचन प्रक्रिया में भागीदारी सुनिश्चित करने को महत्वपूर्ण बताया।
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तकनीकी सत्रों में चुनाव प्रबंधन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा
सम्मेलन के पहले दिन एक पैनल चर्चा और छह तकनीकी सत्र आयोजित हुए। इन सत्रों में नागरिकता, वैश्विक अनुभव, तकनीक, जागरूकता, लैंगिक और प्रवासी मुद्दों पर शोध-पत्र प्रस्तुत किए गए। केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड के कुलपति सारंग मेधेकर ने अकादमिक शोध और निर्वाचन प्रबंधन के अनुभवों के प्रभावी समन्वय की सराहना की। अपर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी सुबोध कुमार ने शुद्ध, समावेशी और पारदर्शी मतदाता सूची को मजबूत लोकतंत्र की बुनियाद बताया। उन्होंने झारखंड में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण का भी उल्लेख किया।
हेमन्त सोरेन ने नगर विकास और पथ निर्माण की समीक्षा की
मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने बुधवार को झारखंड मंत्रालय में एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस दौरान उन्होंने नगर विकास एवं आवास विभाग तथा पथ निर्माण विभाग के कार्यों की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने दोनों विभागों की संचालित योजनाओं और परियोजनाओं की जानकारी ली। उन्होंने विकास योजनाओं की प्रगति और कार्यान्वयन की स्थिति का जायजा लिया। हेमन्त सोरेन ने अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। इन निर्देशों में योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना शामिल था। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध तरीके से काम पूरा करने पर जोर दिया। यह समीक्षा बैठक राज्य में विकास कार्यों की गति बढ़ाने के उद्देश्य से की गई। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे तय समय सीमा में लक्ष्य हासिल करें।