फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jharkhand ›   Jharkhand Elephant Deaths: Shrinking Forests and Human Interference Threaten State Animal’s Survival

Jharkhand: हाथियों की दर्दनाक मौतें, अस्तित्व पर संकट; घटते जंगल और मानवीय हस्तक्षेप से राजकीय पशु पर खतरा

Sat, 27 Dec 2025 05:20 AM IST
शिवम गर्ग अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली/रांची
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली/रांची Published by: शिवम गर्ग Updated Sat, 27 Dec 2025 05:20 AM IST
सार

झारखंड में हाथियों की लगातार हो रही मौतें गंभीर चिंता का विषय बन गई हैं। खनन, बिजली लाइन, रेल परियोजनाएं और जंगलों का कटाव मानव-हाथी संघर्ष को बढ़ा रहा है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट...

विज्ञापन
Jharkhand Elephant Deaths: Shrinking Forests and Human Interference Threaten State Animal’s Survival
हाथी (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : freepik

विस्तार

खनन, सड़क-रेल परियोजनाओं, बिजली लाइनों और जंगलों के तेजी से खंडित होते भूगोल के बीच झारखंड में मानव-हाथी संघर्ष अब केवल वन्यजीव संरक्षण का नहीं, बल्कि सामाजिक, पारिस्थितिक और मानवीय संकट का रूप ले चुका है। राज्य के कोल्हान और सारंडा अंचल से लेकर रांची, पूर्वी सिंहभूम और सरायकेला तक हाथियों की तड़प-तड़प कर हो रही मौतें यह सवाल खड़ा कर रही हैं कि क्या विकास की दौड़ में झारखंड अपने राजकीय पशु को खोने की कगार पर खड़ा है।

विज्ञापन


भारतीय वन्यजीव संस्थान और भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की प्रोजेक्ट एलीफेंट के अध्ययन के मुताबिक वर्ष 2000 से 2023 के बीच झारखंड में कुल 225 हाथियों की मौत दर्ज की गई। इनमें 152 मौतें प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से मानव-जनित कारणों से हुईं, जबकि 73 मौतें प्राकृतिक कारणों से बताई गईं। इसी अवधि में हाथियों के हमलों में 1,340 लोगों की जान गई और लगभग 400 लोग घायल हुए। यह स्पष्ट करता है कि यह संघर्ष केवल वन्यजीवों तक सीमित नहीं, बल्कि ग्रामीण और आदिवासी समाज के लिए भी गंभीर सामाजिक-आर्थिक चुनौती बन चुका है।
विज्ञापन


ये भी पढ़ें:- क्रिसमस जश्न के दौरान हिंसा, होटल के बाहर झगड़े में युवक की मौत; एक गंभीर घायल
विज्ञापन
विज्ञापन


विस्फोट, करंट और ट्रेनें मौत के नए चेहरे
हालिया महीनों में हाथियों की एक के बाद एक मौत ने सबको झकझोर दिया। सारंडा के जंगलों में माओवादियों की बिछाई आईईडी विस्फोट से तीन हाथियों की मौत हुई। इसके अलावा 23 वर्षों में 67 हाथियों की मौत बिजली के झटके से, 17 की ट्रेन दुर्घटनाओं में, 11 की जहर से, 4 की शिकार से, 1 की लैंडमाइन विस्फोट से और कई की अन्य आकस्मिक कारणों से हुई।

एक साल में कई जानें गईं
नवंबर 2023 में सिंहभूम के मुसाबनी के बेनियासाई गांव में बिजली के करंट से पांच हाथियों की मौत हो गई थी, जिनमें दो बच्चे थे। वर्ष 2024-25 में 15 हाथियों की मौत दर्ज की गई, जबकि वर्ष 2025 में अब तक कम से कम 16 हाथियों की मौत हो चुकी है। दूसरी ओर, 2021 से मार्च 2025 के बीच हाथियों के हमलों में 397 लोगों की जान गई है। यह संतुलन के पूरी तरह बिगड़ जाने का संकेत है।

अन्य वीडियो:-

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed