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Jharkhand: सीएम सोरेन बोले- नई अधिवास नीति के लिए 1932 के भूमि अभिलेखों का निर्णय लोगों द्वारा सराहा जा रहा
Wed, 21 Sep 2022 08:50 AM IST
देव कश्यप
पीटीआई, रांची।
पीटीआई, रांची।
Published by: देव कश्यप
Updated Wed, 21 Sep 2022 08:50 AM IST
सार
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि उनकी सरकार राज्य की उलझी हुई व्यवस्था को सुलझाने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि आज हमारी सरकार यहां के आदिवासियों और मूल निवासियों को छोटा नागपुर काश्तकारी (सीएनटी) अधिनियम (Tenancy Act) और 1932 खतियान जैसे कानूनों के साथ सुरक्षा कवच प्रदान करने के लिए भी काम कर रही है।
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साहिबगंज में जनसभा को संबोधित करते सीएम हेमंत सोरेन।
- फोटो : Twitter@HemantSorenJMM
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विस्तार
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दावा किया कि राज्य के 'स्थानीय निवासियों' को परिभाषित करने के लिए 1932 के भूमि रिकॉर्ड का उपयोग करने के उनकी सरकार के फैसले का लोगों ने व्यापक रूप से स्वागत किया है, और यह स्वदेशी समुदायों के अधिकारों की रक्षा करने में एक लंबा रास्ता तय करेगा। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार द्वारा लायी गई नई अधिवास नीति (Domicile Policy) से आम जनता खुश है।
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बता दें कि झारखंड मंत्रिमंडल ने इस महीने की शुरुआत में कई आदिवासी समुदायों की मांगों के बीच, स्थानीय निवासियों को निर्धारित करने के लिए अंग्रेजों द्वारा 1932 में किए गए भूमि सर्वेक्षण के रिकॉर्ड का उपयोग करने के प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दे दी थी।
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नई डोमिसाइल पॉलिसी का लोग विरोध नहीं करेंगे: सीएम
सोरेन ने मंगलवार को साहिबगंज जिले के बरहेट में एक रैली को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य के लोग 'स्थानीय निवासी' को परिभाषित करने के लिए 1932 के खतियान को निर्धारण कारक के रूप में इस्तेमाल करने के निर्णय से खुश हैं ... डोमिसाइल पॉलिसी इस तरह से तैयार की जा रही है कि लोग इसका विरोध नहीं करेंगे, जैसा कि पिछली अन्य सरकारों के शासन के दौरान हुआ था। उन्होंने कहा कि जहां राज्य में स्थानीय नीति को लेकर पूर्व की सरकारों में जनता विरोध-प्रदर्शन करती थी वहीं आज जनमानस इसे खुशी-खुशी अपना रहा है।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार राज्य की उलझी हुई व्यवस्था को सुलझाने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि आज हमारी सरकार यहां के आदिवासियों और मूल निवासियों को छोटा नागपुर काश्तकारी (सीएनटी) अधिनियम (Tenancy Act) और 1932 खतियान जैसे कानूनों के साथ सुरक्षा कवच प्रदान करने के लिए भी काम कर रही है। हालांकि, राज्य के कुछ हिस्सों में इस फैसले के खिलाफ छिटपुट विरोध-प्रदर्शन देखा गया है।
विरोध-प्रदर्शन करने पर छह लोगों को नोटिस
यह मानते हुए कि विरोध-प्रदर्शन से शांति भंग हो सकती है, रांची एसडीओ की अदालत ने सोमवार को छह लोगों को नोटिस जारी किया था, उन्हें अपने सामने पेश होने के लिए कहा था। इसके बाद उनलोगों ने अदालत से अनुरोध किया कि उन्हें जवाब दाखिल करने के लिए 22 सितंबर तक का समय दिया जाए, जिसे स्वीकार कर लिया गया।
375 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन
सीएम सोरेन ने अपने दौरे के दौरान गोड्डा और साहिबगंज जिलों में करीब 375 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि झारखंड में सूखे जैसी स्थिति में किसानों को आवश्यक राहत देने की तैयारी की जा रही है। सीएम ने गोड्डा में एक अन्य कार्यक्रम में बोलते हुए कहा कि सभी विभागों में रिक्त पदों को जल्द ही भरा जाएगा। इस दौरान सोरेन ने 5,625 लाभार्थियों के बीच 27.01 करोड़ रुपये की संपत्ति का वितरण किया।
छोटा नागपुर काश्तकारी (सीएनटी) अधिनियम क्या है?
छोटा नागपुर काश्तकारी अधिनियम, 1908, एक भूमि अधिकार कानून है जो अंग्रेजों द्वारा स्थापित झारखंड की आदिवासी आबादी के भूमि अधिकारों की रक्षा के लिए बनाया गया था। सीएनटी अधिनियम की एक प्रमुख विशेषता यह है कि यह सामुदायिक स्वामित्व सुनिश्चित करने के लिए गैर-आदिवासियों को भूमि के हस्तांतरण पर रोक लगाता है। उत्तरी छोटा नागपुर, दक्षिण छोटा नागपुर और पलामू संभाग के क्षेत्र सीएनटी अधिनियम के अधिकार क्षेत्र में शामिल हैं। 1908 का छोटा नागपुर काश्तकारी अधिनियम बिरसा आंदोलन की प्रतिक्रिया के रूप में आया था। सीएनटी अधिनियम को संविधान की 9वीं अनुसूची में सूचीबद्ध किया गया है। इसलिए, यह न्यायिक समीक्षा से परे है।