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झारखंड: डरबन में भारत की आवाज बना बालश्रम से बचाया गया बड़कू, जानें क्या है पूरा मामला?

Wed, 18 May 2022 08:55 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची/नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची/नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Wed, 18 May 2022 08:55 PM IST
सार

दरअसल, पहली बार बाल श्रम के खिलाफ वैश्विक सम्मेलन अफ्रीका में आयोजित किया जा रहा है। इससे पहले सम्मेलन ब्यूनस आयर्स (2017), ब्रासीलिया (2013), द हेग (2010) और ओस्लो (1997) में आयोजित हो चुका है।

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Jharkhand: Badku Marandi rescued from child labor became the voice of India in Durban know what is the whole matter
बाल श्रम (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : पिक्साबे

विस्तार

झारखंड के गिरीडीह जिले में अभ्रक की खदान में बालश्रम से बचाए गए बड़कू मरांडी (21) ने लंबा सफर तय किया है। वह अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) की दक्षिण अफ्रीका के डरबन में आयोजित अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहा है। बाल श्रम उन्मूलन के लिए आईएलओ और दक्षिण अफ्रीका सरकार के 15 से 20 मई तक चल रहे इस कार्यक्रम में बड़कू भारत के चार प्रतिनिधियों में शामिल है।

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अब 11वीं कक्षा के विद्यार्थी गिरीडीह जिले के तीसरी ब्लॉक में कनिचिहार गांव निवासी बड़कू ने फोन पर बताया, मैं पांच साल का था, तभी पिता चल बसे। मां राजीना किशकू और मैं अभ्रक की खदान में काम कर जिंदगी गुजराने लगे। वर्ष 2012 में भारी बारिश के कारण खदान धंस गई और मुझे मलबे से बचाया गया। 
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उसका दोस्त इस हादसे में जान गंवा बैठा। वह किसी तरह बच गया, लेकिन एक आंख की रोशनी चली गई। 2013 में कैलाश सत्यार्थी बाल फाउंडेशन ने कनिचिहार को बाल मित्र गांव (बीएमजी) चुना और मुझे स्कूल में भर्ती कराया। अपने गांव में मैट्रिक पास करने वाला मैं पहला व्यक्ति बना। वह बाल पंचायत का अध्यक्ष भी चुना गया। कॉन्फ्रेंस में राजस्थान से तारा बंजारा, अमर लाल, राजेश जाटव भी गए हैं। इसमें 4000 प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। 
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दरअसल, पहली बार बाल श्रम के खिलाफ वैश्विक सम्मेलन अफ्रीका में आयोजित किया जा रहा है। रिपोर्ट्स की मानें तो यहां बाल श्रमिकों की संख्या सबसे अधिक है। इससे पहले सम्मेलन ब्यूनस आयर्स (2017), ब्रासीलिया (2013), द हेग (2010) और ओस्लो (1997) में आयोजित हो चुका है।

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