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जमशेदपुर से खत्म होगा टाटा का 99 साल पुराना कब्जा! सुप्रीम कोर्ट ने 8 हफ्तों में मांगा जवाब

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 14 Jul 2018 04:47 PM IST
Jamshedpur will end Tata 99 year old lease !, Supreme Court seeks response in 8 weeks
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सुप्रीम कोर्ट ने बीते शुक्रवार को एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान झारखंड सरकार को नोटिस जारी किया है। इस जनहित याचिका में मांग की गई है कि जमशेदपुर शहर को टाटा के नियंत्रण से मुक्त करवाकर एक चुनी हुई संस्था को सौंपना चाहिए। टाटा समूह पिछले 99 सालों से जमशेदपुर पर नियंत्रण हासिल किए हुए है। भारत के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली एक तीन जजों की बेंच ने राज्य सरकार से एक अंतरिम कदम उठाने के लिए कहा है। हाईकोर्ट पहले ही राज्य सरकार से कह चुकी है कि या तो इसे एक इंडस्ट्रियल टाउनशिप घोषित करे या इसे पंचायती राज कानून के तहत एक चुनी हुई संस्था के हवाले करे। 



मानवाधिकार कार्यकर्ता जवाहर लाल शर्मा की ओर से दायर याचिका पर मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा समेत तीन न्यायमूर्ति ने सुनवाई की। जवाहर लाल शर्मा की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण और सुरभि कुमारी ने पक्ष रखा तो टाटा स्टील की ओर से अभिषेक मनु सिंघवी ने बहस की। दोनों पक्षों की सुनने के बाद उच्चतम न्यायालय ने झारखंड सरकार, टाटा स्टील और जमशेदपुर यूटिलिटीज एंड सर्विसेज कंपनी (जुस्को) को इस मसले पर नोटिस निर्गत करने का निर्देश दिया। उन्हें 8 सप्ताह के भीतर उच्चतम न्यायालय में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया गया है। 


जमशेदपुर नगर निगम या इंडस्ट्रियल टाउन बनाने के मसले पर दो साल पहले सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन मुकदमा इस आधार पर समाप्त हो गया था कि झारखंड सरकार और टाटा स्टील के बीच अधिकतर मामले में सहमति बन गई है। जिन मसलों पर असहमति है उन पर वार्ता कर सहमति बना ली जाएगी। जवाहर लाल शर्मा के अनुसार, दो साल तक झारखंड सरकार और टाटा स्टील के बीच कोई समझौता नहीं हुआ तो सूचना अधिकार कानून के तहत नगर विकास विभाग से जानकारी मांगी। वहां से जवाब मिला कि समझौता नहीं हुआ है। फिर उन्होंने उच्चतम न्यायालय में नए सिरे से याचिका दाखिल की। 

जमशेदपुर में नगर निगर का काम कौन करता है?

रतन टाटा
रतन टाटा
जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि टाटा जमशेदपुर शहर में बाहरी लोगों के खिलाफा भेदभाव कर रहा है। इसके परिणामस्वरूप जमेशदपुर के अधिकांश इलाकों में मूलभूत नागरिक सुविधाएं नहीं हैं। याचिका में कहा गया है कि यह शहर न तो एक इंडस्ट्रियल टाउनशिप है और न ही नगर निगम जैसी किसी चुनी हुई संस्था के अधीन है। जमशेदपुर अभी भी एक अधिसूचित एरिया काउंसिल द्वारा प्रशासित शहर है। इस जनहित याचिका में कहा गया है कि हाईकोर्ट ने अपने आदेश में सरकार को इसे एक साल के भीतर पंचायती राज कानून के तहत चुनी हुई संस्था के हवाले कर देने को कहा था, नहीं तो इसे एक इंडस्ट्रियल टाउनशिप घोषित करने का आदेश दिया था। इस मामले में सरकार ने अभी तक कुछ नहीं किया है। 

जमशेदपुर में नगर निगम न होने की वजह से मूलभूत सेवाएं जैसे प्राथमिक शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, जल आपूर्ति, ठोस कचड़ा प्रबंधन और अन्य नागरिक सुविधाएं जैसे सड़क, पार्क आदि की जिम्मेदारी एक बिना चुनी हुई, बिना जिम्मेदारी वाले औद्योगिक संस्थान के पास है। 

पीआईएल में 1988 से अब तक की सभी जरूरी बातें: याचिकाकर्ता

याचिकाकर्ता जवाहर लाल शर्मा ने कहा जमशेदपुर नगर निगम बनाने के लिए 1988 में याचिका दाखिल हुई थी। 1989 में कोर्ट ने नगर निगम बनाने का आदेश दिया था। टाटा स्टील ने इसे नहीं माना। पटना हाईकोर्ट से स्थगनादेश लिया गया। हाईकोर्ट ने नगर निगम बनाने का आदेश दिया तो फिर टाटा स्टील सुप्रीम कोर्ट चली गई। दो साल पहले सुप्रीम कोर्ट में झारखंड सरकार और टाटा स्टील ने जवाब दिया कि दोनों पक्षों में अधिकतर मसले पर सहमति बन चुकी है। जिन मसले पर असहमति है, वार्ता कर उन पर सहमति बना ली जाएगी। दो साल में कुछ नहीं हुआ। इन सारी बातों से उच्चतम न्यायालय को अवगत कराया गया है। अब जमशेदपुर नगर निगम बनाने व तीसरा मताधिकार दिलाने का अनुरोध किया है। 
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