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अफ्रीका में भारतीय: 'बचा लो इबोला से'

Thu, 04 Sep 2014 11:13 AM IST
Updated Thu, 04 Sep 2014 11:13 AM IST
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indian want to return from africa in fear of ebola

झारखंड के कई जिलों से अफ्रीकी देश कॉंगो गए सैकड़ों भारतीय मजदूर इबोला के फैलने से भयभीत हैं और अपने देश लौटना चाहते हैं। फोन पर वे अपना डर बयान करते हैं और स्थानीय प्रशासन को जानकारी मिल जाने के बाद, वापस आने के लिए सरकार की मदद का इंतजार कर रहे हैं।

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इबोला वो ख़तरनाक बीमारी है जो एक मनुष्य के द्रव्यों से दूसरे तक फैलती है और जानलेवा हो सकती है। इससे अफ्रीकी देशों में 1000 से अधिक लोग मारे गए हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसके बारे में चेतावनी और इबोला से बचने के तरीकों की घोषणा की है।

"मजदूर आदमी हूं बहुत कुछ जानता नहीं, लेकिन ये जो बीमारी इबोला है ना, बहुत खतरनाक है। क्लिक करें इबोला का वायरस फैलता जा रहा है। पता नहीं कब क्या हो जाए। हर पल भय आंखों के सामने घूमता है। अपने राज्य के 500-600 लोग यहां फंसे हुए हैं। सरकार से कहकर यहां से निकाल लीजिए।"
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अफ्रीका के कॉंगो से झारखंड के बालेश्वर महतो फ़ोन पर एक सांस में यह सब सब बोल जाते हैं। वे गिरीडीह जिले के बगोदर थाना क्षेत्र के नवाडीह गांव के रहने वाले हैं। साल भर पहले रोजी- रोटी कमाने कांगो गए थे। उनके साथ इसी गांव के और भी लोग हैं। वे कांगो में ट्रांसमिशन लाइन बिछाने का काम करते हैं।
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घर, परिवार, देश से दूर मुश्कलों से घिरे बालेश्वर कोई अकेले नहीं हैं। अफ़्रीका के कॉंगो, किनशासा में फंसे झारखंड के सैकड़ों मज़दूर क्लिक करें इबोला से डरे हुए हैं। वहाँ वायरस बढ़ रहा है, यहाँ उनके परिजनों की बेचैनी।

गिरिडीह के सरिया थाना क्षेत्र के खूंटा बंदखारो गांव के रहने वाले अरविंद कुमार पिछले महीने नौ अगस्त को किनशासा गए हैं। उनके पिता प्यारी महतो बताते हैं कि रविवार को बेटे ने फ़ोन पर बताया, " बाबूजी किसी तरह यहां से बचा ले जाइए। भर जिंदगी नून-रोटी खाएंगे पर परदेस नहीं जाएंगे।" वे बताते हैं कि जो लोग पहले ही वहां से लौटे हैं। वे कांगो के नाम से ही घबरा जाते हैं।

गृह सचिव, उपायुक्त से गुहार

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बगोदर से भाकपा माले के विधायक विनोद सिंह कहते हैं कि उन्होंने राज्य के गृह सचिव से इस मामले में आवश्यक कदम उठाने का अनुरोध किया है। गिरिडीह के उपायुक्त को भी पूरी जानकारी दी है।

उनका कहना है कि हर दिन उनके पास कांगो, किनशासा से यहां के मजदूरों के फोन आ रहे हैं। अधिकतर लोग काम पर भी नहीं जा रहे हैं। दरअसल वहां की कंपनियां यहां के मजदूरों का वहां ख्याल नहीं रखतीं। पिछले साल भी कई मजदूरों की वहां मौतें हो चुकी हैं।

एक मजदूर रघु के चाचा प्रेमचंद महतो का कहना है कि इबोला की चपेट में मरते लोगों को देख वे लोग बेहद घबराए हुए हैं। कई मजदूरों से घर वालों का संपर्क नहीं हो पाने की वजह से परिजनों की चिंता बढ़ती जा रही है।

'गंभीरता से ले रहे हैं'

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गिरिडीह के उपायुक्त दिप्रवा लकड़ा ने बीबीसी को फोन पर बताया कि अरविंद कुमार का पासपोर्ट नंबर 55 23097 है। उनके साथ अन्य पंद्रह लोग हैं। वहां छह सौ लोग फंसे हो सकते हैं। कांगो, किनशासा में फंसे मजदूरों को स्वदेश वापस लाने के लिए उन्होंने राज्य के गृह सचिव को 28 अगस्त को एक पत्र भेजा है।


हज़ारीबाग के उपायुक्त सुनील कुमार बताते हैं कि कॉंगो से मजदूरों ने फ़ोन कर अपनी व्यथा बताई है। कथित तौर पर सभी इबोला से भयभीत हैं। उन्होंने सरकार के श्रम सचिव को 19 मजदूरों के बारें में जानकारी दी है।

राज्य के गृह सचिव एनएन पांडेय कहते हैं कि इस मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है। गिरिडीह उपायुक्त के पत्र के आधार पर दिल्ली में तैनात स्थानिक आयुक्त को इस मामले में आवश्यक कार्रवाई करने को कहा है। वहीं दिल्ली में तैनात एक अधिकारी ने बताया कि यह संवेदनशील मामला है। इसलिए कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

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