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झारखंड: गिरिडीह जिले में 30 हाथियों का आतंक, शाम होते ही गांवों में धावा; रौंदी धान की फसल
Fri, 11 Sep 2026 10:25 PM IST
तरुणेंद्र कुमार चतुर्वेदी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला रांची
Published by: तरुणेंद्र कुमार चतुर्वेदी
Updated Fri, 11 Sep 2026 10:25 PM IST
सार
गिरिडीह के पीरटांड़ में करीब 30 हाथियों के झुंड ने ग्रामीणों की मुश्किल बढ़ा दी है। कुम्हरलालो और पालगंज पंचायत के गांवों में हाथी धान की फसल रौंदकर किसानों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। शाम होते ही बस्तियों में पहुंचने से ग्रामीण दहशत में रात गुजार रहे हैं।
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फाइल फोटो।
विस्तार
झारखंड के गिरीडीह के पीरटांड़ प्रखंड की कुम्हरलालो और पालगंज पंचायत के विभिन्न गांवों में करीब 30 हाथियों का झुंड लगातार भारी उत्पात मचा रहा है। हाथियों के इस दल ने खेतों में लगी धान की फसल को रौंदकर किसानों को बड़ा आर्थिक नुकसान पहुंचाया है। दिन के समय हाथियों का दल जंगल की ओर चला जाता है, लेकिन शाम होते ही बस्तियों में पहुंचकर तबाही मचाता है। इसके चलते क्षेत्र के ग्रामीण भय और दहशत के माहौल में रात बिताने को विवश हैं।
तीन-चार समूहों में बंटे हाथी
ग्रामीणों के अनुसार हाथियों का यह झुंड तीन से चार समूहों में विभाजित हो जाता है। अलग-अलग दिशाओं में हाथियों के निकल जाने से वन विभाग की टीम को उन्हें खदेड़ने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वनकर्मी जब एक स्थान से हाथियों को जंगल की तरफ भगाते हैं, तभी दूसरे मोहल्ले या टोले में उनके पहुंचने की खबर मिल जाती है। इसके बाद वन विभाग को तुरंत उस नए इलाके में पहुंचना पड़ता है।
ग्रामीणों की मशाल से तैयारी
हाथियों के बार-बार हमला करने से ग्रामीणों की दैनिक दिनचर्या प्रभावित हुई है। ग्रामीण सुबह होते ही रात के लिए मशाल तैयार करने, पटाखों का प्रबंध करने और टॉर्च जैसी रोशनी की व्यवस्था करने में जुट जाते हैं। ग्रामीणों को हर पल यह चिंता सताती है कि रात में हाथियों का झुंड किस दिशा से आकर हमला कर दे। शाम होते ही लोग अपने घरों के पास चौकन्ने हो जाते हैं। हाथियों के डर से लोग शाम के बाद घरों से बाहर निकलने से बच रहे हैं।
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लंबे ठहराव से बढ़ी चिंता
ग्रामीणों के मुताबिक पीरटांड़ के इन क्षेत्रों से हाथियों का दल वर्षों से गुजरता रहा है। आमतौर पर हाथी कुछ समय बाद अन्य जंगलों की ओर चले जाते थे, लेकिन इस बार हाथियों का झुंड लंबे समय से कुम्हरलालो और पालगंज पंचायत के आसपास ही ठहरा हुआ है। पूर्व में भी हाथियों के हमलों में कई लोगों की जान जा चुकी है। ग्रामीणों ने कहा कि केवल खदेड़ने से समस्या नहीं सुलझेगी। उन्होंने वन विभाग तथा प्रशासन से हाथियों को रोकने की ठोस योजना बनाने, प्रवेश को रोकने और फसल नुकसान का उचित मुआवजा देने की मांग की है।
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तीन-चार समूहों में बंटे हाथी
ग्रामीणों के अनुसार हाथियों का यह झुंड तीन से चार समूहों में विभाजित हो जाता है। अलग-अलग दिशाओं में हाथियों के निकल जाने से वन विभाग की टीम को उन्हें खदेड़ने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वनकर्मी जब एक स्थान से हाथियों को जंगल की तरफ भगाते हैं, तभी दूसरे मोहल्ले या टोले में उनके पहुंचने की खबर मिल जाती है। इसके बाद वन विभाग को तुरंत उस नए इलाके में पहुंचना पड़ता है।
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ग्रामीणों की मशाल से तैयारी
हाथियों के बार-बार हमला करने से ग्रामीणों की दैनिक दिनचर्या प्रभावित हुई है। ग्रामीण सुबह होते ही रात के लिए मशाल तैयार करने, पटाखों का प्रबंध करने और टॉर्च जैसी रोशनी की व्यवस्था करने में जुट जाते हैं। ग्रामीणों को हर पल यह चिंता सताती है कि रात में हाथियों का झुंड किस दिशा से आकर हमला कर दे। शाम होते ही लोग अपने घरों के पास चौकन्ने हो जाते हैं। हाथियों के डर से लोग शाम के बाद घरों से बाहर निकलने से बच रहे हैं।
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लंबे ठहराव से बढ़ी चिंता
ग्रामीणों के मुताबिक पीरटांड़ के इन क्षेत्रों से हाथियों का दल वर्षों से गुजरता रहा है। आमतौर पर हाथी कुछ समय बाद अन्य जंगलों की ओर चले जाते थे, लेकिन इस बार हाथियों का झुंड लंबे समय से कुम्हरलालो और पालगंज पंचायत के आसपास ही ठहरा हुआ है। पूर्व में भी हाथियों के हमलों में कई लोगों की जान जा चुकी है। ग्रामीणों ने कहा कि केवल खदेड़ने से समस्या नहीं सुलझेगी। उन्होंने वन विभाग तथा प्रशासन से हाथियों को रोकने की ठोस योजना बनाने, प्रवेश को रोकने और फसल नुकसान का उचित मुआवजा देने की मांग की है।