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Jharkhand: असम CM सरमा ने रांची में एक कार्यकर्ता के घर खाया खाना, पीएम मोदी के मन की बात पर कही ये बात
Sun, 25 Aug 2024 02:08 PM IST
काव्या मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
Published by: काव्या मिश्रा
Updated Sun, 25 Aug 2024 02:08 PM IST
सार
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने दावा किया है कि राज्य में महिलाओं के खिलाफ अपराध की हालिया घटनाएं भूमि हड़पने और असमिया लोगों की पहचान को खतरे में डालने के बड़े इरादे से की जा रही हैं।
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मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा रांची में एक पार्टी कार्यकर्ता के घर भोजन करते।
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने रांची में एक पार्टी कार्यकर्ता के घर दोपहर का भोजन किया। वहीं, पीएम मोदी के मन की बात भी सुनी। सीएम ने कहा कि यह एक अच्छा एहसास था।
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#WATCH झारखंड: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने रांची में एक पार्टी कार्यकर्ता के घर दोपहर का भोजन किया। pic.twitter.com/a4PuQLeY0X
— ANI_HindiNews (@AHindinews) August 25, 2024विज्ञापन
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सीएम सरमा ने पत्रकारों से कहा, 'मैंने अपने आदिवासी भाइयों के साथ झारखंड में पीएम मोदी के मन की बात सुनी। यह एक अच्छा एहसास था। पीएम मोदी ने जो सबसे बड़ी बात कही, वह थी अंतरिक्ष के बारे में।'
हिमंत बिस्वा सरमा ने झारखंड के रांची में ढोल भी बजाया।
#WATCH | Assam CM and BJP Jharkhand in-charge Himanta Biswa Sarma tried his hands on a traditional dhol in Jharkhand's Ranchi, earlier today. pic.twitter.com/s1fXIPAGR6
— ANI (@ANI) August 25, 2024
महिलाओं के खिलाफ अपराधों के पीछे 'जमीन हड़पने का' बड़ा इरादा: सीएम सरमा
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने दावा किया है कि राज्य में महिलाओं के खिलाफ अपराध की हालिया घटनाएं भूमि हड़पने और असमिया लोगों की पहचान को खतरे में डालने के बड़े इरादे से की जा रही हैं। उन्होंने अपराधों के पीछे 'राजनीतिक संरक्षण' का संकेत दिया, जबकि यह भी दावा किया कि वित्तीय शक्ति असमिया लोगों के हाथों से बाहर जा रही है।
उन्होंने शनिवार देर शाम एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, 'कोई भी समाज एकदम परफेक्ट नहीं है। महिलाओं के खिलाफ अपराध एक वास्तविकता है। पिछले तीन वर्षों में राज्य में इन अपराधों में कमी आई है। लेकिन हाल की घटनाओं में असली इरादा बहुत बड़ा है। दुष्कर्म जैसे अपराधों के जरिए हमारी भूमि और सभ्यता को लक्ष्य बनाना है।'
बांग्लादेश से आए अवैध प्रवासियों पर कही ये बात
असम के मुख्यमंत्री ने बांग्लादेश से आए अवैध प्रवासियों के खिलाफ 1979 से छह साल लंबे आंदोलन का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि असम में यह पिछले 30-35 सालों से चल रहा है। इसलिए असम आंदोलन हुआ। हमने अब कट्टरपंथियों की पहचान कर ली है, लेकिन 1975 में ही असमिया समाज को चेतावनी दे दी गई थी कि ऐसा होगा।'
पीड़ित परिवार वहां नहीं रहना चाहते
यह दावा करते हुए कि इस तरह के अपराधों के माध्यम से 'जमीन हड़पने की बड़ी साजिश' रची जा रही है, सरमा ने कहा, 'ढिंग में पीड़ित के परिवार ने मुझे बताया कि वे अब वहां नहीं रहना चाहते हैं। लोग अपनी संपत्ति बेचकर दूसरी जगहों पर चले जाते हैं। पांच लाख रुपये के प्लॉट के लिए उन्हें 50 लाख रुपये की पेशकश की जाती है।'