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आतंकी गतिविधियों पर लगेगी लगाम, दक्षिणी कश्मीर में बढ़ाई जाएगी सेना के जवानों की संख्या
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
Updated Sat, 10 Sep 2016 12:10 PM IST
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सर्च आपरेशन के दौरान सेना के जवान
- फोटो : निखिल मेहता
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पिछले दो महीने से हिंसा की मार झेल रहे दक्षिणी कश्मीर में सरकार ने सेना की तैनाती को बढ़ाने का फैसला लिया है।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक दक्षिणी कश्मीर के जिन शांत इलाकों से सेना को हटाया गया था, उन इलाकों में दोबारा सेना की तैनाती की जाएगी।
हालांकि बार-बार सरकार की ओर से यह भी स्पष्ट किया जा रहा है कि सेना को हिंसा से निपटने के लिए नहीं बल्कि आतंकवाद से निपटने के लिए तैनात किया जा रहा है।
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सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक दक्षिणी कश्मीर के जिन शांत इलाकों से सेना को हटाया गया था, उन इलाकों में दोबारा सेना की तैनाती की जाएगी।
हालांकि बार-बार सरकार की ओर से यह भी स्पष्ट किया जा रहा है कि सेना को हिंसा से निपटने के लिए नहीं बल्कि आतंकवाद से निपटने के लिए तैनात किया जा रहा है।
हिंसा रोकने के लिए सीआरपीएफ और पुलिस का प्रयोग
घाटी में तैनात जवान
- फोटो : निखिल मेहता
दरअसल सेना के पास सिर्फ आटोमैटिक हथियार हैं और उनको युद्ध और आतंकवाद से निपटने के लिए ट्रेनिंग दी जाती है। इस वजह से घाटी के मौजूदा हालात में सेना को हिंसा रोकने के लिए तैनात नहीं किया जा सकता।
दक्षिणी कश्मीर में सेना की भूमिका घुसपैठ रोकना और आतंकियों के खिलाफ आपरेशन तेज करना है। हिंसा रोकने के लिए जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ का ही प्रयोग किया जाएगा, क्योंकि इनको ऐसे हालात से निपटने के लिए ही ट्रेनिंग दी जाती है और उनके पास ऐसे हालात के लिए उपयुक्त हथियार भी होते हैं।
वहीं सेना प्रमुख ने भी शुक्रवार को कश्मीर घाटी का दौरा कर सुरक्षा समीक्षा की। उन्होंने भी एलओसी पर जवानों को सतर्क रहने और घुसपैठ रोकने के निर्देश दिए हैं।
गौरतलब है कि आठ जुलाई को बुहरान वानी के मारे जाने के बाद से घाटी में हिंसा जारी है। इस हिंसा में अब तक 75 लोगों की मौत चुकी है जबकि 10 हजार से ज्यादा लोग घायल हैं।
दक्षिणी कश्मीर में सेना की भूमिका घुसपैठ रोकना और आतंकियों के खिलाफ आपरेशन तेज करना है। हिंसा रोकने के लिए जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ का ही प्रयोग किया जाएगा, क्योंकि इनको ऐसे हालात से निपटने के लिए ही ट्रेनिंग दी जाती है और उनके पास ऐसे हालात के लिए उपयुक्त हथियार भी होते हैं।
वहीं सेना प्रमुख ने भी शुक्रवार को कश्मीर घाटी का दौरा कर सुरक्षा समीक्षा की। उन्होंने भी एलओसी पर जवानों को सतर्क रहने और घुसपैठ रोकने के निर्देश दिए हैं।
गौरतलब है कि आठ जुलाई को बुहरान वानी के मारे जाने के बाद से घाटी में हिंसा जारी है। इस हिंसा में अब तक 75 लोगों की मौत चुकी है जबकि 10 हजार से ज्यादा लोग घायल हैं।