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सेना और सरकार की इस रणनीति से पाक को नहीं लगी स्ट्राइक की भनक
राघवेंद्र नारायण मिश्र, अमर उजाला/जम्मू
Updated Fri, 30 Sep 2016 07:07 PM IST
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सुरक्षा मामलों की कैबिनेट कमेटी
- फोटो : PTI
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भारतीय सेना ने रणनीति के तहत पहले पाकिस्तानी सेना को छकाया और बाद में चित कर दिया। उड़ी सैन्य शिविर पर आतंकी हमले के बाद भारतीय सेना ने अपनी कश्मीर घाटी के उड़ी और टंगधार से सटे एलओसी पर अपनी ताकत बढ़ाकर पाकिस्तान सेना के रणनीतिकारों को उलझाया और इस बीच पुंछ और कुपवाड़ा सेक्टर में सर्जिकल अटैक की गोपनीय तैयारी कर ली।
उड़ी हमले के बाद लश्कर-ए तैयबा ने हमले की जिम्मेदारी ली थी लेकिन भारतीय सेना ने तत्काल इसे जैश-ए मोहम्मद की करतूत बताकर भी पाक सेना को भ्रमित कर दिया। इस रणनीति से लश्कर-ए तैयबा के कैंपों को तबाह करने की व्यूहरचना में बाधा उत्पन्न नहीं हो सकी।
सेना के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक सेना को उड़ी हमले के बाद भिम्बर, केल और लीपा इलाके में लश्कर-ए- तैयबा के मुखिया हाफिज सईद के मूवमेंट की भी खबर मिली थी। समझा जाता है कि सर्जिकल अटैक से पहले हाफिज ने पीओके छोड़ दिया था। सर्जिकल अटैक में लश्कर के ज्यादा कैंप तबाह हुए हैं।
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उड़ी हमले के बाद लश्कर-ए तैयबा ने हमले की जिम्मेदारी ली थी लेकिन भारतीय सेना ने तत्काल इसे जैश-ए मोहम्मद की करतूत बताकर भी पाक सेना को भ्रमित कर दिया। इस रणनीति से लश्कर-ए तैयबा के कैंपों को तबाह करने की व्यूहरचना में बाधा उत्पन्न नहीं हो सकी।
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सेना के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक सेना को उड़ी हमले के बाद भिम्बर, केल और लीपा इलाके में लश्कर-ए- तैयबा के मुखिया हाफिज सईद के मूवमेंट की भी खबर मिली थी। समझा जाता है कि सर्जिकल अटैक से पहले हाफिज ने पीओके छोड़ दिया था। सर्जिकल अटैक में लश्कर के ज्यादा कैंप तबाह हुए हैं।
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पाक ने एक दर्जन आतंकी शिविरों को बंद कर छह के ठिकाने बदले
सर्च ऑपरेशन के दौरान सेना के जवान
- फोटो : File Photo
सेना के सूत्रों के मुताबिक एक या दो कैंप जैश और हिजबुल से भी जुड़े हो सकते हैं। उड़ी हमले के दूसरे ही दिन भारतीय सेना की डोगरा रेजीमेंट और राष्ट्रीय रायफल्स ने उड़ी में कार्रवाई तेज की जिसमें 10 आतंकी मारे गए।
इसके तुरंत बाद रणनीति के तहत सेना की दो अतिरिक्त ब्रिगेड उड़ी सेक्टर में तैनात किए गए।इतना ही नहीं पाक सेना को भ्रमित करने के लिए टंगधार और करनाह सेक्टर में भी अतिरिक्त सेना की तैनाती चलती रही।
इन तैयारियों के खौफ में पाकिस्तानी सेना ने उड़ी के पास चल रहे एक दर्जन आतंकी शिविरों को बंद कर छह के ठिकाने बदल दिए। लेकिन, भारतीय सेना के असली निशाने पर आए भिम्बर, केल. तत्तापानी और लीपा के कैंपों के मामले में पाक बेपरवाह रहा।
इसके तुरंत बाद रणनीति के तहत सेना की दो अतिरिक्त ब्रिगेड उड़ी सेक्टर में तैनात किए गए।इतना ही नहीं पाक सेना को भ्रमित करने के लिए टंगधार और करनाह सेक्टर में भी अतिरिक्त सेना की तैनाती चलती रही।
इन तैयारियों के खौफ में पाकिस्तानी सेना ने उड़ी के पास चल रहे एक दर्जन आतंकी शिविरों को बंद कर छह के ठिकाने बदल दिए। लेकिन, भारतीय सेना के असली निशाने पर आए भिम्बर, केल. तत्तापानी और लीपा के कैंपों के मामले में पाक बेपरवाह रहा।
राजोरी-पुंछ में थी आतंकी हमले की आशंका
army
- फोटो : File Photo
उड़ी से ठीक पहले लश्कर आतंकियों ने उड़ी में सेना की 93 ब्रिगेड को निशाना बनाने की कोशिश की थी। भारतीय सेना ने उस नापाक हरकत को नाकाम कर दिया था।
सेना को इनपुट मिले थे कि उड़ी हमले के बाद पाकिस्तान एलओसी पर राजोरी-पुंछ में हमले की साजिश रच रहा है।
कश्मीर में सुरक्षा बलों की सख्ती के बाद तेजी से सामान्य हो रहे हालात ने पाकिस्तानी सेना और आतंकी संगठनों की नींद उड़ी दी।
सेना को इनपुट मिले थे कि उड़ी हमले के बाद पाकिस्तान एलओसी पर राजोरी-पुंछ में हमले की साजिश रच रहा है।
कश्मीर में सुरक्षा बलों की सख्ती के बाद तेजी से सामान्य हो रहे हालात ने पाकिस्तानी सेना और आतंकी संगठनों की नींद उड़ी दी।
लांचिंग पैड पर 150 आतंकियों की मौजूदगी की थी सूचना
मुठभेड़ के दौरान मोर्चा संभाल जवान
- फोटो : File Photo
कर्फ्यू हटते ही श्रीनगर, अनंतनाग, शोपियां सहित सभी प्रमुख बाजार खुलने लगे। इससे बौखलाकर आतंकी संगठनों और उपद्रवियों ने दुकानदारों और सियासी शख्सियतों को धमकी देनी शुरू कर दी।
पुंछ से सटे एलओसी के उस पार आतंकियों के सात लांचिंग पैड पर लगभग 150 आतंकियों की मौजूदगी के इनपुट 26 सितंबर को ही मिल गए थे। इस सूचना के बाद पुंछ और कुपवाड़ा में सेना के विशेष प्रशिक्षित कमांडो को पहुंचाया गया।
इनमें अमेरिकी सेना के साथ उत्तराखंड के जंगलों में संयुक्त अभ्यास कर चुके कमांडो भी शामिल थे।
पुंछ से सटे एलओसी के उस पार आतंकियों के सात लांचिंग पैड पर लगभग 150 आतंकियों की मौजूदगी के इनपुट 26 सितंबर को ही मिल गए थे। इस सूचना के बाद पुंछ और कुपवाड़ा में सेना के विशेष प्रशिक्षित कमांडो को पहुंचाया गया।
इनमें अमेरिकी सेना के साथ उत्तराखंड के जंगलों में संयुक्त अभ्यास कर चुके कमांडो भी शामिल थे।