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कश्मीर में पत्थरबाजों के हमले से सुरक्षाबलों में तैयार हुई लंगड़ी टुकड़ी
राघवेंद्र नारायण मिश्र, अमर उजाला/जम्मू
Updated Tue, 02 Aug 2016 11:23 AM IST
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श्रीनगर में सुरक्षा बलों पर पथराव करते युवक
- फोटो : File Photo
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जम्मू कश्मीर में पत्थरबाजों पर सुरक्षा बलों की सख्ती सियासी मुद्दा बनती रही है लेकिन उपद्रवी तत्वों के हमले की सुरक्षा बलों को महंगी कीमत चुकानी पड़ रही है। इस साल पत्थरबाजों के हमले में अब तक चार हजार से अधिक जवान घायल हो चुके हैं। केंद्रीय रिजर्व पुलिस को सबसे अधिक भुगतना पड़ रहा है।
सुरक्षा बलों द्वारा पेलेट गन के इस्तेमाल पर इस बार सियासी रंग चढ़ा लेकिन सुरक्षा बलों के अधिक संख्या में घायल होने के कारण अर्द्धसैनिक बलों में एक लंगड़ी टुकड़ी तैयार हो गई है। इस टुकड़ी को परेड में भी अलग टुकड़ी के रूप में खड़ा करने की मजबूरी है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय के दस्तावेजों के अनुसार पिछले साल की तुलना में पत्थरबाजी की घटनाओं में लगातार इजाफा हुआ है। पिछले साल 12 महीनों में पत्थरबाजी की बड़ी घटनाओं की संख्या 730 थी जो इस साल सिर्फ सात महीनों में बढ़कर 1029 हो गई है। इस साल ऐसी घटनाओं में सुरक्षा बलों के दो जवान भी शहीद हो गए।
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सुरक्षा बलों द्वारा पेलेट गन के इस्तेमाल पर इस बार सियासी रंग चढ़ा लेकिन सुरक्षा बलों के अधिक संख्या में घायल होने के कारण अर्द्धसैनिक बलों में एक लंगड़ी टुकड़ी तैयार हो गई है। इस टुकड़ी को परेड में भी अलग टुकड़ी के रूप में खड़ा करने की मजबूरी है।
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केंद्रीय गृह मंत्रालय के दस्तावेजों के अनुसार पिछले साल की तुलना में पत्थरबाजी की घटनाओं में लगातार इजाफा हुआ है। पिछले साल 12 महीनों में पत्थरबाजी की बड़ी घटनाओं की संख्या 730 थी जो इस साल सिर्फ सात महीनों में बढ़कर 1029 हो गई है। इस साल ऐसी घटनाओं में सुरक्षा बलों के दो जवान भी शहीद हो गए।
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अलग-अलग झड़पों में गईं 48 जानें
kashmir protest
- फोटो : PTI
पिछले साल पत्थरबाजों ने सुरक्षा बलों के 886 जवानों को घायल किया था लेकिन इस साल 25 जुलाई तक 3550 जवान जख्मी हो चुके थे। अब यह संख्या चार हजार का आंकड़ा पार कर चुकी है। पत्थरबाजों के हमले में सिर्फ जवान ही नहीं आम नागरिक भी निशाना बन रहे हैं।
पत्थरबाजों ने इस बार ढाई हजार आम नागरिकों को भी जख्मी किया है। झड़पों में 48 जानें भी गईं। पिछले साल से सिर्फ एक महीने की तुलना में भी इस साल का आंकड़ा भारी है। पिछले साल एक जनवरी से 30 जून तक पत्थरबाजी की 224 घटनाएं दर्ज हैं जबकि इसी अवधि में इस साल पत्थरबाजी की 390 बड़ी घटनाएं हुईं हैं।
पत्थरबाजी का सिलसिला अभी थमा नहीं है। सीआरपीएफ के अधिकारियों के अनुसार इस मुद्दे को सियासी रंग देने के बाद सुरक्षा बलों पर उपद्रवियों से नरमी से निपटने का दबाव बढ़ा है। इस कारण जवानों के घायल होने की संख्या में इजाफा हो रहा है।
पत्थरबाजों ने इस बार ढाई हजार आम नागरिकों को भी जख्मी किया है। झड़पों में 48 जानें भी गईं। पिछले साल से सिर्फ एक महीने की तुलना में भी इस साल का आंकड़ा भारी है। पिछले साल एक जनवरी से 30 जून तक पत्थरबाजी की 224 घटनाएं दर्ज हैं जबकि इसी अवधि में इस साल पत्थरबाजी की 390 बड़ी घटनाएं हुईं हैं।
पत्थरबाजी का सिलसिला अभी थमा नहीं है। सीआरपीएफ के अधिकारियों के अनुसार इस मुद्दे को सियासी रंग देने के बाद सुरक्षा बलों पर उपद्रवियों से नरमी से निपटने का दबाव बढ़ा है। इस कारण जवानों के घायल होने की संख्या में इजाफा हो रहा है।