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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   may be Governor's rule in Jammu and Kashmir

घाटी में हिंसा के बाद जा सकती है मुफ्ती की सरकार, राज्यपाल शासन होगा लागू?

Thu, 25 Aug 2016 12:06 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू Updated Thu, 25 Aug 2016 12:06 PM IST
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 may be Governor's rule in Jammu and Kashmir
गृहमंत्री राजनाथ सिहं और पीएम मोदी - फोटो : File Photo
केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह के कश्मीर दौरे में रियासत में राज्यपाल शासन लागू करने की संभावना पर भी मंथन चल रहा है।
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सूत्रों के मुताबिक बिगड़े हालात को पटरी पर लाने के लिए केंद्र इस विकल्प पर भी गंभीर है। हालांकि, रियासत में भाजपा भी सरकार में शामिल है और मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती खुलकर सुरक्षा बलों की कार्रवाइयों का समर्थन कर रही हैं। लेकिन, इसके बावजूद हालात में सुधार नहीं हुए तो केंद्र इस विकल्प को आजमा सकता है।

राज्यपाल एनएन वोहरा पहले ही पद से छुट्टी की केंद्र से गुहार लगा चुके हैं। ऐसे में राज्यपाल शासन से पहले गवर्नर बदलने की भी जरूरत होगी। फिलहाल राजनाथ कश्मीरियों का दिल जीतने की मुहिम को आगे बढ़ाने में जुटे हैं। 
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हिंसा भड़काने वालों की सूची तैयार

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गृहमंत्री राजनाथ सिंह - फोटो : amar ujala
सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार ने ऐसे 60 लोगों की सूची तैयार की है जो राज्य में अशांति फैलाने और बच्चों-युवाओं को भड़काने में लगे हुए हैं। केंद्र सरकार चाहती हैं कि राज्य सरकार इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करे। केंद्र सरकार का मानना है कि इन 60 लोगों पर कार्रवाई के बाद हालात पर काबू में पाने में ज्यादा वक्त नहीं लगेगा।

गृहमंत्री राजनाथ सिंह भी हिंसा की जमीनी हकीकत जानने के लिए श्रीनगर में मौजूद है। सरकार की ओर से बार-बार बयान जारी कर इस बात को स्पष्ट किया जा रहा कि कश्मीर मुद्दे पर संविधाय के दायरे में ही बात की जाएगी। जबकि अलगाववादियों का कहना है कि संविधान के दायरे में रहकर कश्मीर मुद्दे का समाधान नहीं हो सकता।

गृहमंत्री कश्मीर में अब तक राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की समीक्षा कर रहे। समीक्षा के बाद ही आगे की रणनीति पर फैसला लिया जाएगा।

हालात सुधारने के लिए बीएसएफ की तैनाती

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श्रीनगर में सुरक्षा बलों पर पथराव करते युवक - फोटो : PTI
गौरतलब है कि आठ जुलाई को हिजबुल कमांडर बुरहान वानी के मारे जाने के बाद से ही कश्मीर में हिंसा जारी है। तमाम प्रयासों के बाद भी हिंसा पर काबू नहीं पाया जा सका है।

इस हिंसा में अभी तक 2200 सुरक्षा बल के जवान और 4000 से ज्यादा नागरिक घायल हो चुके हैं। हिंसा पर काबू पाने के लिए सरकार ने 12 साल बाद घाटी के भीतरी इलाकों में बीएसएफ की तैनाती की है।
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