कारगिल गाथा: करारी हार से बौखलाए पाकिस्तानी लैंडमाइन बिछाकर भागे
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करारी हार मिलने से बौखलाए पाकिस्तानी घुसपैठिए एलओसी पार लौटते समय भी भारतीय सेना को नुकसान पहुंचाने का मंसूबा नहीं छोड़ पाए। एलओसी से सटे पर्वतीय इलाके में छिपे और घातक लगाकर बैठे घुसपैठियों को जब कोई रास्ता नहीं सूझा तो उन्हें लौटना पड़ा।
लेकिन, जाते-जाते इलाके में माइनें बिछाने से बाज नहीं आए। जुलु टाप को दुश्मन के कब्जे से छुड़ाकर क्लीयर करने के लिए 3/3 गोरखा राइफल्स की डेल्टा कंपनी ने सूझबूझ से जुलु बेस को वापस हासिल कर लिया।
भारतीय सेना से खुद को घिरते देख दुश्मन ने जुलु टाप खाली कर दिया, लेकिन भारतीय सेना की टुकड़ी के लिए सैकड़ों माइनें बिछा दी गई थीं। सावधानीपूर्वक पूरे इलाके को सेनिटाइज करने के लिए विशेष आपरेशन चलाया गया। इस दौरान इलाके से 550 माइनें सुरक्षित निकाल ली गईं।
माइन बिछाकर भाग खड़े हुए थे घुसपैठिए
9 पैरा (स्पेशल फोर्स) की टीम ने माइनफील्ड के बीच से निकलते हुए रस्सियों के सहारे चढ़ाई की। मेजर सुधीर कुमार के नेतृत्व में टीम ने आखिरकार जुलु टॉप तक पहुंच बनाकर उस पर कब्जा कर लिया। इससे पूर्व जुलु स्पर भी कब्जा करने का मिशन पूरा कर लिया गया।
चार्ली कंपनी ने कैप्टन एच गुरंग के नेतृत्व में जुलु स्पर पर दुश्मन की गोलाबारी का करारा जवाब दिया। मेजर एस सैनी ने दुश्मन की एक पोजीशन को खाली करवा लिया। वहीं डेल्टा कंपनी ने मेजर पल्लव मिश्रा के नेतृत्व में अभियान को आगे बढ़ाया।
आर्टीलरी अफसर कैप्टन एनएस मेहरा की टुकड़ी ने टारगेट क्षेत्र पर जमकर हमले बोले। दुश्मन ने लगातार जवाबी हमला किया, लेकिन डेल्टा कंपनी ने अपना टारगेट हासिल करने में कामयाबी हासिल कर ली।