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जम्मू कश्मीर ने केंद्र से मांगा सिंधु जल संधि नुकसान का मुआवजा

Thu, 30 Jun 2016 12:40 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू Updated Thu, 30 Jun 2016 12:40 PM IST
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JK govt to seek compensation for Indus Water Treaty losses
जम्मू-कश्मीर व‌िधानसभा - फोटो : Amar Ujala

भारत-पाकिस्तान के बीच हुई सिंधु जल संधि से जम्मू कश्मीर को व्यापक नुकसान हुआ है। हालांकि नुकसान के पैमाने का सटीक आकलन नहीं हो पाया है, लेकिन इसके लिए कवायद जारी है। बाकायदा केंद्र से राज्य के नुकसान की भरपाई की मांग भी की जा रही है। 

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विधान परिषद की कार्यवाही के दौरान पीडीपी विधायक जफर इकबाल मन्हास के सवाल पर सरकार की ओर से यह जानकारी दी गई। सिंधु जल संधि से राज्य को हुए नुकसान पर पीएचई, सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण मंत्री फारूक अंद्राबी ने कहा कि नुकसान का पैमाना व्यापक है। 
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भारत और पाक के बीच इस संधि पर वर्ष 1960 में हस्ताक्षर किए गए। संधि छह नदियों पर नियंत्रण को निर्धारित करती है। जम्मू कश्मीर से बहने वाली सिंधु, झेलम और चिनाब नदियों के पानी का नियंत्रण पाकिस्तान को दिया गया है, जबकि पंजाब से बहने वाली ब्यास, रावी और सतलुज नदियों का नियंत्रण भारत के पास है। 
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मंत्री ने कहा कि संधि से हुए कुल नुकसान का आकलन करने के लिए आडिट करवाया जा रहा है। विधायक मन्हास ने जब पूछा कि सरकार ने मसला केंद्र के समक्ष क्यों नहीं उठाया तो अंद्राबी ने कहा यह भारत और पाकिस्तान के बीच का मामला है। 


मन्हास इस उत्तर से संतुष्ट नहीं हुए तो संसदीय मामलों के मंत्री अब्दुल रहमान वीरी ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि राज्य ने केंद्र से सिंधु जल संधि से हुए नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजे की मांग की है।

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