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आनन-फानन में चैंबर का जम्मू बंद स्थगित
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
Updated Fri, 19 Aug 2016 10:19 PM IST
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बंद
- फोटो : Demo Pic.
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चैंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्री जम्मू ने कश्मीर में बिगड़े हालात के बीच राष्ट्रवादी ताकतों का हौसला बढ़ाने के लिए जम्मू में एक दिन के शांतिपूर्वक बंद को देर शाम स्थगित कर दिया। चैंबर के बंद से राजनीतिक दलों की तरफ से भी प्रतिक्रिया का दौर शुरू हो गया था।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ने चैंबर के जम्मू बंद की आलोचना की थी। चैंबर अध्यक्ष ने दोपहर के समय पत्रकार वार्ता करके बंद की घोषणा की और देर शाम दावा किया कि कश्मीर के कुछ प्रभावशाली सिविल सोसायटी के लोगों ने उनसे संपर्क किया है और एक सप्ताह का समय मांगा है, ताकि तीनों संभाग के लोग एक मंच पर आ सकें और शांति बहाली का रास्ता चुन सकें। इसके चलते बंद को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है।
चैंबर के अनुसार जम्मू, लद्दाख और कश्मीर के सिविल सोसायटी के बीच आपसी बातचीत करके शांति बहाली पर चर्चा की जानी थी। कश्मीर के सिविल सोसायटी को भी आमंत्रित किया गया था।
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कश्मीर से किसी भी तरह से कोई रिस्पांस नहीं आने के कारण साफ हो गया है जम्मू, कश्मीर के साथ नहीं है। लद्दाख और जम्मू की अपनी अलग पहचान है और कश्मीर में उठाई जा रही मांग के साथ नहीं है। देर शाम चैंबर ने आनन-फानन में बंद की घोषणा को वापस लिया।
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भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ने चैंबर के जम्मू बंद की आलोचना की थी। चैंबर अध्यक्ष ने दोपहर के समय पत्रकार वार्ता करके बंद की घोषणा की और देर शाम दावा किया कि कश्मीर के कुछ प्रभावशाली सिविल सोसायटी के लोगों ने उनसे संपर्क किया है और एक सप्ताह का समय मांगा है, ताकि तीनों संभाग के लोग एक मंच पर आ सकें और शांति बहाली का रास्ता चुन सकें। इसके चलते बंद को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है।
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चैंबर के अनुसार जम्मू, लद्दाख और कश्मीर के सिविल सोसायटी के बीच आपसी बातचीत करके शांति बहाली पर चर्चा की जानी थी। कश्मीर के सिविल सोसायटी को भी आमंत्रित किया गया था।
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कश्मीर से किसी भी तरह से कोई रिस्पांस नहीं आने के कारण साफ हो गया है जम्मू, कश्मीर के साथ नहीं है। लद्दाख और जम्मू की अपनी अलग पहचान है और कश्मीर में उठाई जा रही मांग के साथ नहीं है। देर शाम चैंबर ने आनन-फानन में बंद की घोषणा को वापस लिया।
अमन बहाली के रास्ते तैयार करने पर जोर
फाइल फोटो
चैंबर अध्यक्ष राकेश गुप्ता ने कहा बंद की काल को स्थगित किया है। लेकिन उनकी मांगे बरकरार हैं। पिछले 40 दिनों से कश्मीर में लगातार बंद है। कर्मचारी भी कार्यालयों में नहीं जा रहे हैं। हर महीने करीब तीन हजार करोड़ रुपये का वेतन दिया जा रहा है, जो आम आदमी के जेबों से गया है। सचिवालय बंद है और मंत्री भी कोई काम नहीं कर रहे हैं।
कश्मीर से सचिवालय को जम्मू शिफ्ट करने की मांग करते हुए चैंबर ने मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती से मांग की है कि वह सभी मंत्रियों को बोलें कि वह जम्मू में कैंप करें। आम जनता इन मंत्रियों से मिले और अपनी समस्याओं के समाधान करवाने का प्रयास करे।
उन्होंने केंद्र एवं राज्य सरकार से पूछा कि पिछले 40 दिनों से व्यापार, टूरिज्म, ट्रांसपोर्टरों को जो घाटा हुआ है, उसकी भरपाई कौन करेगा। वैट जमा कराने की तारीख आगे बढ़ाने की भी चैंबर ने मांग की। उन्होंने इन आरोपों का खंडन किया कि बंद से कश्मीर के अलगाववादियों को समर्थन मिलेगा।
चैंबर ने कश्मीर की सिविल सोसायटी से अपील की थी कि सभी एक मंच पर आकर बातचीत करें और अमन बहाली के रास्ते की तलाश करें। चैंबर ने दो दिन पहले शनिवार को बंद करने की चेतावनी दी। शुक्रवार दोपहर दो बजे पत्रकार वार्ता करके बंद की घोषणा की और देर शाम बंद को स्थगित कर दिया।
कश्मीर से सचिवालय को जम्मू शिफ्ट करने की मांग करते हुए चैंबर ने मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती से मांग की है कि वह सभी मंत्रियों को बोलें कि वह जम्मू में कैंप करें। आम जनता इन मंत्रियों से मिले और अपनी समस्याओं के समाधान करवाने का प्रयास करे।
उन्होंने केंद्र एवं राज्य सरकार से पूछा कि पिछले 40 दिनों से व्यापार, टूरिज्म, ट्रांसपोर्टरों को जो घाटा हुआ है, उसकी भरपाई कौन करेगा। वैट जमा कराने की तारीख आगे बढ़ाने की भी चैंबर ने मांग की। उन्होंने इन आरोपों का खंडन किया कि बंद से कश्मीर के अलगाववादियों को समर्थन मिलेगा।
चैंबर ने कश्मीर की सिविल सोसायटी से अपील की थी कि सभी एक मंच पर आकर बातचीत करें और अमन बहाली के रास्ते की तलाश करें। चैंबर ने दो दिन पहले शनिवार को बंद करने की चेतावनी दी। शुक्रवार दोपहर दो बजे पत्रकार वार्ता करके बंद की घोषणा की और देर शाम बंद को स्थगित कर दिया।